Gurugram Waterlogging : गुरुग्राम में भारी बारिश के बाद सड़कों पर हुए जलभराव ने एक बार फिर शहर के ड्रेनेज सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी बीच जलभराव पर Cars24 का एक अनोखा मार्केटिंग कैंपेन सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। कंपनी ने पानी से डूबी सड़क पर अपनी ब्रांडिंग वाली नीली नाव उतार दी।
शुरुआत में इसका मकसद गुरुग्राम के जलभराव पर मजेदार अंदाज में तंज कसना और लोगों का ध्यान इस समस्या की ओर खींचना था। लेकिन कुछ ही देर में यह नाव केवल प्रचार का हिस्सा नहीं रही, बल्कि जलभराव में फंसे लोगों के लिए सड़क पार करने का साधन बन गई। यानी जिस नाव को कंपनी ने मजाकिया कैंपेन के तौर पर उतारा था, वह कुछ लोगों के लिए सच में पब्लिक ट्रांसपोर्ट बन गई।
Cars24 की ब्रांड, क्रिएटिव और कम्युनिकेशन प्रमुख प्राची शर्मा ने LinkedIn पर इस पूरे मामले की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि कंपनी ने बारिश और जलभराव को लेकर यह मजेदार कैंपेन तैयार किया था। हालांकि, पानी में नाव उतरते ही वहां फंसे लोगों ने इसका इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।
प्राची शर्मा ने इस स्थिति को बताते हुए कहा कि एक मजाक तब मजेदार नहीं रहता, जब वह लोगों का सफर बन जाए। इस घटना ने यह भी दिखाया कि जलभराव के कारण लोगों को किस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। कई जगह सड़क पर इतना पानी जमा था कि पैदल या वाहन से निकलना मुश्किल हो गया था।
इस कहानी में एक और दिलचस्प मोड़ तब आया, जब Cars24 कंपनी की ओर से दावा किया गया कि नाव सड़क पर उतारने के मामले में ट्रैफिक अधिकारियों ने 50 हजार रुपये का चालान किया। प्राची शर्मा ने अपनी पोस्ट में मजाकिया अंदाज में कहा कि कंपनी नाव का खर्च तो उठा ही चुकी है और जरूरत पड़ने पर लोगों की मदद के लिए दोबारा नाव उतारने पर चालान भरने के लिए भी तैयार है।
हालांकि, चालान के नियम और कार्रवाई से जुड़ी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि इस जानकारी में नहीं दी गई है। Cars24 के इस कैंपेन पर सोशल मीडिया यूजर्स की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने इसे शानदार और क्रिएटिव मार्केटिंग बताया, जबकि कुछ ने सवाल उठाया कि अगर सड़क पर नाव चलाने की नौबत आ गई है तो यह शहर के जलभराव की गंभीर समस्या को दिखाता है।
एक यूजर ने पूछा कि 50 हजार रुपये का चालान किस नियम के तहत किया गया। वहीं कई लोगों ने कहा कि इस पूरे मामले में असली मुद्दा नाव नहीं, बल्कि वह जलभराव है जिसने लोगों को सड़क पर नाव से सफर करने को मजबूर कर दिया।