Farmers Protest Uttarakhand: उत्तराखंड के छह जिलों में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत गुट) द्वारा चलाया जा रहा तीन दिवसीय कलेक्ट्रेट धरना फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। किसान नेताओं ने अपनी आठ सूत्रीय मांगों को लेकर स्थानीय प्रशासन को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा है और अब वे सोमवार को जिलाधिकारी (डीएम) के साथ होने वाली महत्वपूर्ण बैठक के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, किसान नेताओं ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी भी दी है कि अगर तय समय के भीतर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे चुप नहीं बैठेंगे और एक बड़े आंदोलन की शुरुआत करेंगे।
किसान संगठन ने सरकार और स्थानीय प्रशासन को उनकी मांगों पर गंभीरता से काम करने के लिए कुछ समय दिया है। किसान नेताओं का कहना है कि अगर सरकार उनकी सभी आठ सूत्रीय मांगों को पूरा कर देती है, तो वे प्रशासन का आभार व्यक्त करेंगे; लेकिन ऐसा न होने की स्थिति में देहरादून कूच की पूरी तैयारी कर ली गई है। यदि सरकार उनकी बात नहीं सुनती है, तो रुद्रपुर में किसान कमेटी की एक बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें आगामी आंदोलन की तारीख तय की जाएगी। इस योजना के तहत, आज से ठीक एक महीने बाद खटीमा से एक विशाल 'ट्रैक्टर मार्च' निकाला जाएगा।
किसान नेताओं ने प्रशासन को आगाह किया है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो वे देहरादून को उसी तरह घेरेंगे जैसे पांच साल पहले देश के किसानों ने राजधानी दिल्ली को घेरा था। किसानों का कहना है कि प्रशासन और सरकार के पास फिलहाल एक से डेढ़ महीने का वक्त है। यदि इस अवधि में उनकी मांगें पूरी नहीं की जाती हैं, तो वे अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ जाएंगे।
धरने के दौरान यह सवाल भी उठा कि जिलाधिकारी खुद किसानों से ज्ञापन लेने क्यों नहीं आए? इस पर अधिकारियों ने स्पष्टीकरण दिया कि डीएम के घर में कुछ गंभीर व्यक्तिगत परेशानी है, लेकिन यदि किसान उनसे मिलना चाहें तो वे शाम या रात तक उपस्थित हो सकते हैं। इसके बाद, किसानों ने आपसी सहमति से मुख्य विकास अधिकारी को ही अपना ज्ञापन सौंपने का बड़ा फैसला किया। किसान नेताओं का कहना था कि ज्ञापन किसे दिया जा रहा है यह महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि महत्वपूर्ण यह है कि सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से ले और उन्हें पूरा करे।
इस पूरे गतिरोध को सुलझाने के लिए प्रशासन ने सोमवार को दोपहर तीन बजे कलेक्ट्रेट के सभागार में किसान कमेटी की जिलाधिकारी के साथ एक बैठक तय की है। अधिकारियों ने किसानों को आश्वस्त किया है कि जिला स्तर पर जितनी भी समस्याओं का समाधान संभव है, उन पर पूरी गंभीरता से विचार किया जाएगा। साथ ही, किसानों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन को नीतिगत फैसलों के लिए शासन स्तर पर भेज दिया गया है। अब सभी की नजरें सोमवार को होने वाली इस बैठक पर टिकी हैं, जो उत्तराखंड में इस आंदोलन का भविष्य तय करेगी।