Uttarakhand Cabinet Decisions: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई उत्तराखंड कैबिनेट की बैठक में राज्य हित से जुड़े 17 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने के लिए नई राज्य सहकारी नीति लागू करने से लेकर स्वास्थ्य, परिवहन, शहरी भूमि रिकॉर्ड, उपनल कर्मचारियों के वेतन और बिजली खरीद से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए।
कैबिनेट ने राष्ट्रीय सहकारी नीति 2025 के अनुरूप उत्तराखंड राज्य सहकारी नीति 2026 तैयार करने को मंजूरी दी है। प्रस्तावित नीति राज्य की भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सहकारी क्षेत्र को मजबूत करने पर केंद्रित होगी।
सरकार के मुताबिक नई नीति के जरिए सहकारी संस्थाओं को ज्यादा पारदर्शी, जवाबदेह, तकनीक आधारित और व्यावसायिक रूप से सक्षम बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।
कैबिनेट ने उत्तराखंड सरकारी सेवक वेतन नियम, 2016 की अनुसूची-1 में वेतन मैट्रिक्स से जुड़े संशोधन को भी मंजूरी दी। इसके तहत ₹1,44,200 से ₹2,18,200 के वेतनमान के लिए लेवल-15 की जगह लेवल-14 और ₹1,82,200 से ₹2,24,100 के वेतनमान के लिए लेवल-16 की जगह लेवल-15 किया जाएगा। संबंधित विभागीय पद संरचनाओं और सेवा नियमावलियों में भी इसी के अनुसार बदलाव माना जाएगा।
पर्यावरण के अनुकूल वाहनों को बढ़ावा देने के लिए कैबिनेट ने हाइब्रिड और CNG से चलने वाले परिवहन वाहनों को मोटर वाहन कर में छूट देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
राज्य में पंजीकृत और दूसरे राज्यों से उत्तराखंड में प्रवेश करने वाले वाहनों पर ग्रीन सेस की व्यवस्था लागू है। सरकार का उद्देश्य CNG और हाइब्रिड वाहनों को प्रोत्साहित करना है।
उत्तराखंड चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सांख्यिकीय संवर्ग में भर्ती और कर्मचारियों की सेवा शर्तों को निर्धारित करने के लिए ‘उत्तराखंड चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सांख्यिकीय संवर्ग समूह क, ख एवं ग सेवा नियमावली 2026’ को मंजूरी दी गई।
कैबिनेट ने राज्य में राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) की शाखा स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इससे रोगों की निगरानी, महामारी और बीमारी के प्रकोप की जांच तथा आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।
प्रस्तावित शाखा में BCL-3 स्तर की सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसके लिए राजकीय मेडिकल कॉलेज, हरिद्वार में उपलब्ध 65 एकड़ भूमि में से एक एकड़ जमीन NCDC को 99 साल की लीज पर सिर्फ ₹1 में देने पर सहमति दी गई है।
कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग के तहत उप कारापाल के पदों पर पदोन्नति व्यवस्था में बदलाव को मंजूरी दी गई है। 25 प्रतिशत पदोन्नति कोटे में 90 प्रतिशत पद प्रधान बंदीरक्षक और 10 प्रतिशत पद महिला बंदीरक्षक से पदोन्नति के जरिए भरे जाने का प्रावधान किया गया है।
कैबिनेट ने उत्तराखंड लोकायुक्त खोजबीन समिति के कार्यकलापों के निर्धारण की नियमावली, 2026 को तैयार करने के प्रस्ताव पर सहमति दी। इसका उद्देश्य लोकायुक्त के अध्यक्ष और सदस्यों के पदों के लिए योग्य नामों का पैनल तैयार करने की प्रक्रिया, समिति की कार्य अवधि, सदस्यों को मिलने वाले भत्ते और चयन की प्रक्रिया निर्धारित करना है।
कैबिनेट ने उत्तराखंड आबादी सर्वेक्षण और अभिलेख संक्रिया नियमावली, 2026 के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके तहत आबादी वाले क्षेत्रों में भूमि का आधुनिक तकनीक से सर्वे किया जाएगा।
इस व्यवस्था में GIS तकनीक, हवाई सर्वेक्षण और ग्राउंड सर्वेक्षण को जोड़कर डिजिटल भू-स्थानिक डेटाबेस तैयार करने की योजना है। इससे भूमि रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने, शहरी नियोजन और संपत्ति लेनदेन में सुविधा मिलने की उम्मीद है।
उत्तराखंड सीड्स एंड तराई डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड में कार्यरत तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को जरूरत के मुताबिक दूसरे विभागों में सेवा स्थानांतरण पर भेजने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली है।
प्रस्ताव के अनुसार 22 तृतीय श्रेणी और 63 चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को ऊधमसिंह नगर और आसपास के जिलों के विभिन्न विभागों में अधिकतम 10 साल या सेवानिवृत्ति से तीन महीने पहले तक, जो पहले हो, सेवा स्थानांतरण के आधार पर भेजा जा सकेगा।
देहरादून में रिस्पना नदी के किनारे बसी मलिन बस्ती के चयनित लाभार्थियों को काठबंगला में बनाए गए 116 आवास आवंटित किए जाएंगे।
सरकार ने नदी किनारे बसी अवैध मलिन बस्तियों के व्यवस्थित विस्थापन के तहत इन आवासों का निर्माण पूरा कराया है। अब नगर निगम देहरादून की ओर से चयनित लाभार्थियों को इन घरों का आवंटन किया जाएगा।
कैबिनेट के सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में से एक उपनल कर्मचारियों को समान कार्य के लिए समान वेतन देने से जुड़ा है। सरकार ने इसे तीन चरणों में लागू करने पर सहमति दी है।
पहले चरण में 1 जनवरी 2016 से पहले नियुक्त कर्मचारियों को शामिल किया जा रहा है। दूसरे चरण में 1 जनवरी 2016 से 12 नवंबर 2018 तक नियुक्त कर्मचारियों पर 9 नवंबर 2026 से कार्रवाई की जाएगी। तीसरे चरण में 13 नवंबर 2018 से 15 अक्टूबर 2024 तक नियुक्त कर्मचारियों के लिए समान वेतन की प्रक्रिया 1 अप्रैल 2027 से शुरू होगी।
सरकार ने लंबे समय से कार्यरत उपनल कर्मचारियों के न्यूनतम वेतन और महंगाई भत्ते से जुड़े प्रावधानों पर भी सहमति दी है। अतिरिक्त उपनल कर्मचारियों के समायोजन के लिए नियुक्ति तिथि को वरीयता देने और जरूरत पड़ने पर अधिसंख्य पद सृजित करने की व्यवस्था भी प्रस्तावित की गई है।
सेवामुक्त होकर लौटने वाले अग्निवीरों को राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए एक समर्पित सेल बनाया जाएगा।
इस प्रकोष्ठ के संचालन के लिए छह संविदा पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है। इनमें एक उप निदेशक, दो सहायक निदेशक, दो कनिष्ठ सहायक और एक डाटा एंट्री ऑपरेटर का पद शामिल है।
ऊर्जा सुरक्षा और भरोसेमंद बेस-लोड बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कैबिनेट ने 1320 मेगावाट कोयला आधारित बिजली खरीद को मंजूरी दी है।
प्रस्ताव के तहत न्यूनतम बोलीदाता अडानी पावर लिमिटेड से ₹5.746 प्रति यूनिट के कुल टैरिफ पर 25 वर्षों के लिए 1320 मेगावाट बिजली खरीदी जाएगी। इसमें 1234 मेगावाट अनुबंधित क्षमता होगी।
उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड को अडानी पावर के साथ बिजली आपूर्ति समझौता और अन्य संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के साथ आवश्यक शर्तें पूरी करने तथा उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) से वैधानिक मंजूरियां लेने के लिए अधिकृत किया गया है।
कैबिनेट ने उत्तराखंड के शहीद सैनिकों के सम्मान में उनके पैतृक गांवों में मूर्तियां स्थापित करने का फैसला भी लिया है।
सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य शहीदों के बलिदान और वीरता को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना तथा उनके परिवारों के प्रति सम्मान व्यक्त करना है। इससे युवाओं को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरणा मिलने की भी उम्मीद है।
उत्तराखंड सरकार के इन फैसलों में एक तरफ सहकारिता, स्वास्थ्य और डिजिटल भूमि रिकॉर्ड जैसी व्यवस्थाओं को आधुनिक बनाने पर जोर दिया गया है, तो दूसरी तरफ उपनल कर्मचारियों के वेतन, शहरी आवास, पूर्व अग्निवीरों के लिए सहायता और शहीद सैनिकों के सम्मान से जुड़े मुद्दों को भी शामिल किया गया है।
बिजली खरीद का फैसला राज्य की दीर्घकालिक ऊर्जा जरूरतों से जुड़ा है, जबकि CNG और हाइब्रिड वाहनों को कर में राहत देने का उद्देश्य स्वच्छ परिवहन को प्रोत्साहित करना है।