प्रवक्ता भर्ती (सांकेतिक फोटो- सोर्स- सोशल मीडिया)
उत्तर प्रदेश

UP प्रवक्ता भर्ती 2026: शैक्षिक योग्यता को लेकर असमंजस दूर, आचार्य डिग्रीधारक भी कर सकेंगे आवेदन

UP Sanskrit Lecturer: यूपी प्रवक्ता संस्कृत भर्ती में आचार्य डिग्रीधारकों के लिए आवेदन का रास्ता साफ हो गया है। शासन ने संस्कृत विश्वविद्यालय की आचार्य उपाधि को स्नातकोत्तर के समकक्ष स्पष्ट किया है।

ओमप्रकाश सिंह परिहार, स्निग्धा श्रीवास्तव

UP Sanskrit Lecturer Recruitment 2026: सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ का संस्कृत विषय को लेकर प्रबल इच्छा के कारण संस्कृत विषय का महत्व बढ़ने लगा है। संस्कृत विषय में आचार्य (संस्कृत) की उपाधि प्राप्त अभ्यर्थियों के लिए प्रवक्ता (संस्कृत) पद पर आवेदन का रास्ता साफ हो गया है। प्रदेश सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया है कि काशी स्थित संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से प्राप्त आचार्य (संस्कृत) की उपाधि स्नातकोत्तर उपाधि के समकक्ष है।

इस स्पष्टीकरण के बाद ऐसे अभ्यर्थी उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के विज्ञापन संख्या 06/2026 के तहत प्रवक्ता (संस्कृत) पद के लिए आवेदन कर सकेंगे।

मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद स्पष्ट हुई स्थिति

मुख्यमंत्री के संज्ञान में आने के बाद शासन ने संबंधित आयोग को पत्र भेजकर स्थिति स्पष्ट की। पत्र में साफ तौर पर कहा गया कि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से जारी आचार्य (संस्कृत) विषय की उपाधि स्नातकोत्तर उपाधि के समकक्ष है। इसके आधार पर पात्र अभ्यर्थियों को प्रवक्ता (संस्कृत) पद की भर्ती प्रक्रिया में आवेदन का अवसर दिया जाएगा।

इस निर्णय से संस्कृत विषय के उन अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है, जो आचार्य की उपाधि होने के बावजूद विज्ञापन में निर्धारित शैक्षिक योग्यता को लेकर असमंजस में थे। अब उन्हें आवेदन करने में किसी तरह की शैक्षिक बाधा नहीं होगी।

शासन के स्पष्टीकरण से दूर हुआ असमंजस

माध्यमिक शिक्षा अनुभाग-5 की ओर से जारी स्पष्टीकरण के बाद आचार्य उपाधिधारी अभ्यर्थियों के सामने शैक्षिक अर्हता को लेकर बना असमंजस दूर हो गया है। यह स्थिति 15 सितंबर को जारी प्रवक्ता भर्ती के विज्ञापन के बाद उत्पन्न हुई थी। विज्ञापन में निर्धारित शैक्षिक योग्यता को लेकर अभ्यर्थियों के बीच सवाल खड़े हो गए थे।

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने विद्यार्थियों के हित से जुड़े इस विषय को शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष और माध्यमिक शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष उठाया था। उन्होंने पूरे मामले से मुख्यमंत्री कार्यालय को भी अवगत कराया।

आवेदन में नहीं होगी कोई परेशानी

कुलपति के मुताबिक विज्ञापन में बनी स्थिति किसी नीतिगत निर्णय का परिणाम नहीं थी, बल्कि भाषा अथवा शब्दावली से जुड़ी गलतियों के कारण असमंजस पैदा हुआ था। मुख्यमंत्री योगी के संज्ञान में आने के बाद इसका त्वरित समाधान किया गया। उन्होंने आचार्य उपाधिधारी अभ्यर्थियों से अपील की कि शासन की स्पष्टता के बाद वे किसी भ्रम में न रहें और निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रवक्ता (संस्कृत) पद के लिए आवेदन करें।

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