SP Leader Alambadi Azmi Passes Away: यूपी के आजमगढ़ के राजनीतिक परिदृश्य के लिए बुधवार की रात दुखद खबर लेकर आई। निजामाबाद विधानसभा क्षेत्र से पांच बार विधायक रहे वरिष्ठ समाजवादी नेता आलम बदी आजमी का लखनऊ के एक अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। वह कुछ समय से अस्वस्थ थे। उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे जिले में शोक की लहर दौड़ गई।
आलमबदी आजमी अपनी सादगी और ईमानदारी के लिए जनता के बीच मशहूर थे। उनके निधन की खबर से सियासी गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके निधन की खबर उनके सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए शेयर की गई। उनका जनाजा शाम 4 बजे जामिया-तुर-रशाद में होगी।
आलमबदी आजमी की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें 13-14 अप्रैल, 2026 को लखनऊ के मेदांता हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद मई, जून और जुलाई 2026 में उनका उसी हॉस्पिटल में लगातार इलाज चला। इलाज के दौरान ही उनकी मौत हो गई।
आलमबदी के निधन पर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी ने शोक व्यक्त किया। सपा ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर श्रद्धांजलि दी। इसमें लिखा, "समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और आजमगढ़ के निजामाबाद विधानसभा सीट से मशहूर विधायक जनाब आलम बदी साहब का निधन बहुत दुखद है! भगवान दिवंगत आत्मा को शांति दे। दुखी परिवार को यह बहुत बड़ा दुख सहने की ताकत मिले। दिल से संवेदनाएं!"
https://twitter.com/samajwadiparty/status/2080117424893128704
90 वर्ष की उम्र में आलमबादी आजमी के निधन पर आजमगढ़ और समाजवादी पार्टी में शोक की लहर दौड़ गई। आलमबदी आजमी का जन्म वर्ष 1936 में हुआ था। वे मूल रूप से बिंदवल, जयराजपुर (बिलरियागंज), आजमगढ़ के रहने वाले थे। मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और फिर गोरखपुर में नौकरी की। उस समय महात्मा गांधी, सुभाषचंद्र बोस और जवाहरलाल नेहरू के विचारों से प्रेरित होकर उन्होंने राजनीति में कदम रखा।
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आलमबदी आजमी ने समाजवादी पार्टी से जुड़कर राजनीति में कदम रखा। साल 1996 में पहली बार वे समाजवादी पार्टी के टिकट पर निजामाबाद विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। जनता के बीच उनकी पहुंच के चलते आलमबदी आजमी लगातार 5 बार इस क्षेत्र के विधायक बने रहे। उन्होंने जनता के बीच अपनी अलग पहचान बनाई।
जब 2012 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनी तो आलमबदी आजमी को मंत्री पद का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए मना कर दिया कि वह अपने निर्वाचन क्षेत्र में लोगों के बीच रहकर उनकी सेवा करना चाहते हैं। इसी सोच ने उन्हें आम राजनेताओं से अलग कर दिया।