Mohammad Muzaffar Prayagraj: कौड़िहार ब्लॉक प्रमुख और गौतस्करी के मामलों में आरोपी सपा नेता मोहम्मद मुजफ्फर की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। जेल से रिहाई के करीब 24 घंटे बाद ही मुजफ्फर समेत तीन लोगों के खिलाफ नवाबगंज थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। मुकदमे में मुजफ्फर के भाई मोहम्मद असलम और भतीजे मोहम्मद फैज को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने तहरीर के आधार पर केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, फतूहपुर उपहार निवासी कुंदन कुमार सिंह की ओर से शिकायत दी गई थी। आरोप है कि असलम और फैज ने रास्ते में उनकी गाड़ी रोककर उन्हें अदालत में शपथ पत्र देने के लिए दबाव बनाया। शिकायतकर्ता के मुताबिक, उनसे कहा गया कि मुजफ्फर से जुड़े एक मामले में हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान ऐसा बयान दें, जिससे मुजफ्फर को राहत मिल सके।
कुंदन कुमार सिंह ने आरोप लगाया कि शपथ पत्र देने से इनकार करने पर उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। उनका दावा है कि यह दबाव जेल में बंद मुजफ्फर के कहने पर बनाया गया। शिकायत के आधार पर नवाबगंज पुलिस ने मुजफ्फर, असलम और फैज के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।
मोहम्मद मुजफ्फर प्रयागराज के कौड़िहार ब्लॉक से सपा के ब्लॉक प्रमुख रहे हैं। पुलिस और न्यायिक रिकॉर्ड से जुड़े समाचारों में उनका नाम गौवध निवारण अधिनियम, गैंगस्टर एक्ट समेत कई आपराधिक मामलों में सामने आता रहा है। 2025 में इलाहाबाद हाईकोर्ट से एक पुराने गोवध निवारण अधिनियम के मामले में उन्हें जमानत भी मिली थी। उस सुनवाई में सरकारी पक्ष ने उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों का उल्लेख किया था।
मुजफ्फर और उसके करीबियों के खिलाफ पहले भी नवाबगंज थाने में रंगदारी और धमकी से जुड़े मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। अगस्त 2025 में फतूहपुर निवासी कुंदन कुमार सिंह की शिकायत पर मुजफ्फर समेत सात लोगों के खिलाफ 10 लाख रुपये की रंगदारी मांगने और धमकी देने के आरोप में मुकदमा दर्ज होने की रिपोर्ट सामने आई थी।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि आरोपितों ने जमीन और मकान को लेकर उस पर दबाव बनाया तथा धमकी दी। पुलिस ने उस मामले में भी जांच शुरू की थी।
नवाबगंज पुलिस का कहना है कि शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है। विवेचना में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर, एफआईआर में लगाए गए आरोप अभी आरोप मात्र हैं। इनकी पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
मुजफ्फर के जेल से बाहर आने के तत्काल बाद नया मुकदमा दर्ज होने से मामले ने राजनीतिक और आपराधिक दोनों स्तरों पर चर्चा बढ़ा दी है। अब पुलिस की जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों के पीछे वास्तविक घटनाक्रम क्या था और इसमें नामजद आरोपियों की भूमिका कितनी है।