

Agra DAP Fertilizer Shortage: किसानों को डीएपी खाद के लिए दिनभर समितियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, वहीं अछनेरा क्षेत्र में रात के अंधेरे में खाद की लोडिंग और कथित कालाबाजारी का मामला सामने आने के बाद सहकारिता और कृषि विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। कुकथला स्थित सहकारी समिति पर किसानों और किसान नेताओं ने देर रात खाद से लदी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां पकड़कर पुलिस के हवाले कीं। मामले में समिति सचिव के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो चुका है और जांच की जिम्मेदारी ईओ अमित कुमार बालियान को सौंपी गई है।
स्थानीय स्तर पर सामने आए घटनाक्रम के मुताबिक, किसानों को जब रात में समिति से खाद की ट्रैक्टर-ट्रॉलियां निकलने की जानकारी मिली तो उन्होंने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी कर दी। किसानों का आरोप है कि रात करीब 9 बजे से लेकर 12 बजे के बीच डीएपी की लोडिंग की जा रही थी। मौके से दो ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को किसानों ने पकड़कर पुलिस के सुपुर्द किया, जबकि कुछ वाहन मौके से निकल गए। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार कुकथला समिति में दो ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में 112 कट्टे डीएपी लोड किए जाने का मामला भी सामने आया था।
मामला सामने आने के बाद अधिकारियों ने स्टॉक की जांच शुरू की। किसानों के मुताबिक पांच अक्टूबर 2026 की जांच रिपोर्ट में स्टॉक में 129 कट्टे यूरिया और 17 कट्टे डीएपी का अंतर सामने आया। किसानों का कहना है कि यदि स्टॉक रजिस्टर, वितरण रजिस्टर, पीओएस मशीन और मौके पर मौजूद खाद का मिलान किया जाए तो कथित अनियमितताओं की पूरी तस्वीर सामने आ सकती है।
इस मामले में प्रशासनिक कार्रवाई भी शुरू हो चुकी है। डीएम मनीष बंसल के निर्देश के बाद कुकथला सहकारी समिति के सचिव वीरेंद्र विक्रम कैडर को निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई है। विभागीय जांच में निर्धारित समय के बाद उर्वरक की लोडिंग, विभागीय निर्देशों की अनदेखी और लापरवाही पाए जाने की बात भी सामने आई थी।
किसान-मजदूर नेता दिलीप सिंह ने आरोप लगाया कि पुलिस द्वारा कब्जे में लिए गए खाद लदे ट्रैक्टरों को बाद में सचिव के सुपुर्द कर दिया गया। उनका सवाल है कि यदि ट्रैक्टरों में सरकारी खाद लदी थी तो जांच पूरी होने से पहले उसे किसके आदेश पर छोड़ा गया और खाद अब कहां है। किसानों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
किसान नेता श्याम सिंह चाहर ने मांग की कि राजस्थान सीमा से जुड़ी समितियों के सचिवों के मोबाइल नंबर, पीओएस मशीनों, स्टॉक और वितरण रजिस्टर की जांच कराई जाए। उनका दावा है कि इन सभी रिकॉर्ड का मिलान करने पर खाद वितरण में कथित गड़बड़ियों की कई परतें खुल सकती हैं।
ताज सिटी आलू उत्पादक प्रदेश महासचिव लक्ष्मी नारायण बघेल ने आरोप लगाया कि राजस्थान सीमा से लगी समितियों में रात के समय खाद की अदला-बदली और कथित रूप से नकली डीएपी की आपूर्ति की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। उन्होंने पूरे नेटवर्क की जांच कराने की मांग की।
किसान नेता मुकेश पाठक, सोमवीर यादव, नरेंद्र सिंह, मोनू पाठक, चेतन कुमार, राममोहन और देवी चाहर ने कहा कि किसान पहले ही डीएपी की उपलब्धता को लेकर परेशान हैं। ऐसे समय में यदि सरकारी खाद के वितरण में अनियमितता या कालाबाजारी होती है तो इसका सीधा नुकसान किसानों को होता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसानों को समय पर निर्धारित दर पर डीएपी उपलब्ध नहीं कराई गई और मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो किसान आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
इससे पहले भी अछनेरा क्षेत्र में डीएपी वितरण को लेकर किसानों की शिकायतें सामने आती रही हैं। हालिया मामले में किसानों ने मंडलायुक्त कार्यालय पहुंचकर डीएपी वितरण में गड़बड़ी और खाद माफिया को खाद दिए जाने के आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की थी।
अब सचिव के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने और जांच ईओ अमित कुमार बालियान को सौंपे जाने के बाद किसानों की नजर जांच के परिणाम पर है। जांच में स्टॉक, बिक्री रजिस्टर, पीओएस मशीन, परिवहन रिकॉर्ड और संबंधित ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की भूमिका की पड़ताल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि स्टॉक में सामने आए अंतर और रात में खाद की लोडिंग के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो मामले में आगे और कार्रवाई हो सकती है।