Prayagraj Sangam Magh Mela dates 2027: संगम नगरी में मां गंगा- यमुना और सरस्वती के तट पर 45 दिन तक लगने वाला माघ मेला जहां मोक्ष की कामना से लोग एक माह का कल्पवास करते हैं । आस्था, साधना और सनातन संस्कृति के संगम के रूप में पहचान रखने वाला माघ मेला वर्ष 2027 में विशेष ज्योतिषीय संयोगों के बीच आयोजित होगा। ज्योतिषियों के मुताबिक ऐसा दुर्लभ संयोग बर्षों इंतजार के बाद प्राप्त होता है।
15 जनवरी 2027 को मकर संक्रांति के स्नान पर्व के साथ माघ मेले का शुभारंभ होगा। इस दौरान संगम तट पर संत-महात्माओं और गृहस्थ श्रद्धालुओं का कल्पवास शुरू होगा। कल्पवास में कल्पवासी एक माह गृहस्थ जीवन से दूरी बनाकर भजन कीर्तन करते हैं। एक माह तक संगम तट पर जप, तप, पूजा-पाठ,ध्यान एवं धार्मिक अनुष्ठानों में लीन रहेंगे।
15 जनवरी 2027 को मकर संक्रांति के स्नान पर्व से सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होंगे। इसी के साथ शुभ कार्यों की शुरुआत मानी जाएगी। मकर राशि में सूर्य, बुध और राहु के संचरण से बुधादित्य योग का संयोग बन रहा है। वहीं सिंह राशि में मंगल और गुरु के संचरण से अमृत योग बनने की बात कही गई है। इन योगों के बीच माघ मेले का धार्मिक महत्व और बढ़ने की उम्मीद है।
मकर संक्रांति के साथ संगम क्षेत्र में कल्पवासियों का प्रवास शुरू होगा। संतों के साथ बड़ी संख्या में गृहस्थ श्रद्धालु भी एक माह तक संगम की रेती पर रहकर धार्मिक साधना करेंगे। कल्पवासी जप-तप, स्नान, ध्यान, भजन-पूजन और धार्मिक अनुष्ठानों में समय बिताएंगे। माघ मेले को मोक्ष की कामना और मनोवांछित फल की प्राप्ति से जुड़ी धार्मिक परंपराओं का प्रमुख अवसर माना जाता है।
माघ मेले में प्रमुख स्नान का सभी को इंतजार रहता है। इस बार छह प्रमुख स्नान पर्व होंगे। 15 जनवरी को मकर संक्रांति, 22 जनवरी को पौष पूर्णिमा, 6 फरवरी को मौनी अमावस्या, 11 फरवरी को वसंत पंचमी, 20 फरवरी को माघी पूर्णिमा और 6 मार्च को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा। मौनी अमावस्या और माघी पूर्णिमा समेत प्रमुख पर्वों पर संगम में स्नान के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की धार्मिक परंपरा है।