इलाहाबाद हाईकोर्ट (सोर्स: सोशल मीडिया)
प्रयागराज

प्रयागराज: सुनवाई का मौका दिए बिना बर्खास्तगी नहीं, सहकारी समिति के कर्मचारी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत

Allahabad High Court: न्यायमूर्ति दिनेश पाठक की पीठ ने सहकारी समिति में कार्यरत कर्मचारी की बर्खास्तगी के दो आदेशों को रद्द कर नियमानुसार बकाया वेतन और अन्य परिणामी सेवा लाभ देने का निर्देश दिया।

नमिता प्रजापति

Highlights

  • अलग-अलग आदेश जारी कर समाप्त कर दी गईं थीं उनकी सेवाएं

  • बर्खास्तगी से पहले नहीं मिला अपना पक्ष रखने का अवसर

  • दोनों आदेशों को चुनौती देते हुए कर्मचारी ने दाखिल की थी याचिका

Allahabad High Court Significant Judgment: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि कर्मचारी के खिलाफ निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना और उसे अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिए बिना की गई बर्खास्तगी कानून की कसौटी पर खरी नहीं उतरती। न्यायमूर्ति दिनेश पाठक की पीठ ने सहारनपुर की एक सहकारी समिति में कार्यरत कर्मचारी रोहित सिंह की बर्खास्तगी के दो आदेशों को रद्द कर दिया। कोर्ट ने उन्हें सेवा में बहाल करने के साथ सेवा की निरंतरता, नियमानुसार बकाया वेतन और अन्य परिणामी सेवा लाभ देने का निर्देश दिया है।

मामला रोहित सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य (रिट-ए संख्या 10654/2026) से जुड़ा है। याचिकाकर्ता रोहित सिंह सहारनपुर जिले की एक सहकारी समिति में ‘आंकित’ पद पर कार्यरत थे। संबंधित अधिकारियों ने 23 मई 2026 और 13 जून 2026 को अलग-अलग आदेश जारी कर उनकी सेवाएं समाप्त कर दी थीं। कर्मचारी ने दोनों आदेशों को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

विभागीय जांच और आरोप-पत्र के बिना की गई कार्रवाई

याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि उन्हें न तो कोई आरोप-पत्र दिया गया और न ही विभागीय जांच की गई। बर्खास्तगी से पहले अपना पक्ष रखने का अवसर भी नहीं मिला। इस आधार पर उन्होंने दोनों आदेशों को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत बताते हुए निरस्त करने की मांग की।

सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक ही कर्मचारी की सेवाएं एक ही पद पर रहते हुए दो अलग-अलग तारीखों में समाप्त किए जाने पर सवाल उठाया था। 20 अगस्त 2026 के अपने पूर्व आदेश में कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया था कि कर्मचारी के खिलाफ कोई औपचारिक जांच शुरू की गई थी या उसे अपना बचाव प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया था।

अधिकारियों ने स्वीकार की जांच नहीं होने की बात

मामले की अगली सुनवाई में प्रतिवादी अधिकारियों की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि कर्मचारी के खिलाफ कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी। उसे आरोप-पत्र भी नहीं दिया गया था और बर्खास्तगी से पहले व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर भी नहीं मिला था।

दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध अभिलेखों पर विचार करने के बाद अदालत ने बर्खास्तगी के दोनों आदेशों को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने माना कि मामले में निर्धारित प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं किया गया।

सेवा में बहाली और बकाया वेतन देने का निर्देश

हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए 23 मई और 13 जून 2026 को जारी दोनों बर्खास्तगी आदेशों को रद्द कर दिया। साथ ही, रोहित सिंह को सेवा में वापस लेने और सेवा की निरंतरता का लाभ देने का निर्देश दिया। अदालत ने नियमानुसार देय बकाया वेतन और अन्य परिणामी सेवा लाभ भी प्रदान करने को कहा।

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