जज रवि कुमार दिवाकर सोशल मीडिया
उत्तर प्रदेश

फास्ट ट्रैक कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, 130 दिनों में 8 जघन्य मामलों के 18 दोषियों को मौत की सजा

Death Penalty Verdicts UP: मुजफ्फरनगर फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 के जज रवि कुमार दिवाकर ने 130 दिनों में 8 जघन्य मामलों के 18 दोषियों को फांसी की सजा सुनाकर न्याय का एक नया इतिहास रच दिया है।

अनन्या तिवारी

Muzaffarnagar Fast Track Court Historic Judgments: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में न्याय व्यवस्था की एक ऐसी मिसाल पेश की गई है, जो आने वाले समय में नजीर बनेगी। मुजफ्फरनगर की फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने महज चार महीनों के भीतर (6 अप्रैल से 12 अगस्त 2026 तक) न्यायिक जगत में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। उन्होंने आठ अलग-अलग जघन्य अपराधों के मामलों में कुल 18 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत के इन फैसलों ने न केवल पीड़ितों के परिवारों में न्याय की उम्मीद जगाई है, बल्कि अपराधियों के बीच कानून का खौफ भी पैदा कर दिया है।

'विरल से विरलतम' मानकर सुनाया मृत्युदंड

न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने इन सभी आठ मामलों की गंभीरता और अपराध की प्रकृति को देखते हुए इन्हें Rarest of Rare श्रेणी में रखा। अदालत का मानना था कि इन अपराधियों ने समाज में जिस तरह का खौफ पैदा किया और मासूमों की जान ली, उसके लिए मृत्युदंड ही एकमात्र उचित सजा है।

वकील समीर सैफी और शेखर हत्याकांड

अदालत ने 6 अप्रैल 2026 को एडवोकेट समीर सैफी हत्याकांड में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए तीन दोषियों -सिंगोल अल्वी, सोनू उर्फ रिजवान और शालू उर्फ अरबाज को फांसी की सजा दी। यह हत्या 2019 में 40 लाख रुपये के लेनदेन के विवाद में की गई थी। इसी तरह, सिसौली के शेखर की हत्या महज 70 हजार रुपये के विवाद में कर दी गई थी। इस मामले में न्यायाधीश ने दोषी मुकेश और उसके तीन बेटों - प्रदीप, संदीप और सोनू को मृत्युदंड सुनाकर यह स्पष्ट किया कि जीवन की कीमत चंद रुपयों से कहीं अधिक है।

6 साल के मासूम और ड्यूटी पर तैनात होमगार्ड को मिला इंसाफ

अदालत ने उन मामलों में भी कड़ा रुख अपनाया जो दशकों से लंबित थे। 2011 में राजेश देवी और उनके 6 वर्षीय बेटे हिमांशु की हत्या के दोषी रईस को फांसी की सजा सुनाई गई। इसके साथ ही, वर्ष 2020 में गश्त के दौरान चाकू मारकर हत्या किए गए होमगार्ड रतिराम के मामले में दोषी दीपक को भी मृत्युदंड दिया गया। अदालत ने ककरौली के राजेंद्र सैनी हत्याकांड में शव को जलाने के जघन्य अपराध के लिए रामकरण और गीलू को भी फांसी के फंदे तक पहुंचाने का आदेश दिया।

चुनावी रंजिश और लूट के बाद हत्या के दोषियों पर प्रहार

प्रधानी की रंजिश में 2010 में हुई राजबीर सिंह की हत्या के मामले में पूर्व प्रधान प्रमोद और प्रत्याशी सहदेव को फांसी दी गई। वहीं, शामली के किसान राज सिंह की लूट के बाद निर्मम हत्या करने वाले चार अभियुक्तों अजीत, सूरज, अनिल और सुनील को भी मृत्युदंड की सजा सुनाई गई।

26 साल पुराने सालिम हत्याकांड का अंत

सबसे चर्चित मामला 1999-2000 का था, जिसमें किसान सालिम की बदमाशों ने अपहरण और फिरौती के बाद हत्या कर दी थी। सालिम अपने बेटे हारुण को बचाने के लिए खुद बदमाशों के पास चले गए थे, लेकिन बदमाशों ने उनकी जान ले ली। 12 अगस्त 2026 को जज दिवाकर ने इस पुराने घाव पर न्याय का मरहम लगाते हुए दोषियों को सजा सुनाई।

अपराधियों के लिए कड़ा संदेश

मुजफ्फरनगर फास्ट ट्रैक कोर्ट के ये फैसले बताते हैं कि कानून की लाठी लंबी होती है और न्याय मिलने में भले ही समय लगे, लेकिन अपराधियों का अंत निश्चित है। न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर के इन कड़े फैसलों ने उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था और न्यायपालिका के प्रति आम जनता के विश्वास को और अधिक सुदृढ़ किया है।

मानसून सत्र में 12 बिल पास, सिर्फ 19% काम, किरेन रिजिजू ने जताया दुख, कांग्रेस के नए सांसदों पर कही बड़ी बात

आज की ताजा खबर 13 अगस्त LIVE: संसद का मॉनसून सत्र खत्म, दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित

संगीत और कला के दिग्गजों का सम्मान, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 115 कलाकारों को दिए अकादमी पुरस्कार

Explainer: कैश कांड में जस्टिस यशवंत वर्मा दोषी करार, अब कैसे तय होगी सजा, किसके पास है अधिकार?

तिहाड़ से मुंबई नहीं लाया जा सकता अनमोल बिश्नोई! बाबा सिद्दीकी हत्याकांड में पुलिस ने कोर्ट को बताई अड़चन