Meerut Medical College OPD: पिछले कुछ दिनों से पड़ रही बारिश के चलते मौसम में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। बारिश और उमस भरे मौसम के बीच तापमान में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव क्या बुजुर्ग क्या बच्चे क्या महिलाएं और क्या युवा सभी की सेहत पर दुष्प्रभाव डाल रहा है।
जिला अस्पताल और लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में मरीजों की भीड़ बढ़ गई है। खासकर वायरल बुखार, नाक-कान गला रोग और सर्दी-जुकाम के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। शनिवार को प्यारेलाल जिला अस्पताल और लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज दोनों अस्पतालों की ओपीडी में चार हजार से अधिक मरीज पहुंचे।
बता दें कि लगातार बदलते मौसम को देखते हुए चिकित्सकों का कहना है कि मौसम में बदलाव और पर्यावरणीय कारकों ने इन बीमारियों को बढ़ावा दिया है। पिछले कुछ दिनों से मेरठ में बारिश के साथ-साथ उमस और गर्मी का मिश्रित प्रभाव देखने को मिल रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार आने वाले दिनों में बारिश और बादल छाए रहने की संभावना है।
इससे तापमान 32-34 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा लेकिन नमी का स्तर 55-70 प्रतिशत तक होने से उमस बढ़ रही है। यह मौसम मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल है। इससे डेंगू और मलेरिया जैसे रोगों का खतरा बढ़ गया है। इसके अलावा जलभराव और गंदगी ने बैक्टीरिया और वायरस को पनपने का मौका दिया है। इससे वायरल बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ी है।
लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के डा नवरत्न गुप्त ने बताया कि, उनकी ओपीडी में प्रतिदिन 500 मरीज आ रहे हैं। इनमें से करीब 100 मरीज वायरल बुखार से पीड़ित हैं। वहीं, फिजिशियन डॉ. सौरभ सिंघल का कहना है कि मच्छर जनित बीमारियों के अलावा, सर्दी-जुकाम, गले में खराश, और एलर्जी की समस्याएं भी बढ़ रही हैं।
मौसम में बार-बार बदलाव के कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो रही है। इससे बच्चों और बुजुर्गों को अधिक परेशानी हो रही है। वहीं, सीएमओ डा अशोक कटारिया ने बताया कि बारिश के मौसम में जलभराव और दूषित पानी वायरल और बैक्टीरियल इंफेक्शन का प्रमुख कारण बन रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि मच्छरदानी का उपयोग, साफ-सफाई और शुद्ध पेयजल का सेवन इस मौसम में जरूरी है।
सीएमओ ने लोगों से अपील की है कि वे अपने घरों और आसपास जलभराव न होने दें। मच्छर भगाने के उपाय अपनाएं और बिना चिकित्सक की सलाह के दवाएं न लें। मौसम का यह मिजाज अगस्त के अंत तक बना रह सकता है। सतर्कता ही बचाव है। वहीं, मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि जिस तरह से बारिश और उमस का मौसम बना हुआ है।
उसमें मौसम आधारित बीमारियों की संख्या में इजाफा देखने को मिल रहा है। ऐसे में ही अब वर्तमान समय में वायरल काफी चल रहा है। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या की अगर बात प्रतिदिन 500 से ऊपर की ओपीडी रहती है।
इसमें अब डेढ़ सौ से अधिक ऐसे मरीज अपना ट्रीटमेंट करने के लिए पहुंच रहे हैं जो की वायरल बुखार से प्रभावित है। उन्होंने बताया कि वैसे तो आमतौर पर इस बुखार से मरीज 4 से 5 दिन में ठीक हो जाते हैं। लेकिन काफी ऐसे मरीज है जिन्हें ठीक होने में एक सप्ताह का समय लग जाता है। क्योंकि इस बुखार के माध्यम से मांसपेशियों में दर्द के साथ-साथ कमजोरी थकान भी लोगों को काफी महसूस होती है।