श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर दीपावली उत्सव का शुभारंभ
भाजपा हिमाचल प्रदेश प्रभारी एवं मथुरा विधायक ने किया दीपदान
देशभर से आए हजारों भक्त बने दिव्य दीपोत्सव के साक्षी
Lord Keshavdev Temple: एक ओर अयोध्या में प्रभु श्रीराम के स्वागत में दीपों की कतारें सज रही हैं तो दूसरी ओर भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा भी हजारों दीपों की रोशनी से आलोकित हो उठी है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की नगरी अयोध्या और लीलाधर श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा में दीपावली का उत्साह मानो भक्ति के दो पवित्र स्वरूपों को एक सूत्र में पिरो रहा है।
इसी आध्यात्मिक अनुभूति के बीच श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर भव्य दीपोत्सव का आयोजन किया गया। हजारों दीपकों की जगमगाहट से भगवान केशवदेव मंदिर का कोना-कोना रोशन हो उठा। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो दीपों की लौ के माध्यम से श्रद्धालु अपने आराध्य के चरणों में श्रद्धा, प्रेम और समर्पण अर्पित कर रहे हों।
इस पावन आयोजन में भाजपा हिमाचल प्रदेश प्रभारी एवं मथुरा विधायक श्रीकांत शर्मा भी शामिल हुए। उन्होंने श्रीकृष्ण जन्मभूमि के पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं के साथ भगवान केशवदेव मंदिर में दीप प्रज्ज्वलित कर दीपदान किया।
दीप जलाते समय श्रद्धालुओं के चेहरों पर आस्था और आनंद की झलक दिखाई दी। देश के अलग-अलग राज्यों से भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन करने पहुंचे हजारों भक्तों ने भी दीपदान में भाग लेकर सुख, शांति, समृद्धि और विश्व कल्याण की मंगलकामना की।
मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर में जलते हजारों दीप केवल प्रकाश की किरणें नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और भगवान के प्रति समर्पण के प्रतीक बन गए। दीपों की सुनहरी रोशनी के बीच जब मंदिर परिसर भगवान के जयकारों से गूंजा तो वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो उठा।
श्रद्धालु इस अलौकिक दृश्य को अपने मन में संजोते नजर आए। किसी ने अपने परिवार की खुशहाली के लिए दीप जलाया तो किसी ने समाज में सुख-शांति और मानवता के कल्याण की प्रार्थना की।
भारतीय संस्कृति में दीपावली केवल दीप जलाने और खुशियां मनाने का पर्व नहीं है, बल्कि यह जीवन में व्याप्त अंधकार को मिटाकर ज्ञान, सद्भाव और सकारात्मकता का प्रकाश फैलाने का संदेश भी देती है।
मान्यता है कि त्रेतायुग में भगवान श्रीराम चौदह वर्ष का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटे थे, तब अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। वहीं भगवान श्रीकृष्ण की लीलाभूमि ब्रज में दीपावली का पर्व कान्हा के प्रति प्रेम, भक्ति और समर्पण की विशेष अनुभूति लेकर आता है।
अयोध्या में श्रीराम के स्वागत में जलते दीप और मथुरा में श्रीकृष्ण की जन्मभूमि पर जगमगाते हजारों दीप मानो भारतीय सनातन संस्कृति की एकात्मता का संदेश दे रहे हैं। दोनों पवित्र नगरों में उमड़ता श्रद्धा का सैलाब यह दर्शाता है कि भगवान के प्रति आस्था समय और परिस्थितियों से परे है।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान का यह दीपोत्सव श्रद्धालुओं के लिए केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मिक आनंद और आध्यात्मिक अनुभूति का अविस्मरणीय अवसर बन गया। दीपों की रोशनी ने पूरे ब्रज को भक्ति के रंग में रंग दिया। ऐसा लगा मानो कान्हा की नगरी में हर दीप अपने आराध्य के स्वागत में मुस्कुरा रहा हो और हर लौ प्रेम, शांति तथा सद्भाव का संदेश दे रही हो।