प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं और दरोगा के बीच विवाद
कथित मारपीट का वीडियो वायरल
मामले में चार अधिवक्ता नामजद
Lawyers Protest Against Police: झांसी में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर अधिवक्ताओं का आक्रोश सड़कों पर दिखाई दिया। पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर बड़ी संख्या में वकीलों ने प्रदर्शन किया और प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन के दौरान एक दरोगा के साथ कथित मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला और गरमा गया है।
अधिवक्ता संघ के बैनर तले वकीलों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन सौंपते हुए नवाबाद, कोतवाली और सीपरी बाजार थाना क्षेत्रों की पुलिस कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और संबंधित थाना प्रभारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
अधिवक्ताओं का आरोप है कि शहर के बस स्टैंड इलाके में स्थित कुछ होटलों में कथित तौर पर अनैतिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं, लेकिन पुलिस की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष प्रमोद शिवहरे ने नवाबाद थाना क्षेत्र की पुलिस और मंडी चौकी की कार्यप्रणाली को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए।
हालांकि, अधिवक्ताओं द्वारा लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और पुलिस प्रशासन की ओर से इस मामले में विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है।
विरोध प्रदर्शन के दौरान उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब अधिवक्ताओं और वहां मौजूद एक दरोगा के बीच कहासुनी हो गई। आरोप है कि विवाद बढ़ने के बाद कुछ वकीलों ने दरोगा के साथ मारपीट की। घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें पुलिसकर्मी और अधिवक्ताओं के बीच धक्का-मुक्की और विवाद की स्थिति दिखाई दे रही है।
पुलिस के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर शुरू हुआ प्रदर्शन अब दरोगा के साथ हुई मारपीट के कारण नए विवाद में बदल गया है। दूसरी ओर, अधिवक्ता संगठनों ने झांसी पुलिस प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि अधिवक्ताओं के सम्मान से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
वहीं इस पूरे मामले में एसपी सिटी प्रीति सिंह जानकारी देते हुए बताती हैं कि कलेक्ट्रेट में वकीलों द्वारा प्रदर्शन और नारेबाजी की जा रही थी। इसकी सूचना पुलिस को मिली इस पर जेल चौकी इंचार्ज अपने हमराही के साथ मौके पर पहुंचे तो वहां अधिवक्ताओं द्वारा नारेबाजी की जा रही रहे थी। तभी एक सिपाही इस घटना को अपने मोबाइल में रिकॉर्ड करने लगा तो वकीलों के समूह में से कुछ वकीलों द्वारा आक्रोशित होकर जेल चौकी इंचार्ज और उनके हमराह के साथ मारपीट और धक्का-मुक्की की गई।
साथ ही अभद्रता और गाली गलौज भी की गई, और जिस फोन से वीडियो रिकॉर्ड किया जा रहा था उसको लूटने की घटना कारित की गई। इस प्रकरण में सुसंगत धाराओं में अभियुक्त पंजीकृत किया गया है जिसमें कुल चार नामजद अधिवक्ता अविनाश, आजाद, दीपू तथा देवेंद्र हैं इस मामले में अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है।