सिंहस्थ महाकुंभ का भव्य आगाज, नासिक में राष्ट्रपति और त्रयंबकेश्वर में सीएम ने किया धर्म ध्वजारोहण

Nashik Trimbakeshwar Simhastha kumbh 2026 Inaugration: नासिक और त्र्यंबकेश्वर में सिंहस्थ महाकुंभ 2026 का हुआ आगाज, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और सीएम फडणवीस ने किया पावन धर्म ध्वजारोहण।
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू(सोर्स: सोशलइ मीडिया)
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Highlights

  • नासिक के रामकुंड में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने धर्म ध्वजारोहण किया।

  • त्र्यंबकेश्वर के कुशावर्त तीर्थ पर मुख्यमंत्री फडणवीस द्वारा ध्वजारोहण संपन्न हुआ।

  • सिंह राशि में बृहस्पति प्रवेश के साथ सिंहस्थ महाकुंभ का आगाज हुआ।

President Droupadi Murmu Nashik Simhastha Kumbh: जैसे ही बृहस्पति ने सिंह राशि में प्रवेश किया, वैसे ही नासिक- त्रयंबकेश्वर के सिंहस्थ की वह पावन मंगल बेला आ गई, जब गोदावरी के पवित्र तटों पर सनातन धर्म का परम ध्वज लहराया। नासिक के पावन रामकुंड और त्र्यंबकेश्वर के दिव्य कुशावर्त तीर्थ पर दोपहर ठीक 12:02 बजे वैदिक मंत्रोच्चार के बीच ऐतिहासिक 'धर्म ध्वजारोहण' संपन्न हुआ।

इस अलौकिक अनुष्ठान के साथ ही 'नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ महाकुंभ मेला' का भव्य शंखनाद हो चुका है। देश के शीर्ष नेतृत्व, पूज्य शंकराचार्य और 13 अखाड़ों के महंतों एवं पदाधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति ने इस उत्सव को एक युगांतकारी आध्यात्मिक स्वरूप दे दिया है।

रामकुंड में महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

महाकुंभ के आगाज के लिए नासिक के गंगा गोदावरी मंदिर के पास स्थित रामकुंड में धर्म ध्वजारोहण महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कर-कमलों से हुआ। उनके साथ जगद्गुरुरामानंदाचार्य, नरेंद्राचार्य,य जगद्गुरु माधवाचार्य,य हनुमानगढ़ी अयोध्या के महंत एवं अखाड़ा परिषद के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत ज्ञान दास के साथ महंत संजयदास, वैष्णव अखाड़ेा के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत वैष्णो दास, महंत मोहनदास अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद रजिस्टर्ड के राष्ट्रीय प्रवक्ता महंत संजयदास तीनोंवैष्णव अनी अखाड़ों के राष्ट्रीय प्रवक्ता महंत भक्ति दास के साथ वैष्णवो संप्रदाय केसैकड़ों साधु-संत और लाखों की संख्या में आम श्रद्धालु मौजूद रहे।

कुशावर्त कुंड त्र्यंबकेश्वर में सीएम फडणवीस

त्र्यंबकेश्वर में धर्म ध्वजारोहण महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों हुआ। इस दौरान उनके साथ जगद्गुरु श्रृंगेरी पीठ के शंकराचार्य विधुशेखर भारती, अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत नरेंद्र पुरी (निरंजनी), अखाड़ा परिषद (रजिस्टर्ड) के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत नरेंद्र पुरी (महानिर्वाणी), जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक एवं अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री महंत हरि गिरि, बड़ा उदासीन अखाड़ा के भ्रमणशील मंडल के महंत दुर्गादास, आवाहन अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री और अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय सचिव महंत सत्य गिरि, आनंद अखाड़े के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत शंकरानंद सरस्वती के साथ स्थानीय आश्रमों के महंत, महंत और साधु समाज के सैकड़ों लोग मौजूद थे।

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आध्यात्मिक महत्व और पौराणिक चेतना

हिंदू धर्म शास्त्रों और पौराणिक आख्यानों के अनुसार, जब देवों और दानवों के मध्य समुद्र मंथन हुआ था, तब निकले अमृत कलश की कुछ बूंदें पृथ्वी पर चार दिव्य स्थानों पर गिरी थीं। उन्हीं में से एक पावन क्षेत्र है गोदावरी का तट नासिक और त्र्यंबकेश्वर। जब बृहस्पति (गुरु) सिंह राशि में प्रवेश करते हैं, तब यहाँ 'सिंहस्थ महाकुंभ' का योग बनता है।

माना जाता है कि इस दुर्लभ कालखंड में गोदा-माई का जल साक्षात अमृत में परिवर्तित हो जाता है, जिसमें डुबकी लगाने मात्र से आत्मा जन्म-मरण के बंधनों से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त करती है।

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सनातन अस्मिता का प्रतीक धर्म ध्वज

नासिक सिंहस्थ कुंभ का ध्वजारोहण केवल एक पारंपरिक क्रिया नहीं, बल्कि यह वैराग्य, त्याग और सनातन अस्मिता का जीवंत प्रतीक है। इस वर्ष पंचधातु से निर्मित विशाल स्तंभों पर फहराई गई यह धर्म ध्वजा कई आध्यात्मिक रहस्यों को समेटे हुए है।

  • केसरिया रंग: यह अग्नि, वैराग्य और निस्वार्थ सेवा का बोधक है।

  • सूर्य-चंद्र की आकृतियां: यह इस बात का प्रतीक हैं कि जब तक ब्रह्मांड में सूर्य और चंद्रमा का अस्तित्व रहेगा, तब तक सनातन धर्म और वैदिक संस्कृति अक्षुण्ण रहेगी।

  • समुद्र मंथन के 14 रत्न: ध्वज स्तंभों पर उकेरे गए ऐरावत हाथी, कामधेनु, कौस्तुभ मणि और अमृत कलश साक्षात देवत्व की अनुभूति कराते हैं।

  • सिंह की आकृति: यह धर्म की रक्षा हेतु शौर्य, पराक्रम और निर्भयता का संदेश देती है।