Nana Patekar Kanpur Connection: फिल्म अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की आयु में निधन हो गया नाना पाटेकर का उत्तर प्रदेश के कानपुर से गहरा नाता रहा। अपने जीवन की आखिरी लघु फिल्म स्कैम फाइल्स कानपुर के ही एक युवक के जीवन की रियल लाइफ कहानी पर आधारित थी। नाना पाटेकर ने इस मूवी में मुख्य किरदार निभाया था। इस मूवी को उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा बनाया गया था जिससे लोगों को साइबर ठगी के प्रति जागरूक किया जा सके।
कानपुर के बर्रा में रहने वाले भूपेंद्र सिंह की रियल लाइफ स्टोरी पर आधारित जिसकी पटकथा उत्तर प्रदेश पुलिस के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राहुल श्रीवास्तव ने लिखी थी स्कैम फाइल्स नाम की एक लघु फिल्म बनाई गई थी। उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा बनाई गई लघु फिल्म में मुख्य किरदार के रूप में नाना पाटेकर ही थे।
नाना पाटेकर ने इस मूवी में रिटायर्ड रेलवे गार्ड का किरदार निभाया था और इस मूवी में उनका नाम मिश्रा जी था। भूपेंद्र सिंह ने जिस तरह से साइबर ठगों को चकमा देकर साइबर ठगो से ही ठगी कर ली थी। यही वाक्या इस मूवी में भी दिखाया गया था। भूपेंद्र सिंह नाम के युवक के पास साइबर ठगों का फोन आया और उनको डिजिटल अरेस्ट करने की बात कहते हुए 16000 रुपए की मांग की थी।
इसके बाद भूपेंद्र सिंह ने अपने आप को हाई स्कूल का छात्र बताते हुए कई बार में कई बहाने बताकर साइबर ठगों से ही 13000 रुपए की रकम ठग ली थी और उन्होंने जिस तरह से साइबर ठगों के साथ ठगी की थी उसके वीडियो बनाकर भी सोशल मीडिया पर वायरल किए थे। जिसके बाद लगातार हो रहे साइबर क्राइम के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस ने भूपेंद्र सिंह की रियल लाइफ स्टोरी को लघु मूवी के रूप में बनाया और उसका नाम दिया स्कैम फाइल्स और इसमें मुख्य भूमिका निभाई नाना पाटेकर ने।
वहीं भूपेंद्र सिंह यह भी बताते हैं कि मूवी प्रदर्शित होने के बाद जिस तरह से लगातार साइबर ठगी की घटनाएं हो रही थी उस पर कुछ न कुछ अंकुश तो जरूर लगा है लेकिन इस मूवी ने भूपेंद्र सिंह के जीवन को बदल कर रख दिया। भूपेंद्र सिंह ने साइबर ठगो को तो ठगा ही। इस मूवी से उनको एक खास पहचान मिल गई कि आखिर भूपेंद्र सिंह कौन है जिसने साइबर ठगों को ही ठग लिया और उत्तर प्रदेश पुलिस ने इसको एक मूवी के रूप में प्रदर्शित कर दिया।
भूपेंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने ईमेल के जरिए नाना पाटेकर जी से संपर्क करने का प्रयास किया और मिलने की इच्छा जाहिर की। जिसके बाद मेल पर ही उनका जवाब मिला था कि यदि कोई जागरूकता से जुड़ी अन्य लघु फिल्म की शूटिंग की जाएगी तो उसमें भूपेंद्र सिंह को नाना पाटेकर एक छोटा सा किरदार जरूर देंगे।
भूपेंद्र सिंह की आंखों में आंसू थे और यह कहते-कहते उन्होंने कहा कि पूरे देश को नाना पाटेकर जी की कमी तो खाल ही रही है लेकिन उनके जीवन में यह बहुत बड़ी क्षति होगी। उनको एक बात दिल में रह जाएगी कि उनके किरदार को जिस अभिनेता ने मूवी में निभाया वह उस अभिनेता से कभी मिल नहीं पाए।
उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा बनाई गई लघु मूवी लगातार हो रही साइबर ठगी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए बनाई गई थी। इस मूवी का उद्देश्य लोगों को इतना बताना था कि किसी भी सरकारी संस्था के द्वारा किसी भी व्यक्ति को कभी भी डिजिटल अरेस्ट नहीं किया जाता है। अगर ऐसा हो तो लोग जान जाए की जिस संस्था के द्वारा डिजिटल अरेस्ट किया जा रहा है वह संस्था फर्जी है और अरेस्ट करने वाले लोग साइबर फ्रॉड।
ऐसा ही एक वाक्या कानपुर में भूपेंद्र सिंह के साथ हुआ था लेकिन वह बच गए और उन्होंने साइबर ठगों को ठग लिया जिसके चलते उत्तर प्रदेश पुलिस के दिमाग में यह बात आई और उन्होंने इसे एक लघु मूवी का रूप दे दिया। नाना पाटेकर के जीवन की यह आखिरी लघु फ़िल्म थी। गोवा में उन्होंने अंतिम सांस ली। अपने 75 वर्ष के जीवन में उन्होंने 60 से ज्यादा हिंदी और मराठी फिल्मों में काम किया और लगभग 100 के करीब लघु फिल्में बनाई लेकिन जो यादें स्कैम फाइल्स के साथ जुड़ी और कानपुर से उनका नाता जुड़ा उसको शायद ही कोई भूल सकता हो।