Kanpur Zoo Mysterious Disease: भारत के तीसरे सबसे बड़े चिड़ियाघर में अज्ञात वायरस की दस्तक से हड़कंप मच गया है। पिछले एक महीने में एक के बाद एक चार काले हिरण की मौत के बाद चिड़ियाघर में हड़कंप मचा हुआ है।चार काले हिरण की मौत के बाद कई बीमारियों के लिए सैंपल भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान में भेजे गए लेकिन अभी तक किस बीमारी से चार काले हिरण की मौत हुई इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
कानपुर चिड़ियाघर के मुख्य पशु चिकित्सक डॉक्टर मोहम्मद नासिर ने इस पूरे मामले में जानकारी देते हुए बताया कि सितंबर माह से अब तक चिड़ियाघर में कुल चार काले हिरण की मौत हुई है। लक्षणों को देखते हुए कई बीमारियों की आशंका जाहिर की गई। जिसके चलते लगातार शवों के सैंपल लेकर जांच की जा रही थी लेकिन अभी तक यह निष्कर्ष नहीं निकला था कि आखिर एक के बाद एक हिरणों की मौत हो कैसे रही है।
जिसके बाद हिरण के शव का सैंपल बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान में भेजा गया और संस्थान से आए दो विशेषज्ञों ने कानपुर चिड़ियाघर पहुंचकर इसकी जांच शुरू की। प्रथम दृष्टि में दोनों विशेषज्ञों ने ट्रीब नामक बीमारी की आशंका जाहिर की और लक्षणों को देखते हुए काले हिरणों में वैक्सीनेशन और बाड़े में सैनिटाइजेशन करने के लिए कहा जिसके चलते हिरणों को वैक्सीन लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है अब तक 26 हिरणों में वैक्सीन सफलतापूर्वक लगा दी गई है और बाड़े के आसपास सैनिटाइजेशन किया जा रहा है।
मोहम्मद नासिर ने बताया कि कानपुर का चिड़ियाघर भारत का तीसरा सबसे बड़ा चिड़ियाघर है और यहां पर वर्तमान में 1330 पशु पक्षी मौजूद हैं लेकिन प्राथमिकता के आधार पर सबसे पहले काले हिरणों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है क्योंकि काले हिरणों में अगर पूर्ण रूप से वैक्सीन लग जाएगी तो यह बीमारी अन्य जानवरों में नहीं फैलेगी। चिड़ियाघर में मौजूद 1330 पशु पक्षियों की जिंदगी इस समय खतरे में है उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों ने ट्रीब नामक बीमारी की आशंका जाहिर करते हुए इलाज तो शुरू कर दिया है लेकिन अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे हैं कि वास्तव में यह बीमारी वही है या नहीं।
ऐसे में इस अज्ञात वायरस से बचने के हरसंभव प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि चिड़ियाघर प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है और जल्द ही इस अज्ञात वायरस पर काबू पा लेगा। शुरुआत में जब हिरन की मौत हुई तो जांच करने पर उनमें डायरिया और किडनी इन्फेक्शन जैसे लक्षण दिखे थे हालांकि वर्तमान का जो संक्रमण है वह मक्खी की वजह से फैला है जो सामान्य से खतरनाक होती है।
वर्ष 2015 में इसी तरह छत्तीसगढ़ में अज्ञात वायरस की दस्तक हुई थी और नौ काले हिरण की मौत हो गई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह से कानपुर में काले हिरणों की मौत हो रही है, उसके लक्षण वर्ष 2015 में छत्तीसगढ़ में हुई काले हिरणों की मौत से मिलता-जुलता है। केंद्र सरकार ने इस पर संज्ञान लेते हुए तत्काल राहत और बचाव के निर्देश भी दिए थे। इस बीमारी में अचानक काले हिरण को तेज बुखार आता है। आंखों में अंधापन होता है। हिरण अपनी एक ही जगह पर घूमने लगता है और उसकी मृत्यु हो जाती है।