भारत-जापान दोस्ती की नई पहचान बनेगा आबे मेमोरियल कॉरिडोर, काशी और क्योटो के रिश्तों को मिलेगी मजबूती

Shinzo Abe Memorial Corridor: वाराणसी के रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में शिंजो आबे की स्मृति में तैयार आबे मेमोरियल कॉरिडोर का लोकार्पण होगा। जानें काशी-क्योटो रिश्ते और जापानी निवेश से जुड़ी खास बातें।
Shinzo Abe Memorial Corridor in Varanasi: CM Yogi to Inaugurate Tribute to India-Japan Friendship
काशी (सोर्स- सोशल मीडिया)
Published on: 
Updated on: 

Shinzo Abe Memorial Corridor Varanasi: भारत-जापान की दोस्ती और काशी-क्योटो के सांस्कृतिक रिश्तों के लिए बुधवार का दिन खास होने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वाराणसी स्थित रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में जापान के पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत शिंजो आबे की स्मृति में तैयार ‘आबे मेमोरियल कॉरिडोर’ का लोकार्पण करेंगे। यह विशेष कॉरिडोर शिंजो आबे के काशी से जुड़ाव, भारत-जापान संबंधों में उनके योगदान और दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक विरासत को समर्पित है।

रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर स्वयं भारत-जापान मैत्री का प्रतीक माना जाता है। इसी परिसर में तैयार किया गया आबे मेमोरियल कॉरिडोर दोनों देशों के बीच मजबूत होते रिश्तों की कहानी को प्रदर्शित करेगा। शिंजो आबे का काशी से विशेष लगाव रहा था और उनके कार्यकाल में भारत-जापान संबंधों को रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक स्तर पर नई ऊंचाई मिली।

186 करोड़ की लागत से तैयार हुआ रुद्राक्ष

वाराणसी में निर्मित रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर भारत और जापान की साझेदारी का महत्वपूर्ण उदाहरण है। करीब 186 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस अत्याधुनिक केंद्र का निर्माण दोनों देशों के सहयोग से हुआ है। इसकी वास्तुकला में भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और जापानी सौंदर्यबोध का अनूठा मेल देखने को मिलता है।

Shinzo Abe Memorial Corridor in Varanasi: CM Yogi to Inaugurate Tribute to India-Japan Friendship
Agra: अछनेरा में रात के अंधेरे में खाद का खेल! डीएपी लदी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां पकड़ीं, सचिव पर मुकदमा दर्ज

भवन की छत को भगवान शिव के शिवलिंग की आकृति से प्रेरित होकर डिजाइन किया गया है, जबकि इसके बाहरी अग्रभाग पर 108 रुद्राक्ष मनकों की डिजाइन इसे विशिष्ट पहचान देती है। काशी की आध्यात्मिक विरासत और जापान की आधुनिक तकनीकी सोच का यह संगम इस भवन को खास बनाता है।

1200 लोगों की बैठने की क्षमता

रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में करीब 1200 दर्शकों की क्षमता वाला मुख्य सभागार बनाया गया है। इसके अलावा आधुनिक मीटिंग रूम और अन्य अत्याधुनिक सुविधाएं भी मौजूद हैं। बड़े सांस्कृतिक कार्यक्रमों, सम्मेलनों और अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजनों के लिए इसे विकसित किया गया है।

आबे मेमोरियल कॉरिडोर के जरिए शिंजो आबे की काशी यात्रा, भारत-जापान संबंधों और काशी-क्योटो साझेदारी की स्मृतियों को भी लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की गई है।

काशी-क्योटो रिश्तों को मिलेगी नई पहचान

काशी और जापान के प्राचीन शहर क्योटो के बीच सिस्टर सिटी समझौता दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों का महत्वपूर्ण अध्याय है। दोनों शहरों की प्राचीन परंपराओं, धार्मिक विरासत और सांस्कृतिक जीवन में कई समानताएं हैं। आबे मेमोरियल कॉरिडोर इस रिश्ते को और मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिंजो आबे के बीच व्यक्तिगत मित्रता ने भी भारत-जापान संबंधों को नई दिशा दी थी। काशी-क्योटो संबंधों को आगे बढ़ाने में दोनों नेताओं की भूमिका को विशेष रूप से याद किया जाता है।

Shinzo Abe Memorial Corridor in Varanasi: CM Yogi to Inaugurate Tribute to India-Japan Friendship
मेरठ का चर्चित सांप कांड: अवैध संबंधों में रोड़ा बना पति तो कर दी हत्या, पत्नी और प्रेमी दोनों दोषी करार

90 हजार करोड़ के निवेश समझौतों पर भी नजर

आबे मेमोरियल कॉरिडोर के लोकार्पण कार्यक्रम के साथ उत्तर प्रदेश में जापानी निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाए जाने की तैयारी है। कार्यक्रम के दौरान जापानी कंपनियों के साथ करीब 90 हजार करोड़ रुपये के समझौतों (एमओयू) पर हस्ताक्षर होने की बात कही जा रही है। इससे प्रदेश में निवेश, उद्योग, रोजगार और तकनीकी सहयोग के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

इस लिहाज से यह आयोजन केवल श्रद्धांजलि कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सांस्कृतिक रिश्तों से लेकर आर्थिक साझेदारी तक भारत-जापान संबंधों के नए अध्याय का संदेश देगा।

आस्था से अर्थव्यवस्था तक नई साझेदारी

काशी में आबे मेमोरियल कॉरिडोर का निर्माण उस साझेदारी का प्रतीक है, जिसमें एक ओर भारत की आध्यात्मिक राजधानी काशी की संस्कृति और परंपरा है तो दूसरी ओर जापान की आधुनिकता, तकनीक और विकास की सोच। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिंजो आबे के समय में मजबूत हुए भारत-जापान संबंधों को आगे बढ़ाने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

शिंजो आबे अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन काशी में उनकी स्मृतियों को समर्पित यह कॉरिडोर भारत-जापान मैत्री की उस विरासत को आगे बढ़ाने का माध्यम बनेगा, जिसकी नींव दोनों देशों के नेताओं ने मजबूत की थी।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com