

Jawahar Pandit Murder Case Prayagraj: तीन दशक पहले प्रदेश के बहुचर्चित हत्याकांड में शुमार जवाहर पंडित हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे करवरिया बंधुओं को इलाहाबाद उच्च न्यायालय से राहत नहीं मिली। अदालत ने अभियुक्त कपिल मुनि करवरिया और सूर्यभान करवरिया की दूसरी जमानत अर्जियां खारिज कर दीं। इनके साथ ही रामचंद्र त्रिपाठी उर्फ कल्लू की दूसरी जमानत अर्जी भी अदालत ने निरस्त कर दी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद तीनों अभियुक्तों को फिलहाल जेल में ही रहना होगा।
जवाहर पंडित हत्याकांड करीब तीस साल से न्यायिक प्रक्रिया में रहा है। 13 अगस्त 1996 को प्रयागराज के सिविल लाइंस इलाके में जवाहर पंडित की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वारदात के बाद पूरे शहर में सनसनी फैल गई थी। मामले की जांच के बाद कई लोगों को अभियुक्त बनाया गया और मुकदमे की सुनवाई लंबी चली। हत्याकांड की गंभीरता को देखते हुए इस पर प्रदेशभर की निगाहें रही हैं।
मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद वर्ष 2019 में ट्रायल कोर्ट ने करवरिया बंधुओं समेत अन्य आरोपियों को दोषी करार दिया था। अदालत ने दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके बाद अभियुक्तों की ओर से सजा के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया के साथ-साथ जमानत के लिए भी प्रयास किए गए। पूर्व में राहत नहीं मिलने के बाद दूसरी बार जमानत अर्जी दाखिल की गई थी।
कपिल मुनि करवरिया, सूर्यभान करवरिया और रामचंद्र त्रिपाठी उर्फ कल्लू की दूसरी जमानत अर्जियों पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने उन्हें खारिज कर दिया। इससे उम्रकैद की सजा काट रहे तीनों अभियुक्तों को फिलहाल जेल से बाहर आने का रास्ता नहीं मिल सका है। जवाहर पंडित हत्याकांड में हाईकोर्ट का यह आदेश मामले की लंबी चली न्यायिक प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।