UGC Rollback Movement Hapur: यूजीसी रोलबैक के विरोध में शुरू हुआ आंदोलन अब थमता नजर नहीं आ रहा है। जयपुर से आगरा होते हुए नई दिल्ली के जंतर-मंतर तक हुए प्रदर्शनों के बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध की आवाज लगातार उठ रही है। जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाए जाने की कार्रवाई ने आंदोलन को और धार दे दी। इसके बाद यूजीसी रोलबैक के विरोध की चिंगारी कई राज्यों और जिलों तक पहुंचती दिखाई दे रही है।
आगरा भी इस आंदोलन से अछूता नहीं रहा। यहां युवाओं ने कई बार सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रैक्टरों से बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन में शामिल हुए। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई बार झड़प की स्थिति भी बनी।
आगरा में यूजीसी रोलबैक के विरोध की शुरुआत करने वाले और आंदोलन को जिले के अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंचाने वाले MS ठाकुर ने ‘नव भारत’ से विशेष बातचीत में दावा किया कि आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है, बल्कि यह सिर्फ शुरुआत है। उन्होंने कहा कि फिलहाल आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए रणनीति तैयार की जा रही है।
MS ठाकुर के मुताबिक, 18 अक्टूबर को हापुड़ में बड़ा प्रदर्शन प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि परिस्थितियों के अनुसार हापुड़ से नई दिल्ली कूच करने का निर्णय भी लिया जा सकता है। उनका कहना है कि आंदोलन को लेकर सरकार से संवाद और समझौते के प्रयास जारी हैं, लेकिन प्रदर्शनकारी किसी दबाव में नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने यूजीसी रोलबैक से जुड़े फैसले को वापस नहीं लिया और वादाखिलाफी हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। MS ठाकुर ने दावा किया कि इसका राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकता है और उनके शब्दों में, इसका खामियाजा भाजपा को 2029 में देखने को मिलेगा।
MS ठाकुर ने कहा कि विरोध प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकार है। यदि इस अधिकार को दबाने का प्रयास किया गया तो इसका परिणाम सरकार को भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि उनके पुरखों ने देश के लिए कुर्बानियां दी हैं और यूजीसी रोलबैक के मुद्दे पर पीछे हटने का सवाल ही नहीं है।
उन्होंने कहा कि हापुड़ में भी आंदोलन को लेकर रणनीति तैयार की जा रही है। जरूरत पड़ी तो दिल्ली तक जाएंगे और सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करेंगे। उनका स्पष्ट कहना है कि यूजीसी रोलबैक के मुद्दे पर आंदोलनकारी किसी भी कीमत पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
फिलहाल सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संवाद के प्रयासों के बीच 18 अक्टूबर का हापुड़ प्रदर्शन आगे की दिशा तय करने वाला अहम पड़ाव माना जा रहा है। अब नजर इस बात पर है कि सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत किसी समाधान तक पहुंचती है या यूजीसी रोलबैक का विरोध एक बार फिर बड़े आंदोलन का रूप लेता है।