E20 फ्यूल (सोर्स- सोशल मीडिया) 
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E20 Fuel Impact: नितिन गडकरी ने संसद में बताया, जानिए E20 फ्यूल से आपके पुराने वाहन को होगा कितना नुकसान

E20 Fuel Impact: नितिन गडकरी ने संसद में बताया कि E20 फ्यूल से ज्यादातर वाहनों को नुकसान नहीं होगा। 2016 से पहले के BS-III वाहनों में मामूली रबर पार्ट्स और गैस्केट बदलने की जरूरत पड़ सकती है।

प्रिया सिंह

E20 Fuel Impact On Vehicles Engine Mileage: देशभर में 20% एथेनॉल और 80% पेट्रोल वाले नए ईंधन का इस्तेमाल अब बहुत ज्यादा बढ़ गया है। E20 Fuel के वाहनों पर असर को लेकर वाहन मालिकों के मन में कई तरह के बड़े सवाल थे। उन्हें डर था कि क्या इस नए ईंधन से उनकी कार या बाइक के इंजन पर बुरा असर पड़ेगा। इस अहम मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने संसद में अपनी स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री ने बताया कि इससे ज्यादातर वाहनों को कोई भी बड़ा नुकसान नहीं होगा। हालांकि 1 अप्रैल 2005 से लागू BS-III मानकों वाले और 2016 से पहले बने वाहनों में कुछ बदलाव जरूरी है। इन पुराने वाहनों में ईंधन के इस्तेमाल के लिए कुछ रबर के पार्ट्स और गैस्केट बदलने की जरूरत पड़ सकती है। यह छोटा सा काम नियमित सर्विस के दौरान बिना किसी बड़े इंजन बदलाव के आसानी से किया जा सकता है।

इंजन पर नहीं पड़ा कोई बड़ा असर

सरकार ने बताया कि इस फ्यूल के प्रभाव को लेकर कई बड़े और अहम अध्ययन पूरी तरह से किए गए हैं। इंडियन ऑयल, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम, सियाम और एआरएआई ने दोपहिया और चारपहिया वाहनों की जांच की। इस विस्तृत अध्ययन में पाया गया कि नए फ्यूल का इस्तेमाल करने से इंजन की परफॉर्मेंस पर असर नहीं पड़ा। स्टार्ट होने की क्षमता, ड्राइविंग अनुभव और धातु या प्लास्टिक के पार्ट्स पर कोई भी असामान्य असर नहीं दिखा।

माइलेज घटने की चिंता दूर की

नए पेट्रोल को लेकर माइलेज घटने की भी चिंता लोगों द्वारा बहुत ही ज्यादा मुख्य रूप से जताई जा रही थी। इस पर मंत्री ने स्पष्ट कहा कि किसी भी वाहन का माइलेज केवल ईंधन पर निर्भर बिल्कुल भी नहीं करता। सड़क की स्थिति, ड्राइविंग का तरीका, भारी ट्रैफिक और वाहन की देखभाल जैसे कारक माइलेज को प्रभावित करते हैं। इसलिए केवल नए फ्यूल को माइलेज कम होने की मुख्य वजह बिल्कुल भी नहीं माना जा सकता है।

सरकार की लंबी और गहरी जांच

सरकार का साफ कहना है कि नए पेट्रोल को लागू करने से पहले कई वर्षों तक लगातार तकनीकी परीक्षण किए गए। लैब टेस्ट और फील्ड ट्रायल पूरे होने के बाद ही इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे देशभर में लागू किया गया। दुनिया के कई अन्य बड़े देशों में भी लंबे समय से एथेनॉल मिश्रित ईंधन का सफलता से इस्तेमाल हो रहा है। इसलिए आम जनता को इस नए और पर्यावरण के अनुकूल ईंधन को लेकर बिल्कुल भी घबराने की जरूरत नहीं है।

नई और पुरानी गाड़ियों के लिए सलाह

ऐसे में अगर आपकी गाड़ी नई है या इस फ्यूल के लिए उपयुक्त है तो चिंता की कोई बात नहीं है। वहीं अगर आपके पास 2016 से पहले बनी पुरानी BS-III गाड़ी है, तो आपको थोड़ी ज्यादा सावधानी बरतनी होगी। अपनी गाड़ी की अगली सर्विस के दौरान रबर पार्ट्स और गैस्केट की अच्छे से जांच करवा लेना बहुत बेहतर रहेगा। इससे आपका पुराना वाहन भी बिना किसी परेशानी के इस फ्यूल पर बहुत ही आसानी से और सुरक्षित चल सकेगा।

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