AI Smart Glass को लेकर नॉर्वे के नियम। Source. Meta AI
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AI Smart Glasses पर नॉर्वे में सख्ती, पब्लिक प्लेसेज पर लग सकता है अस्थायी बैन, जानें क्यों बढ़ी चिंता

Norway Smart Glasses Ban: AI और स्मार्ट डिवाइस को लेकर कई सवाल उठते रहते है। जिसमें अब स्मार्ट चश्में सुरक्षा के घेरे में आ गए है। जिन्हें अब नॉर्वे में बैन करने की बात सामने आ रही है।

सिमरन सिंह

Smart Glasses Privacy: AI और स्मार्ट डिवाइस हमारी रोजमर्रा की जिंदगी को तेजी से बदल रहे हैं। ऐस में अब AI Smart Glasses भी बाजार में आ गए है जो सामान्य चश्मे जैसे दिखाई देते हैं लेकिन इनमें कैमरा, माइक्रोफोन और AI फीचर्स मौजूद हो सकते हैं। यही सुविधा अब प्राइवेसी को लेकर चिंता बढ़ा रही है। बता दें कि नॉर्वे सरकार ने 5 अक्टूबर 2026 को कहा कि वह कुछ सार्वजनिक जगहों पर AI ग्लास के इस्तेमाल पर अस्थायी प्रतिबंध का प्रस्ताव रखने की योजना बना रही है।

इस मुद्दे में कहा जा रहा है कि इन डिवाइस से आसपास मौजूद लोगों की जानकारी या तस्वीरें उनकी जानकारी के बिना रिकॉर्ड की जा सकती हैं। वहीं नॉर्वे की चिंता इसी संभावित अनजाने रिकॉर्डिंग और उससे जुड़े प्राइवेसी जोखिम को लेकर है।

पार्क से मॉल तक, किन जगहों पर हो सकती है रोक?

सामने आए नियमों के तहत उन जगहों पर AI ग्लास के इस्तेमाल को प्रतिबंधित किया जा सकता है जहां आम लोग नियमित रूप से इकट्ठा होते हैं। इसको लेकर Reuters ने बताया है कि इनमें पार्क, बीच, म्यूजियम, शॉपिंग सेंटर और सार्वजनिक कार्यक्रम जैसी जगहें शामिल हो सकती हैं। लेकिन इसे अभी लागू हो चुका देशव्यापी बैन समझना सही नहीं होगा। बताया जा रहा है कि नॉर्वे सरकार फिलहाल अस्थायी प्रतिबंध का प्रस्ताव तैयार करने की दिशा में बढ़ रही है। इससे पहले राजधानी ओस्लो के स्कूलों में स्मार्ट ग्लास के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है।

छोटी इंडिकेटर लाइट से क्या प्राइवेसी बच जाएगी?

जानकारी के लिए बता दें कि कैमरा वाले स्मार्ट ग्लास में रिकॉर्डिंग के दौरान इंडिकेटर लाइट जैसी व्यवस्था हो सकती है ताकि आसपास के लोगों को पता चले कि कैमरा इस्तेमाल हो रहा है। लेकिन प्राइवेसी को लेकर आलोचना यही है कि भीड़भाड़ वाली जगह पर इतनी छोटी लाइट को नोटिस करना आसान नहीं होता है। यही वजह है कि बहस सिर्फ इस बात पर नहीं है कि कैमरा रिकॉर्ड कर रहा है या नहीं बल्कि क्या सामने वाले व्यक्ति को वास्तव में जानकारी है और उसकी सहमति ली गई है या नहीं। देखा गया है कि स्मार्ट ग्लास को लेकर दूसरे देशों में भी इसी तरह की चिंताएं सामने आ रही है।

स्मार्ट चश्मों कि बहस का क्या है असली कारण?

जैसा कि सभी को पता है कि स्मार्ट ग्लास में कैमरा और AI का इस्तेमाल कई उपयोगी कामों में सहायक होते है। जिसमें उदाहरण के तौर पर ये तकनीक यूजर को जानकारी उपलब्ध कराने या कुछ परिस्थितियों में दिव्यांग लोगों की मदद करने जैसे उपयोगों में काम आ सकती है। लेकिन जब डिवाइस लगातार आसपास की दुनिया को देख और सुन सकता है तब उसमें मौजूद लोगों की प्राइवेसी का सवाल भी उतना ही महत्वपूर्ण हो जाता है।

नॉर्वे का प्रस्ताव इसी बड़े सवाल को सामने लाता है कि नई AI तकनीक कितनी उपयोगी है और उसका इस्तेमाल दूसरों की प्राइवेसी को प्रभावित किए बिना कैसे किया जाए। दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी स्मार्ट ग्लास को लेकर नियम और प्रतिबंधों पर चर्चा बढ़ रही है।

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