दृष्टिबाधित तैराक ईश्वरी कमलेश पांडे ने रचा इतिहास (सौजन्य-नवभारत) 
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नागपुर की जाबाज ईश्वरी ने रच दिया इतिहास, पाल्क स्ट्रेट पार करने वाली दुनिया की बनीं पहली नेत्रहीन तैराक

Ishwari Pande Swimmer: इतिहास रच दिया! नागपुर की 17 वर्षीय नेत्रहीन तैराक ईश्वरी पांडे ने 11.15 घंटे में पाल्क स्ट्रेट पार किया। वह ऐसा करने वाली दुनिया की पहली पूर्णतः दृष्टिबाधित तैराक बनीं।

प्रिया जैस

Ishwari Pande World Record: अदम्य साहस और अटूट संकल्प का परिचय देते हुए नागपुर की 17 वर्षीय दृष्टिबाधित तैराक ईश्वरी कमलेश पांडे ने पाल्क स्ट्रेट पार कर इतिहास रच दिया। वे यह उपलब्धि हासिल करने वाली दुनिया की पहली पूर्णतः नेत्रहीन तैराक बनने जा रही हैं। इस असाधारण उपलब्धि ने न केवल नागपुर बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है।

ईश्वरी ने मात्र 11.15 घंटों में यह स्ट्रेट पार किया। अपनी ऐतिहासिक तैराकी की शुरुआत सुबह 4 बजे श्रीलंका के तलाईमन्नार के पास उरमलाई प्वाइंट से की और भारत के धनुषकोडी स्थित अरिचलमुनई तट पर दोपहर 3.15 बजे पहुंचीं।

इस ऐतिहासिक अभियान के दौरान पर्यवेक्षक के रूप में पैरा स्विमिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के एम. विजयकुमार, तमिलनाडु ओपन वाटर स्विमिंग एसोसिएशन के जयकुमार तथा अंतरराष्ट्रीय एक्सीलेंस अवॉर्ड जज सुखदेव धुर्वे उपस्थित रहे। इस पूरे आयोजन का संचालन शार्क एक्वाटिक स्पोर्टिंग एसोसिएशन द्वारा किया गया।

बेहद चुनौतीपूर्ण रही यात्रा

ईश्वरी पांडे (Ishwari Pande) की यह यात्रा बेहद चुनौतीपूर्ण रही जिसमें उन्हें तेज समुद्री धाराओं, बदलते ज्वार-भाटे और जेलीफिश के हमलों जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। इन तमाम चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अद्भुत धैर्य, मानसिक दृढ़ता और शारीरिक क्षमता का परिचय दिया। जन्म से दृष्टिहीन होने के बावजूद ईश्वरी ने अपनी मेहनत और लगन से यह साबित कर दिया कि सीमाएं केवल मन में होती हैं।

इससे पहले भी वे कई ओपन वाटर तैराकी चुनौतियों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुकी हैं। उनकी यह उपलब्धि उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो किसी न किसी बाधा के कारण अपने सपनों को अधूरा मान लेते हैं। इस अभियान में ईश्वरी के साथ उनके अंतरराष्ट्रीय कोच संजय बटवे भी मौजूद रहे जिन्होंने पूरे सफर के दौरान उनका मार्गदर्शन किया।

सपोर्टिंग स्टाफ ने बढ़ाया हौसला

इसके अलावा अनुभवी तैराक भावी राजगिरे, ईशांत पांडे, संदीप वैद्य और नीरव पांडिया ने उन्हें प्रेरित किया और सुरक्षा के दृष्टिकोण से साथ-साथ तैरते हुए सहयोग दिया। चिकित्सकीय सहायता के लिए डॉ. अभय राजगिरे भी टीम में शामिल थे जिन्होंने पूरी यात्रा के दौरान स्वास्थ्य पर नजर बनाए रखी।

ईश्वरी (Ishwari Pande) की इस सफलता के पीछे उनके माता-पिता कमलेश पांडे और अरुणा पांडे का भी महत्वपूर्ण योगदान है। उनके निरंतर समर्थन, प्रोत्साहन और विश्वास ने ईश्वरी को इस मुकाम तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। ईश्वरी की यह सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और यह साबित करेगी कि कठिनाइयों के बावजूद भी सपनों को साकार किया जा सकता है।

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