Nagpur News: 8 डेटोनेटर थे पूरी तरह फिट! जरा सी चूक और मलबे में तब्दील हो जाता दोसर भवन चौक; रिपोर्ट

Nagpur Explosives Conspiracy: नागपुर में बड़ी साजिश नाकाम? दोसर भवन चौक पर मिले 58 डेटोनेटर और अमोनियम नाइट्रेट। मेट्रो स्टेशन और पेट्रोल पंप के पास मौत का जखीरा मिलने से हड़कंप।
Major conspiracy suspected in Nagpur as 58 detonators & explosives found near Dosar Bhawan Chowk. ATS and Police investigate SBL Energy link.
नागपुर में मिले विस्फोटक (सौजन्य-नवभारत)
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Nagpur Detonators Found at Dosar Bhawan Chowk: नागपुर के दोसर भवन चौक के समीप जिस प्रकार डिटोनेटर और जिलेटिन मिले हैं उससे लगता है कि शहर में कोई बड़ी साजिश रची जानी थी। ये डिटोनेटर बेहद घातक हो सकते थे। जानकारों का मानना है कि जिस प्रकार शहर का तापमान बढ़ रहा है, उससे डिटोनेटर में ब्लास्ट हो सकता था। और यदि ब्लास्ट हो जाता तो पूरा परिसर दहल उठता तथा सैकड़ों नागरिकों की जान जा सकती थी।

दोसर भवन चौक से महज कुछ कदम की दूरी पर प्राध्यापक उज्ज्वल लांजेवार का मकान है। घर के सामने ही आंगन में अलग-अलग पेड़ लगाए गए हैं। रोजाना इन पेड़ों को पाइप से पानी दिया जाता है। इन झाड़ियों में पिछले 1 महीने से प्लास्टिक की पन्नी पड़ी थी। कचरा समझकर लांजेवार परिवार ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया। मंगलवार को सुबह 10.45 बजे के दौरान उज्ज्वल का बेटा अमोघ पेड़ों को पानी दे रहा था।

इसी दौरान प्लास्टिक की पन्नी के बाहर जिलेटिन की कुछ छड़ियां दिखाई दीं। उसने माता-पिता को जानकारी दी। बड़े भाई ओजस ने अपने मोबाइल पर जिलेटिन की फोटो ली। गूगल पर सर्च करते ही विस्फोटक होने का पता चला। उज्ज्वल ने तत्काल कंट्रोल रूम को जानकारी दी।

खबर मिलते ही डीसीपी राहुल मदने, एसीपी मोरे और गणेशपेठ के थानेदार अतुल तावड़े अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और बीडीडीएस टीम को भी मौके पर बुलाया गया। बीडीडीएस के डॉग वीर ने सूंघते ही विस्फोटक होने का इशारा दे दिया और पूरा परिसर खाली करवाया गया। भारी संख्या में पुलिस बल ने परिसर को घेरा और विस्फोटक जमा करने की शुरुआत हुई।

मैग्जीन में रखा गया सुरक्षित

पहले तो केवल 15 छड़ें दिखाई दीं। जब थैलियां खोली गईं तो कुल 58 डिटोनेटर और 15 जिलेटिन अलग-अलग पन्नियों में दिखाई दीं। इससे अधिकारियों में भी हड़कंप मच गया। संबंधित विभाग से मैग्जीन बुलाई गई जिसमें इस प्रकार के विस्फोटकों को सुरक्षित रखा जाता है। सीपी रवींद्र कुमार सिंगल और डीआईजी राजेंद्र दाभाड़े भी मौके पर पहुंचे। बरामद की गई सामग्री का मुआयना करने के बाद सीपी ने विस्फोटक अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच करने का आदेश दिया। पुलिस अधिकारी ने बताया कि विस्फोटक एसबीएल एनर्जी एक्सप्लोसिव कंपनी में बना होने की प्राथमिक जानकारी है। कंपनी से पूरा रिकॉर्ड मांगा गया है। पेट्रोलियम व विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पेसो) के जरिए पूरी जांच की जाएगी। इस बैच के विस्फोटक किसे और कब सप्लाई किए गए थे इसकी बारीकी से जांच करने के बाद ही कुछ स्पष्ट हो पाएगा।

सबसे संवेदनशील है दोसर भवन चौक

दोसर भवन चौराहा शहर के सबसे संवेदनशील स्थानों में से एक है। चौराहे से महज 30 फुट की दूरी पर यह विस्फोटक बरामद हुआ है। इस स्थान से मेट्रो स्टेशन महज 20 फुट दूर है। इस चौराहे पर सांप्रदायिक हिंसा का बड़ा इतिहास रहा है। जिस जगह विस्फोटक मिला उससे 200 मीटर की दूरी से पिछले दिनों राम जन्मोत्सव शोभायात्रा निकलती है। ऐसे में तरह-तरह के सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय नागरिक इसमें बड़ी साजिश रचे जाने की बात कर रहे हैं।

अमोनियम नाइट्रेट होने की भी संभावना

प्राथमिक जांच के दौरान 58 डिटोनेटर और 15 जिलेटिन पाई गईं। 8 डिटोनेटर में हैंडलिंग क्लिप भी लगाई गई थी। सूत्रों का दावा है कि विस्फोटक भले ही एसबीएल कंपनी से निकले हों लेकिन उनमें कोई बैच नंबर नहीं था। सूत्रों का दावा है कि जो 15 छड़ें पुलिस को मिली हैं वे जिलेटिन नहीं बल्कि अमोनियम नाइट्रेट है। खुले में रखा अमोनियम नाइट्रेट भले ही उतना घातक न हो लेकिन इसे भी प्रक्रिया कर विस्फोटक की तरह ही इस्तेमाल किया जाता है।

जानकारों का दावा है कि डिटोनेटर की हैंडलिंग बेहद नाजुक होती है। किसी के स्पर्श, अधिक तापमान या फिर छोटे से स्पार्क से भी डिटोनेटर फट सकते थे। मात्र 20 कदम की दूरी पर पेट्रोल पंप भी है। यदि डिटोनेटर में विस्फोट होता तो शहर में भयानक हादसा हो सकता था, इसीलिए यह तो पक्का है कि किसी जानकार व्यक्ति ने ही डिटोनेटर और छड़ों को झाड़ियों के बीच छांव वाली जगह पर छिपा रखा था।

इतनी भारी मात्रा में विस्फोटक कहां से आया

पुलिस का अनुमान है कि किसी ने नाकाबंदी के डर से विस्फोटक झाड़ियों में फेंक दिया। यदि इस बात को सही भी मान लिया जाए तो जिसने विस्फोटक फेंका वह उसे वापस लेने भी जरूर आता क्योंकि लांजेवार परिवार का दावा है कि प्लास्टिक की थैली 1 महीने से वहीं पड़ी थी। अब सवाल उठता है कि इतनी भारी मात्रा में विस्फोटक आया कहां से और क्यों?

आमतौर पर इन विस्फोटकों का इस्तेमाल खदानों में ब्लास्ट करने के लिए किया जाता है। इसका इस्तेमाल करने वाली सभी एजेंसी प्रशिक्षित और रजिस्टर्ड होती हैं। कंपनी ने कितनी एजेंसियों को विस्फोटक सप्लाई किया इसकी जानकारी फिलहाल पुलिस के पास भी उपलब्ध नहीं है। सिटी पुलिस के साथ एटीएस की टीम भी जांच में जुटी है।

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