

India is Number-1 in Unpaid Work Hours: भारत में अक्सर ही लेबल वर्क को लेकर कई तरह के सवाल उठते रहते हैं। वहीं, कुछ एजेंसियां देश के भीतर काम करने वाले लोगों और उनको मिलनी वाली वेतन और भत्ते पर भी अपनी रिपोर्ट जारी करती रहती हैं। लेबर वर्क से जुड़ी सामने आई एक रिपोर्ट ने सभी को चौंका दिया है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पूरी दुनिया में भारत ही एक ऐसा देश है जहां सबसे अधिक अनपेड वर्क कराया जाता है।
क्लाउड बेस्ड ह्युमन कैपिटल मैनेजमेंट (HCM) कंपनी की हालिया सर्वे पीपल एट वर्क 2026 (PEOPLE AT WORK 2026) की रिपोर्ट में इस बात की जानकारी सामने आई है।
मिडिल ईस्ट और अफ्रीका में सबसे ज्यादा लोगों ने माना कि वह 2025 में बिना किसी भत्ते के शिफ्ट के अतिरिक्त काम किए। वहीं, भारत में 24 प्रतिशत कामकाजी लोगों ने 16 घंटे या कई बार उससे अधिक बिना किसी अतिरिक्त भत्ते (unpaid hour) काम किया। जो कि हर हफ्ते बिना पेमेंट के घंटे, किसी भी जॉब मार्केट का सबसे बड़ा हिस्सा है। चेक गणराज्य में केवल 4 प्रतिशत ने कहा कि वे चौबीस घंटे या उससे अधिक घंटे काम करते हैं।
आपको बताते चलें कि यह सर्वे साल 2025 में किया था। जिसमें कुल 36 देशों को 39 हजार से अधिक कामकाजी लोगों ने भाग लिया था। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 24 फीसदी कर्मचारी बिना किसी वेतन के 16 घंटे या उससे अधिक काम करते हैं। इसके अलावा 40 फीसदी कर्मचारी हर हफ्ते 6 से 15 घंटे तक बिना सैलरी के काम करते हैं।
इस सर्वे से यह जानकारी सामने आई है कि इस सर्वे में भाग लेने वाले लगभग दो-तिहाई भारतीय कर्मचारियों ने हर हफ्ते में कम से कम छह घंटे बिना किसी अतिरिक्त भुगतान का काम करते हैं।
ADP की रिपोर्ट के अनुसार, बिना सैलरी काम करने वाले लोगों के लिस्ट में भारत पूरी दुनिया में नंबर एक पर है। वहीं, 23% के साथ तुर्की दूसरे और 21 फीसदी के साथ ऑस्ट्रेलिया तीसरे नंबर पर है। अमेरिका में यह आंकड़ा 20 प्रतिशत है। वहीं, चेक रिपब्लिक में सिर्फ 4 प्रतिशत कर्मचारियों ने 16 घंटे या उससे अधिक बिना सैलरी काम करने की बात मानते हैं। चीन, ताइवान और जापान में यह आंकड़ा 6 प्रतिशत रिकॉर्ड किया गया।
दुनिया के 5 देशों का आंकड़ा
भारत- 24%
तुर्की- 23%
आस्ट्रेलिया- 21%
अमेरिका-20%
चेक रिपब्लिक-4%
ध्यान देने वाली बात यह है कि 2023 में 23 फीसदी के रिकॉर्ड एंगेजमेंट हाई के बाद से भारत में गिरावट आ रही है। भारत में काम करने वाले लोग लंबे समय तक काम करते हैं और डिजिटल ओवरलोड की शिकायत करते हैं। काम के पर्सनल टाइम पर असर पड़ने की बढ़ती चिंता के बीच देश की संसद 'राइट टू डिस्कनेक्ट' बिल पर विचार कर रही है।
भारत के लंबे और बिखरे हुए काम के दिन कर्मचारियों की एनर्जी खत्म कर देते हैं, फोकस कम करते हैं, और काम पर उत्साह बनाए रखना मुश्किल बना देते हैं। स्किल में बड़े गैप भी एंगेजमेंट में कमी ला रहे हैं।