पुलेला गोपीचंद (फोटो-सोशल मीडिया) 
क्रिकेट

जन्मदिन विशेष: वो खिलाड़ी जिसने बैडमिंटन को दिलाई एक नई पहचान, जानें ऐसी है उनकी कहानी

Happy Birthday Pullela Gopichand: पुलेला गोपीचंद खिलाड़ी और कोच दोनों रूपों में भारतीय बैडमिंटन को नई ऊंचाइयों पर ले गए। उन्होंने साइना नेहवाल और पी.वी. सिंधु जैसे ओलंपिक पदक विजेताओं को तैयार किया।

उज्जवल सिन्हा

Pullela Gopichand Birthday: भारतीय टीम के पूर्व स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी और कोच पुलेला गोपीचंद आज 16 नवंबर 2025 को अपना 52वां जन्मदिन मना रहे हैं। उन्होंने बैडमिंटन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में और इस खेल को लोकप्रिय बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है।वर्तमान में गोपीचंद राष्ट्रीय बैडमिंटन टीम के कोच के रूप में कार्यरत हैं। गोपीचंद ने कुछ महीनों पूर्व एक बयान में कहा था कि अमीर लोगों को ही अपने बच्चों को खेल के क्षेत्र में भेजना चाहिए। गोपीचंद के 52वें जन्मदिन पर आइए जानते हैं कि उन्होंने आखिर ऐसा क्यों कहा था।

पुलेला गोपीचंद ने कुछ महीने पहले कहा था कि अमीर लोगों को ही अपने बच्चों को खेल के क्षेत्र में भेजना चाहिए। उन्होंने कई खिलाड़ियों का उदाहरण भी दिया था जिन्होंने करियर की समाप्ति के बाद आर्थिक परेशानी का सामना किया और सरकार से सहायता मांगी थी।

खिलाड़ी और कोच के रूप में सफल रहे हैं गोपीचंद

एक खिलाड़ी और कोच के रूप में गोपीचंद बेहद सफल हैं। इसलिए दोनों किरदारों के संघर्ष को भी अच्छी तरह जानते हैं। खेल निश्चित तौर पर सफलता की स्थिति में दौलत और शोहरत देता है, लेकिन असफलता की स्थिति में गुमनामी के अलावा कुछ नहीं मिलता। खेल महंगा भी हो गया है।

ट्रेनिंग काफी महंगी हुई

क्रिकेट अकादमी हो या बैडमिंटन अकादमी या फिर किसी अन्य खेल से जुड़ा संस्थान, ट्रेनिंग काफी महंगी हो गई है। एक साधारण परिवेश का खिलाड़ी अकादमी में जाना अफोर्ड नहीं कर सकता है। अकादमी में ही अच्छे कोच हैं, ऐसे में बिना कोचिंग के खिलाड़ी की क्षमता और प्रतिभा निखर नहीं सकती। वहीं खेल के क्षेत्र में लंबे संघर्ष के बाद भी असफलता मिलने के बाद खिलाड़ियों के पास किसी दूसरे क्षेत्र में कुछ बड़ा करने का अवसर और क्षमता कम हो जाती है।

गोपीचंद के बयान को आज के परिवेश में सिरे से एकदम खारिज नहीं किया जा सकता, लेकिन ये भी उतना ही सच है कि अगर लगन हो और मेहनत करने की क्षमता हो, तो कोई भी लक्ष्य मुश्किल नहीं है। मौजूदा दौर में ही हमारे पास अलग-अलग खेलों से जुड़े कई उदाहरण मौजूद हैं।

1973 में हुआ था जन्म

पुलेला गोपीचंद की जिंदगी पर नजर डालें तो उनका जन्म 16 नवंबर 1973 को नागंदला, आंध्र प्रदेश में हुआ था। बचपन में पहले वह क्रिकेट खेलने में ज्यादा रुचि रखते थे, लेकिन अपने बड़े भाई की सलाह पर उन्होंने बैडमिंटन खेलना शुरू किया जो बाद में उनकी जिंदगी ही बन गया।

1996 में जीता था पहला नेशनल बैडमिंटन चैंपियनशिप

1996 में पुलेला गोपीचंद ने पहला राष्ट्रीय बैडमिंटन चैंपियनशिप जीता और लगातार 5 बार ये खिताब अपने नाम किया। 1998 में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने टीम इवेंट में सिल्वर और सिंगल्स में कांस्य पदक जीता था। इस सफलता ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें लोकप्रिय बनाया। 2001 में उन्होंने ऑल इंग्लैंड ओपन बैडमिंटन चैंपियनशिप जीता। प्रकाश पादुकोण (1980) के बाद ये खिताब जीतने वाले ने दूसरे भारतीय बने। 2000 में एशियन चैंपियनशिप में भी उन्होंने कांस्य जीता था।

खेल से संन्यास के बाद एकेडमी की स्थापना की

खेल से संन्यास के बाद 2008 में गोपीचंद ने हैदराबाद में 'गोपीचंद बैडमिंटन एकेडमी' की स्थापना की। इस संस्थान की स्थापना का उद्देश्य ऐसे खिलाड़ी तैयार करना था जो ओलंपिक में देश के लिए मेडल जीत सकें। गोपीचंद इस उद्देश्य में सफल रहे हैं। उनकी एकेडमी से निकली साइना नेहवाल और पी. वी. सिंधु ने ओलंपिक में देश के लिए मेडल जीते।

साइना ने लंदन ओलंपिक में ब्रांज जीता, जबकि सिंधु ने रियो ओलंपिक में सिल्वर और टोक्यो ओलंपिक में ब्रांज जीता था। प्रणीत, पारुपल्ली कश्यप, श्रीकांत किदांबी, अरुंधति पेंटावने, गुरुसाई दत्त, और अरुण विष्णु जैसे खिलाड़ी भी गोपीचंद एकेडमी की उपज है।

गोपीचंद को इन पुरस्कारों से किया गया है सम्मानित

गोपीचंद की बतौर खिलाड़ी और कोच योगदान का भारत सरकार ने सम्मान किया है। उन्हें अर्जुन पुरस्कार (1999), मेजर ध्यानचंद खेल रत्न (2001), पद्मश्री (2005), द्रोणाचार्य अवॉर्ड (2009), पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है।

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