अमेरिका के मध्यावधि चुनाव ट्रंप के राष्ट्रपति पद का फैसला नहीं करेंगे, लेकिन उनके बाकी कार्यकाल की दिशा तय करेंगे।
इस बार प्रतिनिधि सभा की सभी 435 और सीनेट की 35 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं।
रिपब्लिकन पार्टी को दोनों सदनों में बढ़त है, जबकि डेमोक्रेट एक सदन में बहुमत पाने की कोशिश में हैं।
ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट के संकेतों से चुनाव की अहमियत बढ़ गई है।
US Midterm Elections and Trump Presidency: अमेरिका के मध्यावधि चुनावों के नतीजे भले ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कुर्सी का फैसला नहीं करेंगे, लेकिन यह जरूर तय करेंगे कि व्हाइट हाउस में बैठे इस ताकतवर राष्ट्रपति के अगले 2 साल कितने अधिकारपूर्ण, कितने चुनौतीपूर्ण और कितने राजनीतिक दचावों से घिरे हंगि। अमेरिकी मतदाताओं का फैसला ट्रंप के बचे हुए कार्यकाल की दिशा ही नहीं, उनके मिजाज और कामकाज के तौर-तरीकों को भी प्रभावित करेगा। अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव 4 साल के लिए होता है, जबकि कांग्रेस के दोनों सदनों, प्रतिनिधि सभा और सीनेट के सदस्यों का चुनाव अलग-अलग अवधि के लिए होता है।
राष्ट्रपति के कार्यकाल के बीच में होने वाले इन चुनावों को ही मध्यावधि चुनाव कहा जाता है। इस बार प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की 100 में से 35 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं। फिलहाल रिपब्लिकन पार्टी को दोनों सदनों में बढ़त हासिल है।
डेमोक्रेटिक पार्टी की कोशिश है कि वह कम से कम एक सदन में बहुमत हासिल करके ट्रंप प्रशासन के सामने राजनीतिक और विधायी चुनौतियां खड़ी करे। इन चुनावों की अहमियत इसलिए भी बढ़ गई है, क्योंकि ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट के संकेत मिल रहे हैं।
अक्टूबर के अंत में आए रॉयटर्स-इप्सोस सर्वेक्षण में उनकी स्वीकृति दर 32 प्रतिशत दर्ज की गई थी। मतदाताओं की सबसे बड़ी चिंता महंगाई, जीवनयापन की बढ़ती लागत, पेट्रोल और स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च रही है। आवजन नीति और ईरान के साथ युद्ध को लेकर भी अमेरिकी समाज में असंतोष के संकेत मिले हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी को चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में बढ़त दिखाई दे रही है, लेकिन सीनेट का मुकाचला अपेक्षाकृत कठिन माना जा रहा है। लिहाजा वास्तविक तस्वीर तो मतगणना के बाद ही साफ होगी।
यदि डेमोक्रेटिक पार्टी प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल कर लेती है, तो ट्रंप के लिए अपने फैसलों को मनमाने ढंग से आगे बढ़ाना आसान नहीं रह जाएगा। प्रतिनिधि सभा की समितियों, बजट संबंधी प्रक्रियाओं और प्रशासनिक जांचों पर डेमोक्रेट्स का नियंत्रण होगा। ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों को संसदीय सुनवाई और सवालों का सामना करना पड़ सकता है। उनके फैसलों की जांच, सरकारी खर्च पर निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही की मांग अधिक मुखर होगी। यदि डेमोक्रेट्स सीनेट में भी बढ़त बना लेते हैं, तो राष्ट्रपति की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ सकती हैं।
महत्वपूर्ण नियुक्तियों, राजनयिक पदों और न्यायिक नियुक्तियों पर सहमति बनाना कठिन हो सकता है। हालांकि कांग्रेस में बहुमत बदलने से राष्ट्रपति की कार्यकारी शक्तियां समाप्त नहीं हो जातीं। ट्रंप के पास वीटो का अधिकार तब भी रहेगा और विदेश नीति, टैरिफ तथा आव्रजन जैसे कई मामलों में उनके पास व्यापक कार्यकारी अधिकार भी बने रहेंगे। इसका अर्थ यह है कि डेमोक्रेटिक बहुमत ट्रंप की नीतियों पर अंकुश लगाने की कोशिश तो करेगा, लेकिन राष्ट्रपति और कांग्रेस के बीच टकराव भी बढ़ सकता है। बजट, सरकारी खर्च और कर्ज की सीमा जैसे मुद्दों पर 2027 में राजनीतिक गतिरोध की आशंका भी है।
यह चुनाव डोनाल्ड ट्रंप के राजनीतिक व्यवहार की भी परीक्षा है। उनकी पहचान एक ऐसे राष्ट्रपति की रही है, जो आलोचना का जवाब तीखे अंदाज में देते हैं, विरोधियों को निशाने पर लेते हैं और अपनी नीतियों पर सवाल उठाने वालों के प्रति उदार नहीं दिखते। चुनाव में इझटका लगने की स्थिति में उनके सामने यही रास्ता होगा की वे जनता के संदेश को समझकर अपनी प्राथमिकताओं में बदलाव करें, महंगाई और रोजगार जैसे घरेलू मुद्दों पर अधिक ध्यान दें तथा सहयोगी दलों और विपक्ष के साथ संवाद बढ़ाएं।
अमेरिकी मतदाता अक्रस राष्ट्रपति के कामकाज पर बीच कार्यकाल में अपनी राय जाहिर करते हैं। इसलिए इसे ट्रंप के पूरे राजनीतिक एजेंडे पर जनमत संग्रह कहना भी उचित नहीं होगा, फिर भी परिणाम उनके राजनीतिक आत्मविश्वास और अगले 2 वर्षों की रणनीति को प्रभावित करेंगे, एक और दिलचस्प पहलू है।
ट्रंप का यह दूसरा और अंतिम राष्ट्रपति कार्यकाल है। उनके सामने दोबारा राष्ट्रपति चुनाव लड़ने का सामान्य संवैधानिक विकल्प नहीं है। ऐसे में यदि कांग्रेस में उनकी पार्टी कमजोर पड़ती है, तो वे अपनी राजनीतिक विरासत को बचाने के लिए और अधिक आक्रामक हो सकते हैं।
लेख- अनिता राठौर के द्वारा