Revanth Reddy Rahul Gandhi Remark: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, भावना बड़ी है या तर्क? दोनों में है क्या फर्क ?'
हमने कहा, 'भावना, आस्था और श्रद्धा मन से उपजती हैं जबकि तर्क दिमाग की पैदावार है। तर्क या आर्गमेंट करना वकीलों का काम है? अदालत में जिरह की जाती है, जो कि तर्क पर आधारित बहस होती है। वाद-विवाद प्रतियोगिताओं से लेकर विधानमंडल व संसद में तरह-तरह के तर्क दिए जाते हैं। जो ठीक से तर्क नहीं कर पाता उसका बेड़ा गर्क हो जाता है। तर्क है तभी तो तर्कशास्त्र या लॉजिक है। प्राचीन भारत में विद्वान अपने-अपने तर्क के साथ एक-दूसरे से जमकर शास्त्रार्थ किया करते थे।'
पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, जहां तक भावना की बात है, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने एक कार्यक्रम में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को प्रभु राम बताया। पता नहीं लोगों को यह बेतुकी बात कैसे हजम हुई? यह तो चमचागिरी की हद हो गई।'
हमने कहा, 'कहते हैं जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी ! हर प्राणी में ईश्वर का अंश होता है। रेवंत रेड्डी को राहुल गांधी में भगवान राम नजर आए। सच्चे भक्त को कण-कण में भगवान नजर आते हैं। मन में इमोशन जागी तो रेवंत रेड्डी ने अपनी कल्पना की उड़ान में राहुल को राम के रूप में देख लिया। कहते हैं- मन चंगा तो कठौती में गंगा!'
पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, अब राहुल गांधी को चाहिए कि अपने परम भक्त रेवंत रेड्डी की भावना का ध्यान रखते हुए रामलीला के पात्र जैसा राम का मेकअप कर लें और धनुष-बाण लेकर उन्हें दर्शन देने चले जाएं। राहुल गांधी चाहें तो रामानंद सागर के सीरियल में राम की भूमिका निभा चुके अरुण गोविल से राम जैसा बनने की टिप्स ले सकते हैं।'
हमने कहा, 'राजनीति में पहले भी ऐसी श्रद्धा उपजती रही है। समाजवादी नेता राजनारायण ने चौधरी चरणसिंह को राम और खुद को उनका हनुमान बताया था। राजनीति में व्यक्ति पूजा करने वाले अंधभक्त पहले भी रहे हैं और आज भी हैं। वह किसी भी पार्टी में हो सकते हैं। मतलब के लिए इसी तरह चापलूसी की जाती है। ये पब्लिक है, सब जानती है!'
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा