Election Commission BJP Fund Report: असम, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी, केरल और तमिलनाडु के विधानसभा चुनावों में बीजेपी को कांग्रेस से सात गुना ज्यादा चंदा मिला। 15 मार्च से 4 मई के बीच भाजपा को चंदे के रूप में कुल 1,472.8 करोड़ रुपये मिले, जबकि कांग्रेस को केवल 207.17 करोड़ रुपये ही मिले। चुनाव आयोग ने बुधवार को ये आंकड़े जारी किए।
केरल और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी के खर्च का अभी खुलासा नहीं हुआ है। चुनाव आयोग के मुताबिक, बीजेपी ने असम में सबसे ज्यादा 96 करोड़ रुपये खर्च किए। पार्टी ने वहां 82 सीटें जीतीं, जो 2021 के विधानसभा चुनावों में जीती गई सीटों से 22 ज्यादा हैं।
एनडीए ने असम, बंगाल और पुडुचेरी में सरकार बनाई। केरल में इंडिया अलायंस की सरकार बनी, जबकि तमिलनाडु में थलापति विजय की नेतृत्व वाली टीवीके और कांग्रेस को सरकार बनाने का मौका मिला।
पांच राज्य में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान भारतीय जनता पार्टी के फंड में 904.6 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई। 15 मार्च को पार्टी के पास 6,722.6 करोड़ रुपये थे, जो 6 मई तक बढ़कर 7,627.2 करोड़ रुपये हो गए। इस बीच, कांग्रेस पार्टी के चुनाव फंड में 658.6 मिलियन की कमी आई।
चुनाव के समय की शुरुआत में पार्टी के पास लगभग 169.06 मिलियन थे। इसमें 22 करोड़ से अधिक कैश और 14.61 करोड़ रुपये बैंक अकाउंट में थे। 6 मई तक, यह रकम घटकर लगभग 10.32 करोड़ रुपये रह गई।
बीजेपी ने असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी में लगभग 159.7 करोड़ रुपये खर्च किए। इसमें से करीब 130.4 करोड़ रुपये पार्टी के चुनावी अभियान पर खर्च हुए, जबकि बाकी उम्मीदवारों और उससे जुड़े कामों के लिए खर्च हुए। असम में भाजपा ने सबसे ज्यादा 96.27 करोड़ रुपये खर्च किए। इसमें पार्टी के चुनाव प्रचार पर 76.73 करोड़ रुपये और उम्मीदवारों पर 19.54 करोड़ रुपये शामिल थे।
कांग्रेस ने पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान पार्टी के प्रचार में कुल 143 करोड़ रुपये और उम्मीदवारों पर 105.55 करोड़ रुपये खर्च किए, जिससे उसका कुल चुनाव खर्च 248.55 करोड़ रुपये हो गया। कांग्रेस के सेंट्रल हेडक्वार्टर ने पांच राज्यों में आम कैंपेन पर 40.52 करोड़ रुपये खर्च किए। राज्य और लोकल यूनिट्स ने इसी पर 102.49 करोड़ रुपये खर्च किए।
कांग्रेस ने चुनाव प्रचार पर सबसे ज्यादा खर्च केरल में किया, जो 59.28 करोड़ रुपये था। केरल में लेफ्ट फ्रंट को सत्ता से हटाने वाली कांग्रेस के बाद असम का नंबर था, जहां चुनाव प्रचार के लिए पार्टी ने कुल 22.62 करोड़ रुपये खर्च किए गए।