शनिदेव (सौ.Gemini) 
धर्म

Tel Chadhane Ke Niyam: शनिदेव को तेल चढ़ाते समय इन नियमों का करें पालन, तभी मिलेगा आशीष!

Tel Chadhane Ke Niyam vidhi: शनिदेव को तेल अर्पित करते समय कुछ विशेष नियमों का पालन करना बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। मान्यता है कि सही विधि के साथ की गई पूजा से शनिदेव प्रसन्न होते है।

सीमा कुमारी

Shanidev Ko Tel Chadhane Ke Niyam : इस वर्ष 2026, 16 मई को शनि जयंती का पर्व मनाया जा रहा है। यह जयंती हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में से एक है। भगवान सूर्य और छाया के पुत्र शनि देव का जन्म ज्येष्ठ माह की अमावस्या को हुआ था। इसलिए इस दिन को शनि जयंति के रूप में भी मनाया जाता है। इस साल शनि जयंति का पर्व शनिश्चरी अमावस्या के साथ पड़ा रहा है।

साढ़ेसाती या ढैय्या के कष्टों से मुक्ति

धर्म शास्त्रों में शनि जयंती का दिन शनि देव की कृपा पाने और साढ़ेसाती या ढैय्या के कष्टों को कम करने के लिए शुभ बताया गया है। इस दिन भक्त बड़ी संख्या में मंदिर जाकर शनि शिला पर सरसों का तेल चढ़ाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि गलत तरीके से चढ़ाया गया तेल फायदे की जगह आपके जीवन में संकट ला सकता है?

क्या है शनिदेव को तेल चढ़ाने का सही तरीका ?

  • गंदा या मिलावटी तेल न चढ़ाए

हिंदू शास्त्रों के अनुसार, शनिदेव को सस्ते या मिलावटी तेल नहीं चढ़ाना चाहिए। अक्सर लोग मंदिर के बाहर मिलने वाले सस्ते या मिलावटी तेल का उपयोग कर लेते हैं। बताया जाता है कि, शनिदेव को शुद्ध सरसों का तेल ही प्रिय है। अशुद्ध तेल चढ़ाना उनके अपमान के समान माना जाता है, जिससे आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है।

  • शनि देव की मूर्ति पर तेल न चढ़ाए

ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, शनि देव की मूर्ति पर सीधे तेल नहीं डालना चाहिए। तेल को किसी पात्र में अर्पित करना अधिक शुभ होता है। कई स्थानों पर शनि शिला या चरणों में तेल अर्पित करने की परंपरा भी होती हैं।

  • दिशा का रखें ध्यान

शनि देव को तेल हमेशा पश्चिम दिशा की ओर मुख करके चढ़ाना चाहिए। गलत दिशा में खड़े होकर पूजा करने से शुभ फल नहीं मिलता है।

  • लोहे के बर्तन करें इस्तेमाल

कहते हैं कि, शनिदेव को तेल चढ़ाते समय तांबे के बर्तन का उपयोग करने से बचना चाहिए। आप लोहे, मिट्टी या स्टील के पात्र में तेल अर्पित कर सकते हैं।

  • सरसों के तेल का दीपक जलाए

शनि जयंती के दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना भी बेहद फलदायी माना गया है। मान्यता है कि, इससे शनि दोष शांत होने लगते हैं और साढ़ेसाती का प्रभाव कम होता है।

कैसे प्राप्त करें शनि देव की कृपा?

अगर आप चाहते हैं कि शनि जयंती पर आपकी पूजा सफल हो, तो तेल अर्पित करने से पहले उसमें अपना चेहरा देखें। इसे छाया दान कहा जाता है। ऐसा करने से आपकी शारीरिक और मानसिक परेशानियां शनि देव के चरणों में चली जाती हैं। साथ ही शुभ फलों की प्राप्ति होती है।

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