July Monthly Transit: 19 जुलाई से 26 जुलाई 2026 का सप्ताह ज्योतिषीय दृष्टि से कई महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आ रहा है। इस दौरान सूर्य पुष्य नक्षत्र में प्रवेश करेंगे, बुध अपनी वक्री अवस्था समाप्त कर मार्गी होंगे और देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास का शुभारंभ होगा। इन ग्रह परिवर्तनों का प्रभाव व्यापार, शिक्षा, संचार, धार्मिक कार्यों और सामाजिक जीवन पर विशेष रूप से देखने को मिलेगा।
20 जुलाई को सूर्य पुष्य नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। ज्योतिष में पुष्य नक्षत्र को अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है। इस अवधि में धार्मिक कार्य, दान-पुण्य, नए कार्यों की योजना और आध्यात्मिक साधना के लिए अनुकूल समय रहेगा। प्रशासनिक और सरकारी क्षेत्रों से जुड़े लोगों के लिए भी यह परिवर्तन सकारात्मक संकेत दे सकता है।
24 जुलाई को बुध मिथुन राशि में मार्गी हो जाएंगे। पिछले कुछ समय से वक्री बुध के कारण जिन कार्यों में रुकावट, भ्रम या विलंब की स्थिति बन रही थी, उनमें अब धीरे-धीरे सुधार देखने को मिलेगा। व्यापार, शिक्षा, संचार, लेखन, तकनीकी क्षेत्र, दस्तावेजी कार्य और निवेश संबंधी मामलों में गति आने के संकेत हैं। लंबित योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए यह समय अनुकूल माना जाएगा।
25 जुलाई को देवशयनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और इसी के साथ चातुर्मास का शुभारंभ होता है। धार्मिक दृष्टि से यह अवधि पूजा-पाठ, व्रत, जप-तप और आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष महत्व रखती है। विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों पर भी चातुर्मास के दौरान विराम लग जाता है।
21 जुलाई - विवस्वत पूजा, ताप्ती जयंती
22 जुलाई - भड़ली नवमी, गुप्त नवरात्रि नवमी
24 जुलाई - आषाढ़ दशमी, बुध मार्गी
25 जुलाई - देवशयनी एकादशी, चातुर्मास प्रारंभ
26 जुलाई - वासुदेव द्वादशी
इस सप्ताह सूर्य कर्क राशि में, मंगल वृषभ राशि में, गुरु कर्क राशि में, शुक्र सिंह राशि में, शनि मीन राशि में, राहु कुंभ राशि में तथा केतु सिंह राशि में रहेंगे। बुध 24 जुलाई तक मिथुन राशि में वक्री रहकर उसी दिन मार्गी होंगे।
सप्ताह के दौरान सूर्य के पुष्य नक्षत्र में प्रवेश से धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों में वृद्धि के योग बनेंगे। बुध के मार्गी होने से रुके हुए कार्यों में गति आएगी और निर्णय लेने की क्षमता बेहतर होगी। व्यापार, नौकरी, शिक्षा और निवेश से जुड़े लोगों के लिए सप्ताह का उत्तरार्ध अपेक्षाकृत अधिक अनुकूल रहने की संभावना है। वहीं देवशयनी एकादशी के साथ आध्यात्मिक और धार्मिक गतिविधियों का महत्व भी बढ़ेगा।