मां चंद्रघंटा से जुड़ा है यह चमत्कारी पौधा।
धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ आयुर्वेद के फायदे भी जानिए।
आपकी सेहत के लिए वरदान हैं हलीम के बीज।
ऐसी महिलाओं के लिए बनाए जाते हैं हलीम के लड्डू।
Haleem Seeds Health Benefits and Uses: नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। पूजा के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना का विधान है, जिन्हें साहस, शांति और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ आयुर्वेद में भी नवरात्र के नौ दिनों का विशेष स्थान है।
पारंपरिक आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा का सीधा संबंध 'चन्द्रसूर' (हलीम) नामक औषधीय पौधे से जोड़ा जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम लेपिडियम सैटिवम है। इसे अलीव या गार्डन क्रेस भी कहते हैं।
हलीम एक बेहद गुणकारी औषधीय पौधा माना जाता है। इसके छोटे लाल रंग के बीज पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों ही इसके स्वास्थ्य लाभों को बहुत महत्वपूर्ण मानते हैं।
आयुर्वेद में चन्द्रसूर को शरीर के लिए पौष्टिक और बलवर्धक बताया गया है। पारंपरिक रूप से इसका उपयोग शरीर को पोषण देने और विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं को दूर करने वाली प्राकृतिक औषधि के रूप में किया जाता रहा है। आयुर्वेदिक ग्रंथों में भी इसके अनेक चमत्कारी गुणों का स्पष्ट उल्लेख मिलता है।
चन्द्रसूर में कैल्शियम, आयरन, फास्फोरस, विटामिन K और प्रोटीन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यह हड्डियों को मजबूती देने, जोड़ों के दर्द और वात संबंधी विकारों को दूर करने में अत्यंत सहायक है। वृद्धावस्था में हड्डियों की कमजोरी और गठिया जैसी दिक्कतों में इसका सेवन लाभकारी माना जाता है। इसके अलावा, यह शरीर की कमजोरी को दूर कर तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है। बढ़ती उम्र के किशोरों में इसके सेवन से शारीरिक विकास और लंबाई बढ़ाने में मदद मिलती है, जिससे स्फूर्ति बनी रहती है।
हलीम के बीज आयरन और फोलिक एसिड का बेहतरीन शाकाहारी स्रोत हैं। इसके नियमित सेवन से शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर तेजी से बढ़ता है, जिससे थकान और एनीमिया जैसी समस्याओं से राहत मिलती है।
इसमें मौजूद फाइटोएस्ट्रोजन महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन की तरह काम करते हैं, जिससे अनियमित पीरियड्स और पीसीओडी की समस्या दूर होती है। प्रसव के बाद महिलाओं को पारंपरिक रूप से इसके लड्डू या खीर दी जाती है, क्योंकि यह नई माताओं में दूध के उत्पादन को बढ़ाने में मदद करता है।
इन बीजों में फाइबर की उच्च मात्रा होती है, जो पाचन क्रिया को सुधारकर कब्ज, पेट के कीड़े, अपच और गैस की समस्या को दूर रखता है। पानी में भिगोकर खाने से पेट लंबे समय तक भरा महसूस होता है, जिससे वजन घटाने में सहायता मिलती है।
इसमें मौजूद विटामिन A, C, E, जिंक और एंटीऑक्सीडेंट्स बालों के झड़ने की समस्या को कम करते हैं और त्वचा में प्राकृतिक निखार लाते हैं। इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण गठिया, पीठ दर्द और जोड़ों की सूजन में राहत प्रदान करते हैं।
हलीम के बीजों को इस्तेमाल से पहले कम से कम 2 से 3 घंटे या रातभर पानी, नारियल पानी या दूध में भिगोना चाहिए। भिगोने से ये फूलकर जेल जैसे बन जाते हैं और आसानी से पचते हैं। एक दिन में आधा से एक छोटा चम्मच (3-5 ग्राम) हलीम के बीज पर्याप्त होते हैं, जिन्हें हफ्ते में 3-4 बार ही लेना चाहिए।
ध्यान रखें कि इनकी तासीर गर्म होती है, इसलिए गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। किसी भी बीमारी या थायराइड के मरीज को डॉक्टर की सलाह से ही इसका उपयोग करना चाहिए।