शिव शंकर को जिसने पूजा उसका ही उद्धार हुआ। सावन महीने शिवपूजन का विशेष महत्व है। भगवान शिव को भोलेनाथ कहा जाता है, क्योंकि वे एक लोटा जल चढ़ाने से ही प्रसन्न हो जाते हैं और अपने भक्तों की सभी मनोकामना को पूरी करते हैं।
और ऐसा कहा जाता है कि इस समय भगवान शिव और पार्वती की पूजा करने से हर इच्छा पूरी होती है। इसलिए हर कोई अपने आराध्य को प्रसन्न करने के लिए विभिन्न तरह से पूजा करता है काफी लोग हर सोमवार को उपवास भी करते हैं। मान्यता है कि रुद्राभिषेक करने से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं। भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए उनके भक्त फल, फूल, दूध, दही और बेल पत्र चढ़ाते हैं।
इसके अलावा, भगवान को पंचामृत (Panchamrit) भी चढ़ाया जाता है, जिसे बाद में भक्तों को प्रसाद के रूप में दिया जाता है। पंचामृत को अधिकांश हिंदू पूजा में एक महत्वपूर्ण प्रसाद के रूप में बनाया जाता है। साथ ही, इसे देवताओं को प्रसन्न करने वाला भी माना जाता है। यह पांच चीजों से मिलकर बनता है, इसलिए इसका नाम पंचामृत हैं। इसे एक स्वस्थ पेय माना जाता है, जो शरीर को शुद्ध करता है। पंचामृत को चरणामृत भी कहा जाता है।
ज्योतिषियों का मानना है कि, सावन माह में पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करने से काम, क्रोध, मोह, अहंकार और लोभ जैसे विकारों से मुक्ति मिलती है। आइए जानें सावन के महीने में ही भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करने का क्या महत्व है।
जैसा कि, आप जानते हैं कि पंचामृत दूध, दही, शक्कर जैसी सफेद वस्तुओं से मिलकर बनता है, जो कि चंद्रमा का प्रतिनिधित्व करती है। जब चंद्र प्रधान चीजों से शिवलिंग को स्नान कराया जाता है, तो व्यक्ति के अंदर की नकारात्मक ऊर्जा खत्म होने लगती है।
पंचामृत में इस्तेमाल होने वाली चीजों से शुभ ऊर्जा निकलती है। इसलिए सावन मास में शिव आराधना में रुद्राभिषेक का सर्वाधिक महत्व माना जाता है। इस दिन जो लोग सच्चे मन से शिव की आराधना करते हैं, उन पर शिव की कृपा बरसती हैं।
सावन में भगवान शिव को पंचामृत स्नान कराने का विशेष महत्व हैं। सबसे पहले शिवलिंग पर जल अर्पण करें और उसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर चढ़ाएं।
शास्त्रों के अनुसार, सावन मास में पंचामृत से शिवजी को स्नान कराने से मनुष्य की सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। शिव पर पंचामृत अर्पित करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है और सारे समस्याओं से मुक्ति मिलती है।