जगन्नाथ रथ (फोटो.सोशल मीडिया)  
धर्म

Jagannath Rath Yatra: जब मां लक्ष्मी तोड़ देती है प्रभु जगन्नाथ का रथ, जानिए इस अनोखी परंपरा के पीछे की कहानी

Jagannath Rath Yatra: जगन्नाथ रथ यात्रा का आरंभ 16 जुलाई यानी आज होने जा रहा है। जगन्नाथ रथ यात्रा के बाद भी कई परंपराएं निभाई जाती हैं। इसी में से एक है- हेरा पंचमी। क्या है ये नियम।

रीता राय सागर

Jagannath Rath Yatra 2026 story: जगन्नाथ रथ यात्रा केवल भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की गुंडिचा मंदिर जाने की भव्य यात्रा नहीं है, बल्कि इससे उनके लाखों भक्तों की आस्था जुड़ी हुई है। साथ ही इससे कई ऐसी परंपराएं भी जुड़ी हैं जो श्रद्धालुओं को भावुक कर देती हैं। इन्हीं में से एक है हेरा पंचमी का नियम।

हेरा पंचमी के दिन मां लक्ष्मी भगवान जगन्नाथ से रूष्ट हो जाती हैं और नाराज होकर वो प्रभु जगन्नाथ के रथ नंदीघोष के एक हिस्से को तुड़वा देती हैं। यह परंपरा अजीब लग सकती है, लेकिन यह प्रभु जगन्नाथ और माता लक्ष्मी के प्रेम, विरह और वैवाहिक जीवन के पीछे छुपे सुंदर संदेश को दर्शाते हैं।

किस वजह से नाराज होती हैं मां लक्ष्मी

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा के स्नान पर्व के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा कुछ दिनों तक 'अनसर' यानी विश्राम में रहते हैं। इसके बाद वे नौ दिनों की रथ यात्रा पर गुंडिचा मंदिर के लिए निकलते हैं। लेकिन इस यात्रा पर प्रभु अपने भाई बलभद्र औऱ बहन सुभद्रा के साथ जाते हैं और माता लक्ष्मी को अपने साथ नहीं ले जाते हैं और उन्हें बिना बताए ही प्रस्थान कर जाते हैं। यह बात माता लक्ष्मी को अच्छी नहीं लगती हैं और इसी कारण से माता रूष्ट हो जाती हैं।

हेरा पंचमी की परंपरा

रथ यात्रा के पांचवें दिन हेरा पंचमी मनाई जाती है। इस अवसर पर मां लक्ष्मी को भव्य पालकी में श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर ले जाया जाता है। परंपरा के अनुसार वे भगवान जगन्नाथ से मिलने पहुंचती हैं, लेकिन इस दौरान उन्हें पूरा सम्मान और समय नहीं मिल पाता है। कहा जाता है कि भगवान की ओर से उन्हें 'आज्ञामाला' दी जाती है, लेकिन इसके बाद मंदिर का द्वार बंद हो जाता है। इससे मां लक्ष्मी क्रोधित हो जाती हैं।

क्यों तुड़वाया जाता है भगवान जगन्नाथ का रथ?

गुंडिचा मंदिर से लौटते समय मां लक्ष्मी अपने सेवकों को भगवान जगन्नाथ के रथ का एक छोटा हिस्सा तोड़ने का आदेश देती हैं। यह किसी दंड, अपमान या बदले की भावना से नहीं किया जाता है बल्कि यह अपने पति के प्रेम और उनसे नाराज होने और फिर मान-मनुहार कराने का प्रतीक माना जाता है।

बाद में मां लक्ष्मी को होता है पश्चाताप

रथ के एक हिस्से को क्षति पहुंचाने के बाद मां लक्ष्मी को अपने दुर्व्यवहार का भान होता है। इसलिए वे किसी अन्य रास्ते से चुपचाप श्रीमंदिर लौट जाती हैं। यह परंपरा इस बात का भी प्रतीक है कि रिश्तों में नाराजगी के साथ प्रेम और अपनापन भी बना रहता है।

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