Yavatmal Umarkhed ZP School Neglect News: यवतमाल जिले में उमरखेड़ तहसील के जिला परिषद स्कूलों में आवश्यक सुविधाओं और मरम्मत कार्यों के लिए 15वें केंद्रीय वित्त आयोग की निधि का उपयोग करने के निर्देश हैं।
इसके बावजूद कई ग्राम पंचायतों में इन निर्देशों पर प्रभावी अमल नहीं होने की शिकायत है। स्कूल भवन, शौचालय, पेयजल, बिजली, CCTV और सुरक्षा दीवार जैसे कार्यों के लिए निधि का उपयोग किया जा सकता है।
यवतमाल जिले में उमरखेड़, सं. जिला परिषद के प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने और मरम्मत कार्यों के लिए 15वें केंद्रीय वित्त आयोग की निधि का उपयोग करने के निर्देश शासन की ओर से दिए गए हैं। इसके बावजूद पंचायत समिति के अंतर्गत आने वाली अधिकांश ग्राम पंचायतों में इन निर्देशों पर अपेक्षित अमल नहीं होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इसके चलते कई जिला परिषद स्कूलों की स्थिति खराब होने की बात कही जा रही है।
शासन निर्णय के अनुसार 15वें वित्त आयोग की बंधित निधि से स्वच्छता, शौचालय और पेयजल जैसी सुविधाओं पर खर्च किया जा सकता है। वहीं अबद्ध निधि से स्कूल भवन की मरम्मत, बिजली उपकरण, CCTV कैमरे, अग्निशमन व्यवस्था और सुरक्षा दीवार जैसे कार्य किए जा सकते हैं।
ग्राम पंचायतों को जिला परिषद स्कूलों की आवश्यकताओं को प्राथमिकता देते हुए उपलब्ध निधि का उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।
जिला परिषद स्कूलों में इमारत की मरम्मत, कक्षाओं की दुरुस्ती, शौचालय निर्माण एवं मरम्मत, बिजली व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल और पानी की टंकियों की सफाई जैसे कार्यों की आवश्यकता बताई जा रही है। इसके अलावा सुरक्षा के लिए CCTV कैमरे, अग्निशमन उपकरण और सुरक्षा दीवार जैसे काम भी किए जा सकते हैं।
ग्राम पंचायत अधिकारी संगठन के अध्यक्ष बालाजी वानखेडे के अनुसार, शासन के निर्देशों के तहत जिला परिषद स्कूलों में सुविधाएं उपलब्ध कराने का काम शुरू है। गर्दी ग्राम पंचायत के अंतर्गत स्कूल में सौर ऊर्जा मोटर, शौचालय निर्माण और रंग-रोगन जैसे कार्य किए गए हैं। 15वें वित्त आयोग के आराखड़े के अनुसार अन्य कार्य भी जारी हैं। उन्होंने बताया कि 16वें वित्त आयोग में भी 25 प्रतिशत निधि का प्रावधान किया गया है।
जिला परिषद स्कूलों के शौचालयों की सफाई ग्राम पंचायत कर्मचारियों के माध्यम से कराने के निर्देश भी दिए गए थे। हालांकि उमरखेड़ तहसील की कई ग्राम पंचायतों में इन आदेशों का पालन नहीं होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
स्कूलों में विद्यार्थियों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए वित्त आयोग की निधि का नियमानुसार और प्राथमिकता के आधार पर उपयोग करने की आवश्यकता बताई जा रही है। स्थानीय स्तर पर स्कूलों की वास्तविक जरूरतों के अनुसार कार्य किए जाने से विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध हो सकता है।