Manans Agro Controversy: तीन साल से अपने ही खेत की जमीन पर हक के लिए दर-दर भटक रहे मिलमिले परिवार के संघर्ष ने आखिरकार बड़ा मोड़ ले लिया। वडगांव (टीप) स्थित 'मननस एग्रो' कंपनी के खिलाफ तहसील कार्यालय के सामने शुरू हुआ सुवर्णा विजय मिलमिले और उनकी बेटी प्रिया मिलमिले का आमरण अनशन महज दो दिनों में प्रशासन को हस्तक्षेप के लिए मजबूर कर गया।
मनसे नेता राजू उंबरकर की आक्रामक मध्यस्थता के बाद कंपनी और तहसील प्रशासन ने लिखित आश्वासन दिया, जिसके बाद मां-बेटी ने अपना अनशन वापस ले लिया। मिलमिले परिवार के अनुसार, करीब तीन वर्ष पूर्व उनके खेत की विधिवत नापजोख कराई गई थी। नापजोख के दौरान कथित तौर पर यह सामने आया कि पड़ोस में स्थित 'मननस एग्रो' कंपनी के कब्जे में उनकी 0.04 हेक्टेयर यानी 4 आर जमीन चली गई है।
इसके बाद से परिवार अपने हक की जमीन वापस पाने के लिए लगातार प्रशासन और कंपनी के चक्कर काट रहा था। बार-बार प्रयास के बावजूद मामला हल नहीं होने से परिवार का धैर्य आखिरकार टूट गया। न्याय की मांग को लेकर सुवर्णा मिलमिले और उनकी बेटी प्रिया मिलमिले ने 2 अक्टूबर को वणी तहसील कार्यालय के सामने आमरण अनशन शुरू कर दिया।
आंदोलन की जानकारी मिलते ही मनसे नेता राजू उंबरकर उपोषण स्थल पर पहुंचे। उन्होंने मिलमिले परिवार से पूरे मामले की जानकारी ली और इसके बाद सीधे 'मननस एग्रो' कंपनी के मालिक तथा वणी तहसीलदार से चर्चा की। मामला केवल आश्वासनों तक सीमित न रहे, इसके लिए उन्होंने तत्काल बैठक आयोजित कराकर समाधान निकालने पर जोर दिया।
लंबे समय से जमीन के लिए संघर्ष कर रहे मिलमिले परिवार के लिए यह फैसला बड़ी राहत माना जा रहा है। परिवार ने न्याय की लड़ाई में साथ देने और मध्यस्थता कर समाधान तक पहुंचाने के लिए राजू उंबरकर, फाल्गुन गौहोकार और उपस्थित मनसे पदाधिकारियों का आभार व्यक्त किया। अब सभी की नजर जमीन के प्रत्यक्ष कब्जे और प्रशासनिक कार्रवाई पर है।