यवतमाल कांग्रेस संगठन (सोर्सः सोशल मीडिया)
यवतमाल

यवतमाल में खुद को पुनर्स्थापित करने में जुटी कांग्रेस, युवा कार्यकर्ताओं के सहारे पुराने गढ़ में करेगी वापसी

Yavatmal Congress Strategy: यवतमाल में विधान परिषद चुनाव के झटके के बाद कांग्रेस ने संगठन में बदलाव करते हुए नई राजनीतिक रणनीति पर काम शुरू कर दिया है।

आंचल लोखंडे

Yavatmal Lok Sabha Election: विधान परिषद की यवतमाल सीट के चुनाव में ऐन वक्त पर उम्मीदवार की वापसी और पार्टी के भीतर हुई बगावत से कांग्रेस के नए जिला नेतृत्व को बड़ा झटका लगा था। अब इस झटके से उबरते हुए कांग्रेस जिले में संगठनात्मक बदलाव और नई राजनीतिक रणनीति के जरिए कभी अपने गढ़ रहे लोकसभा क्षेत्र को दोबारा हासिल करने की तैयारी में जुटी है।

कुछ महीने पहले एड, सचिन नाईक को कांग्रेस का जिला अध्यक्ष बनाया गया था। शुरुआत में ही विधान परिषद चुनाव की घटना से पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा, लेकिन इससे सबक लेते हुए पिछले महीने उन्होंने नई जिला कार्यकारिणी की घोषणा की। इस कार्यकारिणी में पुराने और निष्क्रय चेहरों को हटाकर युवा, आक्रामक और संगठनात्मक अनुभव रखने वाले कार्यकर्ताओं को मौका देने का प्रयास किया गया है। कांग्रेस में अब भाजपा की तर्ज पर राजनीतिक परिवारों की बजाय सक्रिय कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देने की सोच दिखाई दे रही है।

कार्यकर्ताओं की मजबूत टीम तैयार

पार्टी सूत्रों के अनुसार, नया नेतृत्व आम कार्यकर्ताओं की राय और भूमिका को समझने का प्रयास कर रहा है। पूर्व मंत्री या पूर्व विधायक होने के आधार पर केवल पुराने राजनीतिक प्रभाव पर निर्भर रहने की बजाय जमीन पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं की मजबूत टीम तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि, पुराने नेताओं के अनुभव को पूरी तरह नजरअंदाज करना भी कांग्रेस के लिए आसान नहीं होगा। क्योंकि पार्टी के अंदर ही विरोध और अंदरूनी मतभेद की घटनाओं के कई अनुभव नेतृत्व के सामने हैं।

युवा संगठन के साथ जोड़ने की चुनौती

ऐसे में पुराने और नए नेतृत्व के बीच संतुलन बनाना कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है। कांग्रेस के सामने सहकार क्षेत्र में अपनी पकड़, ग्रामीण इलाकों में व्यक्तिगत संपर्क और पारंपरिक मतदाता आधार को युवा संगठन के साथ जोड़ने की चुनौती है। पुराने नेताओं के प्रशासनिक अनुभव और आम लोगों से जुड़ाव के साथ नई पीढ़ी के कार्यकर्ताओं की ऊर्जा को मिलाकर जिले में पार्टी को फिर से मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।

महायुति के खिलाफ पिछली रणनीति से अलग राह

पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा-शिंदे गुट की महायुति को रोकने के लिए कांग्रेस ने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट का समर्थन किया था। इसके चलते कांग्रेस का ग्रामीण क्षेत्र का पारंपरिक वोट बैंक सहयोगी दल के उम्मीदवार के पक्ष में गया था। अब बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों में कांग्रेस के स्वतंत्र रूप से चुनाव मैदान में उतरने की चर्चा तेज हो गई है।

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