PNB नकली नोट कांड: 17.29 करोड़ मामले में NIA की जांच तेज, मैनेजर की गिरफ्तारी के बाद नेटवर्क खंगाल रही एजेंसी

Saharanpur PNB Fake Currency Case: सहारनपुर PNB करेंसी चेस्ट के 17.29 करोड़ नकली नोट मामले में NIA ने जांच तेज कर दी है। मैनेजर की गिरफ्तारी के बाद केस डायरी, बैंक और कैश निकासी की पड़ताल होगी।
Saharanpur PNB Manager Arrest Fake Currency Case
सहारनपुर PNB में फर्जी नोटों के मामले में आरोपी मैनेजर गिरफ्तार सोर्स-सोशल मीडिया
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PNB Manager Amit Arrest Fake Notes Case: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की करेंसी चेस्ट से जुड़े 17.29 करोड़ रुपये के नकली नोट कांड की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। बैंक मैनेजर की गिरफ्तारी के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने स्थानीय पुलिस की पूरी केस डायरी अपने कब्जे में लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

अधिकारियों के मुताबिक, अगले दो दिनों में सहारनपुर पुलिस जांच से जुड़े सभी दस्तावेज, बयान, बरामदगी और साक्ष्य NIA को सौंप देगी। एजेंसी का फोकस अब यह पता लगाने पर है कि नकली नोटों का नेटवर्क कितना बड़ा था, क्या इसके पीछे कोई संगठित गिरोह सक्रिय था और बैंक से निकली बड़ी नकदी किन खातों तक पहुंची। इसके लिए संदिग्ध खातों, सीसीटीवी फुटेज और बैंकिंग लेन-देन की गहन जांच की जाएगी।

करेंसी चेस्ट में नकली नोट मिलने से मचा था हड़कंप

पंजाब नेशनल बैंक के करेंसी चेस्ट में बड़ी मात्रा में नकली नोट मिलने के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया था। शुरुआती जांच स्थानीय पुलिस ने की और डीआईजी अभिषेक सिंह के निर्देश पर एसएसपी अभिनंदन ने सात सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। जांच में क्राइम ब्रांच को भी शामिल किया गया था।

NIA की एंट्री के बाद तेज हुई कार्रवाई

SIT ने जांच के दौरान दर्ज बयान, बरामदगी का विवरण, अन्य साक्ष्य और सामने आए तथ्यों को केस डायरी में शामिल किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने जांच अपने हाथ में ली।

NIA ने इस मामले में तत्कालीन बैंक मैनेजर अमित को गिरफ्तार किया, जबकि उनकी भूमिका सामने आने पर बैंक के तीन अन्य कर्मचारियों को भी निलंबित कर दिया गया।

नकली नोट नेटवर्क पर NIA का मुख्य फोकस

केस डायरी मिलने के बाद NIA के पास अब तक की पूरी जांच का रिकॉर्ड उपलब्ध होगा। एजेंसी इन तथ्यों का अपने निष्कर्षों से मिलान कर यह पता लगाएगी कि जांच में कौन-से नए सुराग सामने आते हैं और किन पहलुओं की दोबारा पड़ताल की जरूरत है।

संगठित गिरोह और संदिग्धों के नेटवर्क की जांच

NIA का मुख्य फोकस यह पता लगाने पर है कि नकली नोटों का नेटवर्क कितना बड़ा था और क्या इसके पीछे कोई संगठित गिरोह सक्रिय था।

संदिग्धों के आपसी संपर्क, गतिविधियां, वित्तीय लेन-देन और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। स्थानीय पुलिस और NIA की जांच में सामने आने वाली समानताएं व अंतर आगे की कार्रवाई तय करने में अहम माने जा रहे हैं।

बड़े कैश ट्रांजैक्शन और खातों की होगी जांच

बता दें कि जांच एजेंसियों का फोकस अब उन बैंक खातों पर भी हो सकता है, जिनसे बड़ी मात्रा में नकदी निकाली गई। इसके लिए संदिग्ध कैश ट्रांजैक्शन और निकासी के पैटर्न की विस्तार से पड़ताल की जाएगी।

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कारोबारियों के खातों पर भी नजर

घंटाघर स्थित सोफिया मार्केट में करेंसी चेस्ट से सटी पंजाब नेशनल बैंक शाखा में शहर के कई बड़े कारोबारियों के खाते संचालित होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में जांच एजेंसियां यह भी जांच सकती हैं कि बड़ी नकदी निकासी का नकली नोट मामले से कोई संबंध तो नहीं है।

बैंक रिकॉर्ड और CCTV फुटेज बनेंगे अहम सबूत

जांच एजेंसियां अब बड़ी रकम से जुड़े दस्तावेजों और संबंधित खातों के लेन-देन का मिलान कर रही हैं।

बैंक के CCTV फुटेज, कैश निकासी रिकॉर्ड, खातों के लेनदेन के स्टेटमेंट, चेक और अन्य बैंकिंग दस्तावेज जांच में अहम साक्ष्य माने जा रहे हैं। इनका करेंसी चेस्ट से जुड़े घटनाक्रम के साथ मिलान कर नकदी के आवागमन की कड़ियां जोड़ी जाएंगी।

बड़ी नकदी कहां गई, यही सबसे बड़ा सवाल

फिलहाल जांच का सबसे अहम सवाल यह भी है कि इतनी बड़ी मात्रा में निकाली गई नकदी आखिर कहां पहुंची और उससे जुड़े लोगों के बीच क्या संबंध थे।

हालांकि, केवल बैंक से बड़ी रकम निकालने के आधार पर किसी खाताधारक को संदिग्ध नहीं माना जाएगा। आगे की कार्रवाई जांच में मिलने वाले ठोस साक्ष्यों के आधार पर ही तय की जाएगी।

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