PM नरेंद्र मोदी (सोर्स: सोशल मीडिया) 
यवतमाल

PM सभा के खर्च पर मचा घमासान: क्या बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए थे सरकारी बिल? 13 करोड़ के खर्च पर सस्पेंस

PM Modi Yavatmal Rally Expense Dispute: यवतमाल में आयोजित पीएम मोदी की महिला सभा के खर्च में बड़ा अंतर। जिला प्रशासन की जांच में खर्च बढ़ाकर दिखाने का खुलासा। जानें 26 लाख के पानी के बिल का सच।

गोरक्ष पोफली

PM Modi Yavatmal Rally Expense News: फरवरी 2024 में लोकसभा चुनाव की आचार संहिता से ठीक पहले यवतमाल में प्रधानमंत्री मोदी की एक विशाल महिला सभा आयोजित की गई थी। इस भव्य कार्यक्रम के लिए प्रशासन ने कुल 27 करोड़ रुपये का खर्च दिखाया था। हालांकि, दो साल बीत जाने के बाद भी सरकार ने केवल 14 करोड़ रुपये की राशि ही मंजूर की है। शेष 13 करोड़ रुपये के भुगतान पर अभी भी तलवार लटकी हुई है, जिससे कई ठेकेदारों और संबंधित विभागों की नींद उड़ी हुई है।

टेंडर प्रक्रिया को दरकिनार करना पड़ा भारी

कार्यक्रम की तैयारी के लिए समय बहुत कम था, जिसके कारण सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) ने नियमित टेंडर प्रक्रिया अपनाने के बजाय सीधे नगर परिषद और जिला परिषद के माध्यम से काम करवाया। मंच निर्माण, विशाल पंडाल, वाहनों की व्यवस्था और वीआईपी सड़कों के निर्माण के जो बिल प्रस्तुत किए गए, उनमें भारी विसंगतियां पाई गईं। जब जिला प्रशासन ने इन बिलों की जांच शुरू की, तो पता चला कि कई कार्यों के दाम बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए हैं, जिसके चलते कुछ निविदाओं को रद्द करने के निर्देश दिए गए हैं।

पानी और होटलों के बिल देख अधिकारी हैरान

जांच के दौरान कुछ ऐसे बिल सामने आए हैं जिन्होंने अधिकारियों को भी चौंका दिया है। सभा के दौरान केवल पानी की आपूर्ति के लिए 26 लाख रुपये का बिल थमाया गया है। हेलीकॉप्टर दल और सुरक्षा टीम के ठहरने के लिए होटलों के जो बिल आए हैं, वे लाखों में हैं। इन खर्चों की वास्तविकता को लेकर अब राज्य सरकार से विशेष अनुमति लेने की बात कही जा रही है, क्योंकि यवतमाल जिला प्रशासन इन्हें वर्तमान नियमों के तहत पास करने में झिझक रहा है।

जिम्मेदारी का 'पासिंग द पार्सल' और वर्तमान स्थिति

शुरुआत में इस कार्यक्रम का खर्च जिला नियोजन समिति (DPC) से किया जाना था, लेकिन बाद में इसकी जिम्मेदारी ग्राम विकास विभाग को सौंप दी गई। विभाग बदलने और जांच बैठने के कारण भुगतान की प्रक्रिया बेहद जटिल हो गई है। जिला कलेक्टर विकास मीना ने पुष्टि की है कि अब तक प्राप्त 14 करोड़ रुपये संबंधित विभागों को भेज दिए गए हैं, लेकिन बाकी के 13 करोड़ रुपये कब और कैसे मिलेंगे, इस पर अब भी कोहरा (Clarity की कमी) छाया हुआ है।

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