प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया) 
वर्धा

वर्धा में 5 माह में 55 किसान आत्महत्या के शिकार, 24 परिवारों को ही मिली आर्थिक सहायता

Wardha District Farmer Suicide Cases: वर्धा जिले में जनवरी से मई 2026 तक मात्र पांच महीनों में 55 किसानों ने आत्महत्या की है। इनमें से 34 मामले सरकारी सहायता के लिए पात्र पाए गए हैं।

केतकी मोडक

Agricultural Debt Burden Farmers In Wardha: एक ओर विकास योजनाओं और किसान कल्याण की घोषणाओं का दौर जारी है, वहीं दूसरी ओर वर्धा जिले में किसानों की आत्महत्या का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। वर्ष 2026 के जनवरी से मई माह तक मात्र पांच महीनों में 55 किसानों द्वारा आत्महत्या किए जाने की चिंताजनक जानकारी सामने आई है। इनमें से 34 मामले सरकारी सहायता के लिए पात्र घोषित किए गए हैं, जबकि 21 मामलों को विभिन्न कारणों से अपात्र ठहराया गया है।

अब तक 24 आत्महत्या प्रभावित किसान परिवारों को शासन की ओर से आर्थिक सहायता प्रदान की जा चुकी है। वर्धा जिला कृषि प्रधान क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। आचार्य विनोबा भावे की भूदान आंदोलन की धरती आज भी किसानों की समस्याओं से जूझ रही है। लगातार फसल नुकसान, बढ़ती उत्पादन लागत, कृषि उपज को उचित मूल्य न मिलना, प्राकृतिक आपदाएं तथा कर्ज का बढ़ता बोझ किसानों को आर्थिक और मानसिक रूप से कमजोर कर रहा है।

आंकड़ों के अनुसार 1 जनवरी 2001 से 31 जनवरी 2025 तक जिले में कुल 2,687 किसानों ने आत्महत्या की। इनमें 1,361 मामले सहायता के लिए पात्र तथा 1,326 मामले अपात्र घोषित किए गए। इस अवधि में आत्महत्या प्रभावित परिवारों को कुल 13 करोड़ 61 लाख रुपये की आर्थिक सहायता वितरित की गई है।

कई परिवार सहायता से वंचित

गत वर्ष बेमौसम और वापसी के मानसून की बारिश से सोयाबीन की फसल को भारी नुकसान पहुंचा था। वहीं कपास पर गुलाबी बोंड इल्ली के प्रकोप से उत्पादन में गिरावट आई। इसके चलते अनेक किसानों को खेती में लगाए गए खर्च की भरपाई भी नहीं हो सकी। फसल नुकसान के बाद कर्ज चुकाने की समस्या और गंभीर हो गई, जिससे कई किसान आर्थिक संकट में घिर गए और कुछ ने आत्महत्या जैसा कदम उठा लिया। शासन की ओर से आत्महत्या प्रभावित किसान परिवारों को एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। हालांकि बढ़ती महंगाई के दौर में यह राशि अपर्याप्त मानी जा रही है। इसके अलावा पोस्टमार्टम रिपोर्ट अथवा अन्य आवश्यक दस्तावेजों में त्रुटियों के कारण कई मामलों को अपात्र घोषित कर दिया जाता है, जिससे प्रभावित परिवार सहायता से वंचित रह जाते हैं।

साहूकारों और कर्ज का बढ़ता जा रहा है दबाव

बकाया ऋण के कारण कई किसानों को बैंकों से नया फसल ऋण नहीं मिल पाता। ऐसे में उन्हें निजी साहूकारों का सहारा लेना पड़ता है। बढ़ती ब्याज दरें, वसूली का दबाव और फसल नुकसान से उत्पन्न आर्थिक संकट किसानों को निराशा की ओर धकेल रहा है।

पिछले चार वर्षों के किसान आत्महत्या के आंकड़े

वर्ष आत्महत्या पात्र अपात्र
2023 109 43 66
2024 109 65 44
2025 218 122 96
2026 55 34 21

आत्महत्याओं का सिलसिला जारी

किसान आत्महत्या रोकने के लिए सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं और कर्जमाफी कार्यक्रम लागू किए गए है, लेकिन उनका अपेक्षित प्रभाव दिखाई नहीं दे रहा है। 2001 के बाद सबसे अधिक किसान आत्महत्याएं वर्ष 2025 में दर्ज की गई, उस वर्ष 218 किसानों ने आत्महत्या की थी, जिनमें से 122 मामले सहायता के लिए पात्र पाए गए थे।

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