Wardha Liquor Ban Women Protest: आष्टी-शहीद के सावंगा पुनर्वास गांव में अवैध शराब बिक्री के खिलाफ महिलाओं ने मोर्चा खोल दिया है।
ग्रामसभा ने सर्वसम्मति से शराबबंदी का प्रस्ताव मंजूर किया। महिलाओं ने प्रशासन को ज्ञापन देकर कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
सावंगा (पुनर्वास) गांव में खुलेआम हो रही कथित अवैध शराब बिक्री के खिलाफ महिलाओं ने अब मोर्चा खोल दिया है। शराब के कारण गांव का सामाजिक वातावरण प्रभावित होने और परिवारों में विवाद बढ़ने का हवाला देते हुए ग्रामसभा में शराबबंदी का प्रस्ताव सर्वसम्मति से मंजूर किया गया।
गांव में शराबबंदी को लेकर लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए महिलाओं ने पोला पर्व के दौरान गांव में भ्रमण कर जनजागरण भी किया। बड़ी संख्या में महिलाओं के एकजुट होने से शराब बेचने और शराब पीने वालों में खलबली मचने की बात सामने आई है।
महिलाओं ने स्पष्ट किया है कि शराबबंदी के लिए शुरू किया गया अभियान केवल पोला पर्व तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने गांव में लगातार सतर्कता बनाए रखने और अवैध शराब बिक्री के खिलाफ आवाज उठाते रहने का निर्णय लिया है।
इस सामाजिक अभियान को गांव के सरपंच विनोद सोनवणे का भी समर्थन मिल रहा है। उन्होंने शराब के कारण परिवारों को होने वाले नुकसान को रोकने और गांव का सामाजिक वातावरण शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए महिलाओं की मांग के साथ खड़े रहने की भूमिका अपनाई है।
वर्धा सावंगा (पुनर्वास) गांव की विवादमुक्ति समिति के अध्यक्ष शेपराट कुरकुडे ने शराबबंदी को गांव में सामाजिक विवाद कम करने से जोड़ते हुए कहा कि शराबबंदी के बिना वास्तविक विवादमुक्ति संभव नहीं है। उनके मुताबिक शराब के कारण परिवार और सामाजिक स्तर पर विवाद बढ़ने की स्थिति को रोकने के लिए शराबबंदी जरूरी है।
महिला मंडल अध्यक्ष सूर्यकांता परतेती के नेतृत्व में चंद्रकला ठाकरे, मंजू मोरेकर, संगीता धुर्वे, सुनीता कवरती, संध्या बीरवार, कांचन तराले, पुष्पा लवणकर सहित बड़ी संख्या में महिलाएं इस अभियान में शामिल हुईं।
शराबबंदी महिला मंडल ने आष्टी पुलिस, तहसीलदार और जिला पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर गांव में कथित अवैध शराब बिक्री पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। महिलाओं ने प्रशासन से शराब बिक्री पर रोक लगाने और संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
महिलाओं ने चेतावनी दी है कि यदि अवैध शराब बिक्री के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा। ग्रामसभा के प्रस्ताव और महिलाओं की सक्रियता के बाद अब प्रशासन की कार्रवाई पर गांववासियों की नजर है।