Wardha Drinking Water News: वर्धा में पहले ही तपती गर्मी से लोग काफि परेशान है, ऐसी स्थिति में वर्धा के आस-पड़ोस के 14 गांवों की जनता गत कुछ दिनों से कृत्रिम जलसंकट का सामना कर रही है। आये दिन पाइप लाइन में लीकेज व अनियमित जलापूर्ति के चलते मजीप्रा को लेकर नागरिकों में भारी रोष व्याप्त है। पिछले पांच दिनों से पिपरी मेघे सहित आसपास के गांवों में जलापूर्ति सेवा प्रभावित हो गई है। इसी बीच पता चला कि किसी ने खुदाई के दौरान मुख्य पाइप लाइन फोड़ दी है।
परिणामवश यह समस्या पैदा हो रही। ऐसे असामाजिक तत्वों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग हो रही है। जिले का तापमान 46 डिग्री पार कर चुका है। इस चुभनभरी गर्मी में प्रशासन की लापरवाही के कारण नागरिकों को कृत्रिम जलसंकट का सामना करना पड़ रहा है। आये दिन पाइप लाइन लीकेज की समस्या पर उपाय कर मजीप्रा ने अधिकांश हिस्सो में नई पाइप लाइन बिछाई है।
बावजूद इसके यह समस्या थमने का नाम नहीं ले रही। मजीप्रा अंतर्गत प्रादेशिक जलापूर्ति योजना में लगभग 20 हजार नल कनेक्शन है। इस योजना पिपरी मेघे, कारला, सिंदी मेघे, बोरगांव मेघे, उमरी मेघे, साटोडा, आलोडी, दत्तपुर, वायगांव निपानी, नालवाडी, वरुड, म्हसाला, सालोड हिरापुर आदि गांवों का समावेश है।
मजीप्रा के उपअभियंता दीपक धोटे ने कहा कि कुछ दिनों पहले आर्वी मार्ग पर प्रीया पैलेस समीप पाइप लाइन में लीकेज आया था। इसकी मरम्मत हो चुकी है। सभी गांवों में रोटेशन के अनुसार जलापूर्ति हो रही है। लीकेज के कारण समस्या पैदा हुई थी। आगामी दो दिनों में सभी गांवों को नियमित जलापूर्ति सेवा शुरू होगी।
पिपरी (मेघे) गांव के नागरिक आशिष बकाने ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से पिपरी (मेघे) में नल अनियमित आ रहे है। इससे काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। मजीप्रा ने दो दिन आड नियमित जलापूर्ति का वादा किया, परंतु ऐसा नहीं हो रहा है।
दिनों नालवाडी के नागरिक विपीन कठाणे ने बताया कि नालवाडी क्षेत्र में गत कुछ से नियमित नल नहीं आ रहे है। इससे नागरिकों में भारी असंतोष पनप रहा है। बार-बार पाइप लाइन में लीकेज होना, रोटेशन में अनियमितता बढ़ गई है।
मजीप्रा सूत्रों के अनुसार जलापूर्ति योजना की पाइप लाइन पर लगभग 17 एयर वॉल है। इसमें कुछ असामाजिक तत्व छेड़छाड़ करते हैं। वॉल का रबर निकाल देते है। परिणामवश जलापूर्ति सेवा में दिक्कतें आती है। इन जगह पर सुरक्षा की दृष्टि से उपाययोजना करना भी असंभव है।
साटोडा के नागरिक नीरज खराबे कहते है कि इस बार बार की समस्या से निजात दिलाने महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण ने स्थायी उपाययोजना करनी चाहिए। पहले ही तपन से जनता त्रस्त है, ऐसे में पानी होते हुए भी कृत्रिम जलसंकट का सामना करना पड़ रहा है।