वेक अप ठाणे प्रदर्शन (सोर्स: नवभारत फोटो)
ठाणे

80 हजार AC और 190 डीजल जेनरेटर! अमेज़न के AI डेटा सेंटर पर क्यों मचा है बवाल?

Wake Up Thanekar Protest: ठाणे में अमेज़न के ₹47,000 करोड़ के AI डेटा सेंटर का विरोध शुरू हो गया है। 80,000 AC और 190 डीजल जनरेटर से 'हीट आइलैंड' और प्रदूषण के खतरे को लेकर सड़कों पर उतरे लोग।

सूर्यप्रकाश मिश्र, गोरक्ष पोफली

Amazon AI Data Center Thane Controversy: ठाणे शहर के बीचोंबीच बालकुम इलाके में बन रहे विशाल एआई डेटा सेंटर से होने वाले भारी नुकसान के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर रहे हैं।

अमेज़न डेटा सर्विसेज़ इंडिया द्वारा प्रस्तावित 53 एकड़ के हाइपरस्केल डेटा सेंटर को लेकर स्थानीय निवासियों का विरोध तेज हो गया है।

एमएमआर का सबसे बड़ा डेटा सेंटर

लगभग 47,000 करोड़ रुपये के निवेश वाले इस प्रोजेक्ट को मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन की सबसे बड़ी डेटा सेंटर फैसिलिटीज में से एक बताया जा रहा है। लेकिन रिहायशी इलाके के बीच में इसे बनाए जाने से लोगों में पर्यावरण, बिजली और जीवन की गुणवत्ता को लेकर चिंता का माहौल है।"वेक अप ठाणेकर" (WUT) के बैनर तले लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मुख्य आपत्ति डेटा सेंटर से नहीं, बल्कि इसकी जगह से है।

गलत जगह का चुनाव

वरिष्ठ समाजसेवी दयानंद नेने ने कहा कि एक समय था कि यहां कई बड़ी केमिकल कंपनियां थी,जिनके बंद होने के बाद यह पूरी तरह रिहायशी इलाका बन गया। अब इसे फिर से गैस चैम्बर बनाने की साजिश हो रही है। एआई डेटा सेंटर बनने से पूरे इलाके में हर तरह का प्रदूषण बढ़ जाएगा।

बालकुम निवासी अनुराधा रोडे ने कहा, "हम डेटा सेंटर के खिलाफ नहीं हैं लेकिन इसे शहर के बीच में बनाने से बड़ा खतरा होने वाला है। इस प्लॉट के आसपास ऊंची इमारतें, तीन गांव, स्कूल, बड़े हॉस्पिटल और मेट्रो हैं।

WUT ने पिछले दिनों ह्यूमन-चेन प्रोटेस्ट किया और बाद में अमेज़न अधिकारियों से मुलाकात भी की। स्थानीय निवासी मेघा शेट्टी के अनुसार, मीटिंग से पहले उन्होंने एक्सपर्ट्स से सलाह ली थी, लेकिन उनकी तकनीकी और पर्यावरण संबंधी चिंताओं का संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

होगा हीट आइलैंड

इस प्रोजेक्ट से आसपास गर्मी, शोर और प्रदूषण की संभावना व्यक्त की जा रही है। लोगों की सबसे बड़ी चिंता हीट आइलैंड बनने की है। निवासी गुरसिस सिंह ने आरोप लगाया कि मशीनों को ठंडा करने के लिए डेटा सेंटर में करीब 80,000 एयर कंडीशनर लगेंगे, जिससे बालकुम, ढोकाली और माजीवाड़ा में तापमान बढ़ेगा।

"हर साल गर्मियों में तापमान पहले ही नई ऊंचाई पर पहुंच रहा है"। इसके अलावा लगभग 190 डीजल जेनरेटर सेट से होने वाला शोर, एग्जॉस्ट एमिशन और कुल पर्यावरणीय प्रभाव भी चिंता का विषय है।

अमेजन ने क्या कहा

अमेज़न ने उक्त आरोपों को खारिज किया है। कंपनी ने कहा कि हीट मैनेजमेंट को डिजाइन में शामिल किया गया है। सर्वर से निकलने वाली गर्मी कूलिंग सिस्टम से निकलकर सीधे वातावरण में फैलेगी और आसपास के इलाकों के तापमान पर असर नहीं पड़ेगा।

नॉइज़ के लिए कंपनी ने कहा कि डेटा सेंटर नॉइज़ पॉल्यूशन रूल्स, 2000 का पालन करेगा और साउंड-प्रूफिंग, मफलर और इंसुलेशन का इस्तेमाल होगा।

बिजली को लेकर सवाल

प्रोजेक्ट की 420 MW की अनुमानित बिजली जरूरत से भी लोग परेशान हैं। निवासी जतिन कोठारे ने कहा, "यह प्लांट बिजली ग्रिड के पास बन रहा है। पिछले कुछ महीनों में हमने पहले ही पावर कट देखे हैं।" उन्हें डर है कि इतनी बड़ी बिजली मांग से लोकल सप्लाई पर असर पड़ेगा।

पानी को लेकर भी उठा प्रश्न

डेटा सेंटर में लगने वाले लाखों लीटर पानी के सवाल पर कंपनी ने कहा कि ठाणे शहर के डेटा सेंटर में कूलिंग के लिए पानी का इस्तेमाल नहीं होगा। मंजूर पानी सप्लाई 0.01 मिलियन लीटर प्रति दिन है, जो सिर्फ पीने और टॉयलेट के लिए है। कूलिंग के लिए एयर-कूल्ड चिलर और क्लोज्ड-लूप तकनीक इस्तेमाल होगी।

मंजूरी प्रक्रिया पर उठे सवाल

निवासियों ने प्रोजेक्ट को मिली सरकारी मंजूरियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने ने कहा, "जिन लोगों ने मंजूरी दी, उन्होंने साइट का दौरा नहीं किया। उन्हें पता नहीं कि इसका हजारों निवासियों पर क्या असर पड़ेगा।" कोठारे ने ITES पॉलिसी पर सवाल उठाते हुए कहा कि रिहायशी इलाकों में ऐसे सेंटरों के बारे में उसमें कुछ नहीं कहा गया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि वे विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन घनी आबादी वाले इलाके में इतने बड़े प्रोजेक्ट का असर पहले ठीक से आंका जाना चाहिए। फिलहाल "वेक अप ठाणेकर" आगे भी विरोध जारी रखने की तैयारी में है।

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