

CBDC Based DBT Launch By Shivraj Singh: चंडीगढ़ के टैगोर थिएटर में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) आधारित डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर (डीबीटी) व्यवस्था का शुभारंभ किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने की।
केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी और केंद्रीय राज्य मंत्री निमुबेन जयंतीभाई बंभणिया भी विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहीं। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह पहल सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में पारदर्शिता, सुरक्षा और समयबद्धता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि सीबीडीसी आधारित डीबीटी के जरिए राशन और खाद्यान्न का भुगतान सीधे लाभार्थियों तक सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से पहुंचेगा। चंडीगढ़ में शुरू किया गया यह प्रयोग सफल होने पर देश के अन्य हिस्सों में मॉडल के तौर पर लागू किया जा सकता है। नई व्यवस्था में तकनीकी प्रावधान इस तरह तैयार किए गए हैं कि लाभार्थी प्राप्त राशि का इस्तेमाल केवल खाद्यान्न और जरूरी खाद्य वस्तुओं की खरीद में कर सकें। उन्हें गेहूं-चावल के अलावा दाल और अन्य आवश्यक वस्तुएं चुनने की सुविधा भी मिलेगी।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कृषि नीति और खाद्य सुरक्षा के मामले में किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि देश में गेहूं और धान का पर्याप्त भंडार है और भारत अपनी जरूरतें पूरी करने के साथ जरूरत पड़ने पर निर्यात भी कर रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि 80 करोड़ से अधिक लोगों को निशुल्क राशन मिलना बड़ी सामाजिक सुरक्षा है। इससे गरीब परिवारों की बचत बढ़ती है और वे शिक्षा समेत अन्य जरूरतों पर खर्च कर सकते हैं।
शिवराज सिंह चौहान ने संसद में होने वाले व्यवधान को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए अनुचित बताते हुए कहा कि लोकतंत्र में बहस जरूरी है, लेकिन व्यवधान स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का उद्देश्य जनता के जीवन में वास्तविक बदलाव लाना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार फाइलों में नहीं, बल्कि जनता की जिंदगी में दिखाई देनी चाहिए। उन्होंने हर घर तिरंगा अभियान से जुड़ने, पौधे लगाने और नागरिक कर्तव्यों का पालन करने की अपील भी की। साथ ही 2029 तक 6 करोड़ ग्रामीण महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने के लक्ष्य का उल्लेख किया।