

Manoj Jarange Patil Viral Video: महाराष्ट्र की राजनीति और समाज में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर एक बड़ा चेहरा बनकर उभरे मनोज जरांगे पाटिल एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। इस बार उनकी चर्चा किसी आंदोलन या अनशन को लेकर नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो को लेकर हो रही है।
यह वीडियो धाराशिव जिले के खेड गांव में आयोजित एक सभा के दौरान का बताया जा रहा है, जिसने नेटिजन्स के बीच एक नई बहस छेड़ दी है।
वायरल हो रहे इस वीडियो में देखा जा सकता है कि मनोज जरांगे पाटिल मंच पर एक कुर्सी पर महाराजा की तरह बैठे हुए हैं। उनके सामने महिलाओं की एक लंबी कतार लगी है। एक के बाद एक महिलाएं मंच पर आती हैं और पूरी श्रद्धा के साथ मनोज जरांगे के चरणों में अपना माथा टेकती हैं और वहां से निकल जाती हैं।
इस दृश्य ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है, क्योंकि राजनीति या सामाजिक आंदोलनों में इस तरह का दृश्य आमतौर पर आध्यात्मिक गुरुओं या धार्मिक नेताओं के दरबार में ही देखने को मिलता है।
इस वीडियो में सबसे ज्यादा चर्चा मनोज जरांगे पाटिल के हावभाव को लेकर हो रही है। वीडियो में नजर आ रहा है कि जब महिलाएं उनके पैरों में गिरकर आशीर्वाद ले रही हैं, तब जरांगे पाटिल की प्रतिक्रिया बिल्कुल शून्य है।
वे न तो महिलाओं को आशीर्वाद देने के लिए हाथ उठा रहे हैं और न ही उनके चेहरे पर कोई विशेष भाव नजर आ रहा है। उनके इस निर्मोही और शांत अंदाज ने लोगों को हैरान कर दिया है। जहां उनके समर्थक इसे उनकी सादगी और गंभीरता मान रहे हैं, वहीं आलोचक इसे उनके बढ़ते अहंकार के रूप में देख रहे हैं।
वीडियो के वायरल होते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। जनमानस मुख्य रूप से दो गुटों में बंटा नजर आ रहा है। समर्थकों का कहना है कि यह मनोज जरांगे के प्रति लोगों का अटूट विश्वास और प्रेम है। मराठा समाज उन्हें अपना मसीहा मानता है, इसलिए महिलाएं स्वेच्छा से उनके प्रति अपना सम्मान प्रकट कर रही हैं।
दूसरी तरफ, कई नेटिजन्स इसे ढोंग करार दे रहे हैं। उनका तर्क है कि एक सामाजिक कार्यकर्ता को खुद को भगवान या महाराज की तरह पेश नहीं करना चाहिए। कुछ यूजर्स ने तो मजाकियां लहजे में यहां तक लिख दिया कि अब बस देरी है तो जरांगे पाटिल का एक छोटा सा मंदिर बनाने की।
मराठा आरक्षण की लड़ाई लड़ते-लड़ते मनोज जरांगे पाटिल अब केवल एक नेता नहीं, बल्कि एक जनभावना बन चुके हैं। खेड गांव का यह वीडियो इसी बढ़ते प्रभाव का प्रमाण है। हालांकि, जिस तरह से लोग उनके चरणों में झुक रहे हैं और उस पर जरांगे की जो चुप्पी है, उसने भविष्य के लिए कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या यह आंदोलन अब भक्ति की ओर मुड़ रहा है या यह केवल एक नेता के प्रति जनता का सम्मान व्यक्त करने का अपना तरीका है? फिलहाल, यह वीडियो चर्चा का विषय बना हुआ है और इस पर बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है।