Ulhasnagar Corporator Appointment Dispute: ठाणे जिले की उल्हासनगर महानगरपालिका में स्वीकृत नगरसेवकों की नियुक्ति को लेकर चल रहा विवाद अब बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंच गया है। 1 अक्टूबर 2026 को हुई विशेष महासभा में महापौर अश्विनी निकम द्वारा नियमों का उल्लंघन कर लिए गए फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने स्वीकृत नगरसेवकों के नामों को गैजेट में प्रकाशित करने पर रोक लगा दी है।
महाराष्ट्र महानगरपालिका स्वीकृत नगरसेवकों की पात्रता और नियुक्ति नियम 2012 के नियम 5(1) के अनुसार, मनपा आयुक्त ने दलीय संख्या को देखते हुए भाजपा के 4 और शिवसेना प्रणीत उल्हासनगर शहर विकास आघाडी के 3 उम्मीदवारों की सिफारिश की थी।
याचिकाकर्ता प्रदीप रामचंदानी और राजेश वधारिया ने याचिका में आरोप लगाया है कि 1 अक्टूबर की महासभा में महापौर अश्विनी निकम ने अधिकारों का दुरुपयोग किया। महापौर ने आयुक्त द्वारा सिफारिश किए गए भाजपा के 4 में से 2 नामों को खारिज कर दिया और केवल 2 नाम ही सदन के सामने रखे। इसके विपरीत शहर विकास आघाडी के सिफारिश किए गए 3 नामों की जगह 5 नाम सदन में पेश किए और जल्दबाजी में राष्ट्रगान कराकर सभा समाप्त कर दी।
इस मामले पर न्यायमूर्ति जीएस कुलकर्णी और न्यायमूर्ति डॉ नीला गोखले की खंडपीठ के सामने तत्काल सुनवाई हुई। बॉम्बे कोर्ट ने कहा कि 2012 की नियमावली के अनुसार आयुक्त द्वारा सिफारिश किए गए नामों को खारिज करने या उनमें बदलाव करने का कोई भी अधिकार महापौर को नहीं है। इस दलील में प्रथम दृष्टया तथ्य है।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई 12 अक्टूबर 2026 तक नियम 6 के तहत स्वीकृत नगरसेवकों के नामों को अधिकृत गैजेट में प्रकाशित करने या कोई भी आगे की कार्रवाई करने पर उल्हासनगर मनपा सचिव को रोक लगा दी है। न्यायालय ने सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर 12 अक्टूबर से पहले जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
बता दें कि इससे पहले हाईकोर्ट ने 11 सितंबर 2026 को दिए आदेश और सुप्रीम कोर्ट द्वारा 23 सितंबर 2026 के आदेश से दी गई समय सीमा को ध्यान में रखते हुए उल्हासनगर महानगरपालिका में 1 अक्टूबर को यह विशेष सभा बुलाई गई थी। लेकिन मनपा में इस राजनीतिक और कानूनी विवाद के कारण स्वीकृत नगरसेवकों की नियुक्ति एक बार फिर अटक गई है।