अब 1000-1500 रुपये का हिसाब मांगेगी पुलिस? अभिजीत दिपके ने जताई कड़ी नाराजगी, नोटिस पर उठाए गंभीर सवाल

Abhijit Dipke Press Conference: महाराष्ट्र पुलिस द्वारा CJP कार्यकर्ताओं को नोटिस भेजने पर अभिजीत दिपके ने नाराजगी जताई है। उन्होंने पुलिस पर जंतर-मंतर आंदोलन रोकने और हिसाब मांगने पर सवाल खड़े किए।
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अभिजीत दिपके(सोर्स: एआई फोटो)
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Abhijit Dipke CJP Slams Maharashtra Police: महाराष्ट्र में कॉकोज जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं को पुलिस द्वारा थमाए गए एक नोटिस ने राज्य की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में नया विवाद खड़ा कर दिया है। आगामी 10 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित होने वाले आंदोलन को लेकर चंद्रपुर जिले के बल्लारपुर पुलिस स्टेशन ने CJP कार्यकर्ताओं को BNSS की धारा 168 के तहत नोटिस जारी किया है।

इस पुलिसिया नोटिस के सामने आने के बाद CJP के संस्थापक और अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने प्रेस कॉन्फरंस में गहरा दुख जताते हुए पुलिस प्रशासन और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखे प्रहार किए हैं।

मुंबई में की थी तारीफ, अब मिला नोटिस

छत्रपति संभाजीनगर में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए अभिजीत दिपके ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से वे महाराष्ट्र पुलिस की लगातार सराहना कर रहे थे कि मुंबई प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने पूरा सहयोग दिया और दिल्ली पुलिस की तरह प्रदर्शनकारियों पर लाठियां नहीं बरसाईं। हालांकि, इस नए नोटिस ने उनके भरोसे को तोड़ा है।

दिपके ने सवाल उठाया कि क्या अब महाराष्ट्र पुलिस के पास कोई अपराध रोकने का काम नहीं बचा है, जो वह दिल्ली आंदोलन में जाने वाले कार्यकर्ताओं से 1000 से 1500 रुपये के रेल टिकट के खर्च और वित्तीय सहायता का हिसाब मांग रही है? बल्लारपुर पुलिस स्टेशन द्वारा CJP कार्यकर्ता मयूर प्रेमानंद मालखेडे को भेजे गए नोटिस में पूछा गया है कि दिल्ली जाने के लिए उन्हें आर्थिक सहयोग कौन दे रहा है और आंदोलन में शामिल होने का उनका उद्देश्य क्या है।

आंदोलन में हिंसा भड़काने की साजिश रच रही है भाजपा?

पुलिस द्वारा जारी नोटिस में उल्लेख किया गया है कि दिल्ली में होने वाला यह आंदोलन हिंसक हो सकता है और कार्यकर्ताओं को सोशल मीडिया पर पोस्ट न डालने तथा दिल्ली न जाने की हिदायत दी गई है।

इस चेतावनी पर सवाल उठाते हुए अभिजीत दिपके ने पूछा कि महाराष्ट्र पुलिस को पहले से यह कैसे पता चल गया कि आंदोलन हिंसक होने वाला है? उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि क्या भाजपा ने जंतर-मंतर के आंदोलन स्थल पर हिंसा भड़काने की पहले से ही कोई योजना या साजिश तैयार कर रखी है? दिपके ने याद दिलाया कि संविधान का अनुच्छेद 19 हर नागरिक को असहमति जताने और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का मौलिक अधिकार देता है, जिसे पुलिस जबरन नहीं छीन सकती।

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मुख्य मांगें: CEC का इस्तीफा और स्वतंत्र नियुक्ति

अभिजीत दिपके ने अपने संबोधन में अपनी प्रमुख मांगों को रेखांकित किया:

मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा: दिपके ने मांग की है कि CEC ज्ञानेश कुमार तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें और उन पर आपराधिक मामला (क्रिमिनल केस) दर्ज किया जाए।

स्वतंत्र निष्पक्ष नियुक्ति: चुनाव आयोग के प्रमुख (CEC) की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह से इंडिपेंडेंट होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने देशवासियों को वोट देने का संवैधानिक अधिकार दिया था। 'वन नेशन, वन इलेक्शन' का नारा असल में वन नेशन, वन पार्टी स्थापित करने का छिपा हुआ इरादा है।

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गिरफ्तारी हुई तो जगह-जगह बना देना जंतर-मंतर

अभिजीत दिपके ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यदि पुलिस उन्हें गिरफ्तार भी कर लेती है, तो कार्यकर्ताओं को घबराने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने समर्थकों से अपील की कि वे केवल महात्मा गांधी के अहिंसक सिद्धांतों को याद रखें और जहां भी मौजूद हों, वहीं धरना देकर उसे 'जंतर-मंतर' में बदल दें।

महाराष्ट्र के महापुरुषों की विरासत की दिलाई याद

अभिजीत दिपके ने पुलिस अधिकारियों से अपील की कि वे राजनीतिक दबाव में काम करने के बजाय महाराष्ट्र के गौरवशाली इतिहास को याद रखें। उन्होंने सावित्रीबाई फुले, माता जीजाऊ, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर और छत्रपति शाहू महाराज जैसे समाज सुधारकों का जिक्र करते हुए कहा कि पुलिस बल की स्थापना इन महापुरुषों की विरासत और सिद्धांतों की रक्षा के लिए हुई है, न कि किसी राजनीतिक पार्टी का झंडा थामने के लिए।

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