उल्हासनगर मनपा (फोटो नवभारत)
ठाणे

ठाणे के उल्हासनगर मनपा में चार दिन से अधिकारी गायब? कांग्रेस अध्यक्ष रोहित सालवे बोले- जनता कब तक भुगतेगी?

Thane Government Officers Absence: उल्हासनगर मनपा में अधिकारियों की गैरहाजिरी से नागरिकों के काम ठप होने का आरोप कांग्रेस अध्यक्ष रोहित सालवे ने लगाया। उन्होंने अधिकारियों से इस्तीफे तक की मांग की।

आलोक उमाकृष्ण

MNC Officers Absence Congress Allegation: ठाणे जिले के उल्हासनगर महानगरपालिका में सत्तारूढ़ भाजपा और शिंदे शिवसेना के बीच चल रहे सत्ता संघर्ष का खामियाजा अब आम जनता भुगत रही है।

उल्हासनगर शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रोहित सालवे ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मनपा के सभी प्रमुख अधिकारी अपने केबिनों से गायब हैं।सालवे ने कहा कि यदि अधिकारी वर्ग इतना डरता है तो वह अपने पद से इस्तीफा दे दे।

सालवे ने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम मनपा के बड़े अधिकारियों सहित टाउन प्लानर, शहर अभियंता (सार्वजनिक बांधकाम), शहर अभियंता (जलापूर्ती), सभी सहायक आयुक्त और अन्य विभाग प्रमुख भाजपा और शिवसेना के सत्ता संघर्ष के कारण पिछले 4 दिनों से अपने कार्यालय में हाजिर नहीं हैं।

अधिकारियों की गैरहाजिरी से नागरिकों के काम अटके

सालवे ने कहा कि सोमवार से खुद आयुक्त गैरहाजिर हैं। आयुक्त के न आने से बाकी अधिकारी भी दफ्तर नहीं आ रहे हैं। मनपा के आला अधिकारियों के कार्यालय न आने से नागरिकों के काम पूरी तरह से ठप हो गए हैं। उल्हासनगर महानगरपालिका में अधिकारियों की कथित गैरहाजिरी का असर अब आम नागरिकों के रोजमर्रा के कामों पर पड़ रहा है।

जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने, नए पानी कनेक्शन लेने, नल से जुड़ी शिकायतें दर्ज कराने, इमारतों के निर्माण परवाने प्राप्त करने और टाउन प्लानिंग से संबंधित कामों के लिए लोग मनपा कार्यालय पहुंच रहे हैं। इसके अलावा ड्रेनेज और संपत्ति कर से जुड़े मामलों के लिए भी नागरिकों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।

क्या अधिकारियों को सत्ता पक्ष के नेताओं से लगता है डर?

कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष रोहित सालवे के आरोप के मुताबिक, संबंधित अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण फाइलों पर हस्ताक्षर नहीं हो पा रहे हैं और कई जरूरी काम अटके हुए हैं। सत्ता पक्ष के इस संघर्ष से और कितने दिन जनता को बंधक बनाएंगे? यह सवाल कांग्रेस ने पूछा है।

रोहित सालवे ने चेतावनी देते हुए कहा,अगर अधिकारियों को सत्ता पक्ष के नेताओं से इतना ही डर लगता है और वे काम नहीं कर सकते, तो उन्हें नैतिकता के आधार पर अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए। कुर्सी पर बैठकर जनता को परेशान नही करना चाहिए।

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