Bhayandarpada 374 Hectare Forest Land: ठाणे के भाईंदरपाडा (ओवले) स्थित 374 हेक्टेयर वन भूमि के मालिकी हक के विवाद में राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के फैसले से ठाणेकर को बड़ी राहत मिली है।
मंत्री ने इस जमीन पर निजी व्यक्तियों के नाम से की गई म्यूटेशन एंट्री क्रमांक 975 को रद्द कर जमीन पर फिर से 'महाराष्ट्र शासन राखीव वने' कायम रखने का आदेश दिया है। साथ ही जिलाधिकारी को 3 महीने में पूरे मामले की गहन जांच का आदेश दिया गया है।
विवाद की जड़ मौजे भाईंदरपाडा की जुना सर्वे क्र. 291 में से नया सर्वे क्र. 22/1, क्षेत्र 374-79-50 हेक्टेयर, 22/4, 22/5 और जुना सर्वे क्र. 297 में से नया सर्वे क्र. 21 जमीनें हैं। वन विभाग का दावा है कि यह जमीन भारतीय वन अधिनियम के तहत वन के रूप में अधिसूचित है।
महाराष्ट्र राजस्व न्यायाधिकरण ने 5 मार्च 2015 को कहा कि यह जमीन 'वन' की श्रेणी में नहीं आती। इसके बाद फेरफार नोंद क्र. 975 को प्रमाणित कर अधिकार अभिलेख में निजी व्यक्तियों के नाम डाल दिए गए और 'महाराष्ट्र शासन राखीव वने' की नोंद हटा दी गई।
इस पर राजस्व प्रशासन ने आपत्ति ली। उपविभागीय अधिकारी, ठाणे ने 1 अगस्त 2015 को फेरफार 975 रद्द कर दी। 21 मार्च 2017 को अपर जिलाधिकारी (अपील) ने यह फैसला बरकरार रखा।
बाद में अपर आयुक्त, कोकण विभाग ने 11 जनवरी 2019 को निचली अदालतों के आदेश पलट कर फेरफार 975 को फिर कायम कर दिया। आदेश लागू न होने पर संबंधित लोगों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
इस मामले में मुंबई हाईकोर्ट में रिट याचिका क्र. 1344/2025 दायर हुई। 7 मई 2025 को हाईकोर्ट ने शर्तों के साथ अपर आयुक्त के 2019 के आदेश को लागू करने की इजाजत दी। फिर भी अमल न होने पर अवमानना याचिका क्र. 499/2025 दायर की गई।
दूसरी तरफ वन विभाग ने 2015 के न्यायाधिकरण के फैसले के खिलाफ रिट याचिका क्र. 4535/2016 दायर की है, जो अभी भी लंबित है।
इससे पहले 31 दिसंबर 2025 को राजस्व मंत्री के न्यायासन ने अपर आयुक्त का 2019 का आदेश कायम रखा था। इसके खिलाफ राजस्व और वन विभाग ने महाराष्ट्र जमीन राजस्व संहिता 1966 की धारा 258 के तहत पुनर्विलोकन अर्जी दायर की।
सुनवाई में चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि हाईकोर्ट का 7 मई 2025 का आदेश अनिवार्य नहीं बल्कि निर्देशात्मक था। पहले इसे बंधनकारक मानकर गलती से फेरफार कायम की गई थी। इसी आधार पर 6 अगस्त 2026 को उन्होंने पुनर्विलोकन अर्जी मंजूर कर ली।
31 दिसंबर 2025 का आदेश रद्द। अपर आयुक्त का 11 जनवरी 2019 का आदेश रद्द।
उपविभागीय अधिकारी (1 अगस्त 2015) और अपर जिलाधिकारी (21 मार्च 2017) के आदेश कायम।
इसके बाद फेरफार 975 रद्द, 'महाराष्ट्र शासन राखीव वने' की नोंद फिर से लागू।
वन विभाग ने दावा किया है कि 1957 में वन अधिनियम की धारा 35 के तहत नोटिस, 1960 में अधिसूचना और 1975 में महाराष्ट्र निजी वन (अधिग्रहण) अधिनियम के तहत जमीन सरकार के नाम निहित हुई है। 1975 से कब्जा वन विभाग के पास है और यह क्षेत्र संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के अधीन है।
कोकण स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के विधायक एड. निरंजन डावखरे ने कहा, "मंत्री बावनकुले का यह फैसला ठाणेकर के हित की रक्षा करने वाला है। वन संपदा के संरक्षण में मदद मिलेगी।"
अब जिलाधिकारी, ठाणे को हाईकोर्ट में लंबित दावों, राजस्व अभिलेखों और कागजातों के आधार पर नए सिरे से जांच कर 3 महीने में वन विभाग को रिपोर्ट देनी होगी।