Mira Bhayandar Flyover: मीरा-भाईंदर में मेट्रो लाइन-9 के नीचे तैयार किया जा रहा डबल-डेकर फ्लाईओवर अब विकास का प्रतीक नहीं, बल्कि सवालों का पुल बनता जा रहा है। गोल्डन नेस्ट सर्कल के आगे यह फ्लाईओवर 4 लेन से अचानक 2 लेन में सिमट जाता है।
यही वह बिंदु है, जहां भविष्य के ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं की पटकथा लिखी जा रही है, ऐसा दावा स्थानीय नागरिक और ट्रैफिक विशेषज्ञ कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो ने जैसे ही इस डिज़ाइन की पोल खोली, मुंबई महानगर विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) की योजना और इंजीनियरिंग क्षमता पर सीधा सवाल खड़ा हो गया।
काशीमीरा-भाईंदर मुख्य मार्ग पर बन रहा यह तीसरा एलिवेटेड रोड ब्रिज पुराने पेट्रोल पंप से शुरू होकर आज़ाद नगर धर्मकांटा तक जाता है। दोनों दिशाओं में दो-दो लेन वाला यह ब्रिज गोल्डन नेस्ट सर्कल पार करते ही अचानक दो लेन में बदल जाता है। सवाल उठाया जा रहा है कि क्या तेज़ रफ्तार वाहनों को बिना पर्याप्त चेतावनी अचानक संकरे रास्ते पर उतारना सुरक्षित है? विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क की चौड़ाई अचानक आधी होने से ‘बॉटलनेक’ बनेगा। काशीमीरा की ओर से आने वाले वाहनों की लंबी कतार लगेगी और अचानक लेन खत्म होने से टक्कर और पलटने जैसी दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा।
गोल्डन नेस्ट सर्कल मीरा-भाईंदर का प्रमुख पांच रास्ता है, जहां से पूर्व और पश्चिम दोनों दिशाओं में भारी यातायात चलता है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस अहम सर्कल पर फ्लाईओवर को दोनों ओर उतारा ही नहीं गया। न्यू गोल्डन नेस्ट, गोडदेव गांव, काशीनगर, इंद्रलोक और नया नगर, भाईंदर पश्चिम की ओर जाने वाले वाहन चालकों को इस ब्रिज का कोई सीधा फायदा नहीं मिलेगा। जो वाहन चालक गलती से ब्रिज पर चढ़ गया, उसके लिए वापस उतरने का कोई आसान रास्ता नहीं है। स्थानीय लोगों का दावा है कि इस डिज़ाइन के कारण करीब 70 प्रतिशत वाहन चालक फ्लाईओवर का उपयोग ही नहीं कर पाएंगे।
एमएमआरडीए ने सफाई देते हुए कहा है कि 4 लेन से 2 लेन में बदलाव किसी तकनीकी गलती का परिणाम नहीं है, बल्कि सड़क की सीमित चौड़ाई और दीर्घकालिक शहरी नियोजन का हिस्सा है। प्राधिकरण के अनुसार, यह ब्रिज पहले भाईंदर पश्चिम तक प्रस्तावित था, लेकिन फाटक क्षेत्र में महाराणा प्रताप और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमाओं को हटाना और आज़ाद नगर से फाटक के बीच सड़क को 30 मीटर चौड़ा करना संभव नहीं हो पाया। इसी कारण गोल्डन नेस्ट सर्कल के आगे ब्रिज को दो लेन का करना पड़ा।
एमएमआरडीए का दावा है कि फ्लाईओवर पर रंबल स्ट्रिप्स, डिवाइडर, साइनेज, रेट्रो-रिफ्लेक्टिव टैग और एंटी-क्रैश बैरियर्स लगाए गए हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि अचानक लेन खत्म होने जैसी मूलभूत खामी को क्या सिर्फ साइनेज से सुधारा जा सकता है?
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प्राधिकरण ने भविष्य में सड़क चौड़ीकरण की संभावना का हवाला दिया है, लेकिन यह योजना अभी कागज़ों में है। सवाल यह है कि जब तक वह योजना अमल में आएगी, तब तक रोज़ाना इस मार्ग से गुजरने वाले लाखों वाहन चालक किस कीमत पर इस प्रयोग का हिस्सा बनेंगे?
मेट्रो-9 के नीचे बना यह फ्लाईओवर शहरी विकास का उदाहरण बनेगा या ट्रैफिक अव्यवस्था का, यह आने वाला वक्त बताएगा। लेकिन फिलहाल इतना साफ है कि डिज़ाइन, उपयोगिता और सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों को सिर्फ स्पष्टीकरण से नहीं, बल्कि ज़मीनी सुधार से ही हल किया जा सकता है।
(विनोद मिश्रा, मीरा-भाईंदर)