ठाणे महानगरपालिका मुख्यालय और प्रदर्शन करते पूर्व महापौर अशोक वैती का सांकेतिक चित्र (सोर्स फोटोः नवभारत)
ठाणे

ठाणे मनपा में अनोखा विरोध, पूर्व महापौर ने अधिकारी के नामफलक पर चढ़ाई माला, फिर धरने पर बैठे

TMC Deputy Commissioner Gajanan Godepure: ठाणे मनपा में दफ्तरशाही के खिलाफ सत्तारूढ़ शिवसेना के पूर्व महापौर अशोक वैती ने उपायुक्त कार्यालय के बाहर अनोखा प्रदर्शन कर प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठाए।

सूर्यप्रकाश मिश्र, वेदांत जोशी

Thane Municipal Corporation: ठाणे महानगरपालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर अब सत्तारूढ़ पक्ष से जुड़े पूर्व जनप्रतिनिधि ने ही मोर्चा खोल दिया है। नागरिकों और मनपा कर्मचारियों की समस्याओं का समय पर समाधान नहीं होने का आरोप लगाते हुए पूर्व महापौर और शिवसेना के पूर्व वरिष्ठ नगरसेवक अशोक वैती बुधवार को मनपा उपायुक्त गजानन गोदेपुरे के कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए।

इस दौरान वैती ने प्रशासन के प्रति अपना विरोध जताने के लिए उपायुक्त कार्यालय के बाहर लगे अधिकारी के नामफलक पर पुष्पहार चढ़ाया। विरोध का यह तरीका मनपा परिसर में चर्चा का विषय रहा।

जनसंवाद’ के जरिए उठाई जा रही थीं शिकायतें

अशोक वैती और उनके सहयोगियों की ओर से पिछले कुछ समय से ‘जनसंवाद’ अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत प्रत्येक मंगलवार और गुरुवार को आनंद आश्रम में नागरिकों की समस्याएं सुनी जाती हैं।

वैती का दावा है कि अभियान के माध्यम से ठाणे शहर के नागरिकों के साथ-साथ मनपा कर्मचारियों की समस्याएं भी प्रशासन तक पहुंचाई जा रही हैं। इसके बावजूद कई शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।

वारिस के आधार पर नौकरी का मामला भी लंबित

वैती ने आरोप लगाया कि कुछ मनपा अधिकारी नागरिकों की शिकायतों और कर्मचारियों से जुड़े मामलों को लगातार टाल रहे हैं। खास तौर पर अनुकंपा के आधार पर परिवार के सदस्य को नौकरी देने और संवर्ग से जुड़े मामलों के लंबे समय से लंबित रहने का मुद्दा उन्होंने उठाया।

उनका कहना है कि कुछ मामलों में आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन संबंधित उपायुक्त की मंजूरी या हस्ताक्षर नहीं होने के कारण फाइलें आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।

वैती के मुताबिक, इन मामलों को लेकर पिछले कई दिनों से प्रशासन के साथ पत्राचार किया जा रहा था और व्यक्तिगत स्तर पर भी लगातार फॉलोअप किया गया। इसके बावजूद समाधान नहीं होने पर आखिरकार उपायुक्त कार्यालय के बाहर धरना देने का निर्णय लिया गया।

सत्तारूढ़ पक्ष के पूर्व महापौर को ही धरना क्यों देना पड़ा?

इस आंदोलन ने ठाणे मनपा प्रशासन और सत्तारूढ़ दल से जुड़े पूर्व जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

सवाल यह है कि जब महानगरपालिका में सत्तारूढ़ पक्ष का प्रभाव है, तो उसी पक्ष के पूर्व महापौर को नागरिकों और कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासनिक अधिकारी के कार्यालय के बाहर धरना क्यों देना पड़ा?

अगर एक पूर्व महापौर को भी अपनी बात मनवाने के लिए आंदोलन का सहारा लेना पड़ रहा है, तो आम नागरिकों की शिकायतों के समाधान की स्थिति क्या होगी—यह सवाल भी इस घटनाक्रम के बाद उठ रहा है।

अब प्रशासन के अगले कदम पर नजर

धरने के बाद अब निगाह इस बात पर है कि मनपा प्रशासन लंबित मामलों पर क्या कार्रवाई करता है। खासकर कर्मचारियों से जुड़े मामलों और नागरिकों की शिकायतों के निपटारे को लेकर प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल होती है या नहीं, इस पर ठाणेकरों की नजर रहेगी।

फिलहाल, सत्तारूढ़ पक्ष से जुड़े पूर्व महापौर का प्रशासन के खिलाफ धरना ठाणे की राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल में चर्चा का नया विषय बन गया है।

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